7 - 7.5 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि के साथ भारत होगा सबसे तेजी से बढने वाली अर्थव्यवस्था

भाषा | नई दिल्ली Jan 29, 2018 06:22 PM IST

संसद में आज पेश आर्थिक समीक्षा में विश्व बाजार में कच्चे तेल के चढ़ते दाम और नित नई रिकार्ड ऊंचाई पर पहुंच रहे शेयर बाजार में अचानक गिरावट के खतरे को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बताया गया है। हालांकि, समीक्षा में उम्मीद जताई गई है कि 2018-19 में 7 से 7.5 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि हासिल करने के साथ भारत एक बार फिर दुनिया की सबसे तेजी से बढऩे वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। वर्ष 2018-19 का आम बजट पेश होने से दो दिन पहले संसद में पेश आर्थिक समीक्षा में राजकोषीय घाटे को कम करने की राह में थोड़े विराम की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।

गौरतलब है कि यह 2019 के आम चुनाव से पहले का आखिरी पूर्ण बजट होगा। आम बजट एक फरवरी को पेश किया जाएगा। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2017-18 की आर्थिक समीक्षा को आज संसद में पेश किया। समीक्षा को मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमणियम और उनकी टीम ने तैयार किया। समीक्षा में चालू वित्त वर्ष की आर्थिक वृद्धि 6.75 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। इसमें कहा गया है कि आने वाले साल में निर्यात के साथ साथ निजी क्षेत्र का निवेश गति पकड़ेगा। इससे पहले केन्द्रीय सांख्यकी कार्यालय (सीएसओ) ने चालू वित्त वर्ष के दौरान आर्थिक वृद्धि 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान जारी किया। इस लिहाज से आर्थिक समीक्षा में अनुमान इससे ऊंचा आया है। इससे पिछले वर्ष 2016-17 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि 7.1 प्रतिशत रही थी और उससे पिछले साल यह 8 प्रतिशत और 2014-15 में 7.5 प्रतिशत रही थी। चालू वित्त वर्ष के दौरान आर्थिक वृद्धि पर माल एवं सेवाकर (जीएसटी) लागू होने और उससे पहले नवंबर 2016 में की गई नोटबंदी के बाद का असर रहा। आर्थिक समीक्षा संसद के पटल पर रखे जाने के बाद संवाददाता सम्मेलन में सुब्रमणियम ने कहा, 'अर्थव्यवस्था में तेजी से सुधार आ रहा है। नोटबंदी और जीएसटी का अस्थायी प्रभाव समाप्त होता दिख रहा है।' 

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