भारत की बाह्य क्षेत्र संभावनाएं चमकदार, कच्चे तेल के दाम पैदा कर सकते हैं समस्या : समीक्षा

भाषा | नई दिल्ली Jan 29, 2018 04:13 PM IST

आगामी वर्षों में वैश्विक व्यापार में बढ़ोतरी की संभावनाओं के बीच भारत की बाह्य क्षेत्र संभावनाएं चमकदार नजर आती हैं। हालांकि, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें कुछ समस्या पैदा कर सकती हैं। संसद में आज पेश 2017-18 की आर्थिक समीक्षा यह अनुमान व्यक्त किया गया है। समीक्षा कहती है, इस साल तथा आगामी वर्षों में भारत की बाह्य क्षेत्र संभावनाएं बेहतर नजर आती हैं। वर्ष 2017 और 2018 में वैश्विक व्यापार में क्रमश: 4.2 प्रतिशत तथा 4 प्रतिशत बढ़ोतरी की उम्मीद है। वर्ष 2016 में यह 2.4 प्रतिशत रही थी। इसमें कहा गया है कि प्रमुख भागीदार देशों का व्यापार सुधर रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि देश की निर्यात वृद्धि रफ्तार पकड़ रही है। हालांकि, कच्चे तेल के दामों में बढ़ोतरी का जोखिम कायम है। समीक्षा में कहा गया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार से विदेश में रहने वाले भारतीयों से धन प्रवाह बढ़ सकता है। यह रफ्तार पकड़ रहा है। सरकार की समर्थन देने वाली नीतियां मसलन माल एवं सेवा कर (जीएसटी) लॉजिस्टिक्स तथा व्यापार सुगमता नीतियों से इसमें और मदद मिल सकती है। चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-दिसंबर अवधि में देश से वस्तुओं का निर्यात 12 प्रतिशत बढ़कर 223.51 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में 199.46 अरब डॉलर रहा था। चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में आयात 21.76 प्रतिशत बढ़कर 338.36 अरब डॉलर रहा। इस तरह व्यापार घाटा 114.85 अरब डॉलर हो गया। देश के इतिहास में यह पहला मौका है जबकि राज्यों के अंतरराष्ट्रीय निर्यात के आंकड़ों को आर्थिक समीक्षा में शामिल किया गया है। पांच राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना का देश के निर्यात में 70 प्रतिशत हिस्सा है। सेवाओं के निर्यात के बारे में कहा गया है कि हालांकि, इस साल वैश्विक स्तर पर वस्तुओं और सेवाओं का निर्यात बढऩे की उम्मीद है, लेकिन इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता, संरक्षण और कड़े आव्रजन नियमों से सेवाओं के निर्यात पर असर पड़ सकता है। वर्ष 2016 में 3.4 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ भारत वाणिज्यिक सेवाओं के निर्यात के मामले में आठवें नंबर पर रहा। हालांकि, वस्तुओं के निर्यात में भारत का हिस्सा सिर्फ 1.7 प्रतिशत रहा। 
 
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