ज्ञान का शुद्ध सृजक बने भारत: समीक्षा

भाषा | नई दिल्ली Jan 29, 2018 04:21 PM IST

आर्थिक समीक्षा के अनुसार भारत को अपनी कुछ महत्वपूर्ण चुनौतियों से पार पाने के लिए ज्ञान के शुद्ध उपभोक्ता के बजाय ज्ञान का शुद्ध सृजक बनने की दिशा में कदम उठाने होंगे। वित्तमंत्री अरुण जेटली ने आर्थिक समीक्षा 2017-18 आज संसद में पेश की। समीक्षा में कहा गया है, विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में उभरने के बाद भारत को ज्ञान के उपभोक्ता के स्थान पर ज्ञान प्रदाता के रूप में परिवर्तित होने की आवश्यकता है। इसके अनुसार जहां एक और वैज्ञानिक शोध व ज्ञान का विस्तार हो रहा है वहीं दूसरी तरफ भारत के युवा इंजीनियरिंग, चिकित्सा, प्रबंधन व सरकारी नौकरियों को उच्च प्राथमिकता देते हैं। भारत को वैज्ञानिक उद्यम के क्षेत्र में उत्साह बढ़ाने व लक्ष्य को पुर्ननिर्धारित करने की आवश्यकता है ताकि अधिक से अधिक युवा वैज्ञानिक उद्यम के प्रति आकर्षित हो सकें। इससे ज्ञान भंडार का आधार मजबूत होगा। इसके अनुसार विज्ञान में निवेश भारत की सुरक्षा व्यवस्था की मूलभूत आवश्यकता है। नागरिकों की सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन से होने वाली अनिश्चितताओं का सामना करने तथा साइबर युद्ध जैसे नए खतरों से निपटने के लिए भी विज्ञान में निवेश की जरूरत है।
 
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