बॉन्ड प्रतिफल से बैंक मुश्किल में

अनूप रॉय | मुंबई Dec 29, 2017 03:16 PM IST

बॉन्ड प्रतिफल में हो रही तीव्र बढ़ोतरी से बैंक मुश्किल में फंस गए हैं और चूंकि शुक्रवार को बैंकों के लिए तिमाही समाप्त रही है, लिहाजा ट्रेजरी विभाग सिर्फ प्रतिफल में कमी की उम्मीद कर सकता है ताकि उनको कम से कम नुकसान हो। 10 वर्षीय बॉन्ड का प्रतिफल अगस्त से अब तक करीब 96 आधार अंक चढ़ा है जबकि भारतीय रिजर्व बैंक ने उसी महीने दरों में कटौती की थी। इस तिमाही की शुरुआत से प्रतिफल की चाल अब तक करीब 73 आधार अंक रही है। एक आधार अंक एक प्रतिशत के 100वें हिस्से के बराबर होता है।

बैंकों के लिए जो चीजें दयनीय बना रही है वह है दिसंबर, जब दिसंबर तिमाही के लिए ज्यादातर बैंकों को दिवालिया प्रक्रिया के लिए भेजी गई दबाव वाली परिसंपत्तियों के लिए कम से कम 50 फीसदी प्रावधान करना होगा या फिर उन्हें समाधान के जरिए काफी कटौती स्वीकार करनी होगी। इस मद में करीब 2 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान करना होगा, जो मोटे तौर पर उतनी ही रकम है जितनी सरकार ने तीन साल में इन बैंकों को देने का वादा किया है।

10 वर्षीय बॉन्ड का प्रतिफल 7.396 फीसदी पर बंद हुआ, जो पिछले बंद भाव से करीब 18 आधार अंक ज्यादा है। 8 फरवरी के बाद कारोबारी सत्र के दौरान यह प्रतिफल में सबसे तेज चाल है और कुछ बैंकों ने स्टॉप लॉस को छू लिया है। बॉन्ड डीलर मोटे तौर पर प्रतिफल में तीव्र बढ़ोतरी के लिए सरकार के संदेश को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। यहां तक कि एक या दो महीने पहले आला सरकारी अधिकारियों ने कहा था कि वे अपने लिए तय राजकोषीय अनुशासन का सम्मान करेंगे। 

अब अल्पावधि की बचत दर में कटौती के बाद बचत जमा के जरिए कमी के वित्तपोषण को भी झटका लग सकता है। सरकार ने छोटी बचत के जरिए एक लाख करोड़ रुपये संग्रहीत किए हैं, लेकिन चौथी तिमाही में कितनी निकासी होगी, इसका पता नहीं है। शुद्ध रूप से अतिरिक्त उधारी इस वित्त वर्ष में करीब 73,000 करोड़ रुपये बैठती है, जिसमें ट्रेजरी बिल शामिल है। ये चीजें राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद के न्यूनतम 3.5 फीसदी पर पहुंचा सकती है, जो 3.24 फीसदी के अनुमान से ज्यादा होगा।

एक वरिष्ठ बॉन्ड डीलर ने कहा, अगर आप सरकार के तर्क पर ध्यान देंगे कि हम तारीख वाले बॉन्ड को ट्रेजरी प्रतिफल के साथ समायोजित कर रहे हैं तो बढ़ते ब्याज दर के परिदृश्य में कोई भी इस अवधि में जोखिम नहींं चाहता। यह डीलर सरकारी उधारी कार्यक्रम के बाद प्रतिफल में हो रही तीव्र बढ़ोतरी के बारे में बता रहे थे।

भारतीय रिजर्व बैंक शुक्रवार को 15,000 करोड़ रुपये के बॉन्ड की नीलामी करेगा। काफी कुछ इस पर निर्भर करता है कि यह  नीलामी कितनी कामयाब रहती है। बैंकरों को उम्मीद है कि सभी बॉन्ड बिक जाएंगे। हालांकि ऐसा होने की संभावना कम है। पहला, बाजार में संभावना जतायी जा रही है कि फिसलने से पहले प्रतिफल बढ़कर 7.5 फीसदी पर पहुंच सकता है या बजट के आसपास 7.80 फीसदी पर भी जा सकता है। इसलिए नीलामी के लिए लगाई जाने वाली बोली में ज्यादा प्रतिफल की मांग होगी। बॉन्ड डीलरों ने कहा कि मौजूदा बाजार परिस्थितियों में जिस प्रतिफल की मांग बाजार करेगा वह शायद ही आरबीआई को स्वीकार्य हो। सरकार के मनी मैनेजर होने के नाते यह देखना भी आरबीआई का काम है कि सरकार सस्ते में उधारी ले।

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