एलटीसीजी कर पर सरकार का जवाब, विनिर्माण को मिलेगा प्रोत्साहन

भाषा | नई दिल्ली Feb 05, 2018 05:27 PM IST

शेयर बाजार में जारी गिरावट के सिलसिले के बीच सरकार ने आज शेयरों की बिक्री पर दीर्घावधि का पूंजीगत लाभ कर (एलटीसीजी) लगाने के कारण स्पष्ट किए। सरकार का कहना है कि इस कर को लगाने की प्रमुख वजह इस तरह की आय पर कर छूट विनिर्माण क्षेत्र के लिए सही नहीं है और इससे निवेश कारोबार की बजाय वित्तीय परिसंपत्तियों को स्थानांतरित होता है। बजट 2018-19 में बार-बार पूछे जाने वाले सवालों (एफएक्यू) पर स्पष्टीकरण देते हुए सरकार ने कहा कि बजट में एक लाख रुपये या अधिक मूल्य के शेयरों की बिक्री पर रियायती दस प्रतिशत की दर से दीर्घावधि का पूंजीगत लाभ कर लगाने का प्रावधान किया गया है। इससे पहले तक दीर्घावधि की पूंजीगत संपत्तियां जो किसी कंपनी के इक्विटी शेयर या इक्विटी आधारित कोष का यूनिट या कारोबारी न्यास की यूनिट है, के स्थानांतरण से होने वाले पूंजीगत लाभ पर आयकर कानून की अनुच्छेद (38) की धारा-10 के तहत छूट थी।

हालांकि, इस तरह की दीर्घावधि की पूंजीगत संपत्तियों के लेनदेन पर प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) लगता था। एफएक्यू में कहा गया है कि इस तरह की व्यवस्था विनिर्माण के लिए पक्षपातपूर्ण थी और इससे वित्तीय संपत्तियों में निवेश को प्रोत्साहन मिलता है। इससे कराधार का भी क्षरण हो रहा था जिससे राजस्व का नुकसान हो रहा था। एफएक्यू में कहा गया है कि इस कर छूट को अब वापस ले लिया गया है, जिससे आर्थिक खामी को कम से कम किया जा सकेगा और कराधार बढ़ाया जा सके।

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