दलाल पथ पर मॉनसून का मामूली असर!

सचिन मामबटा | मुंबई Apr 17, 2018 10:31 PM IST

हाल के वर्षों में मॉनसूनी बारिश का शेयर बाजार पर नहीं दिखा ज्यादा प्रभाव
कम बारिश वाले वर्षों में भी सेंसेक्स ने दिया दो अंक में रिटर्न
जीडीपी में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी कम होना इसकी अहम वजह

बेहतर मॉनसूनी बारिश का अनुमान भले ही कृषि क्षेत्र और देश की अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत हो लेकिन दलाल पथ पर इससे खास असर नहीं पड़ता है। मौसम विभाग द्वारा मॉनसून के सामान्य होने की घोषणा के एक दिन बाद बिज़नेस स्टैंडर्ड ने पिछले 15 वर्षों के मॉनसून के आंकड़े और बीएसई सेंसेक्स के प्रदर्शन का विश्लेषण किया।

एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स ने सामान्य से 10 फीसदी कम बारिश वाले वर्षों में 29.75 फीसदी रिटर्न दिया। इक्विनॉमिक्स रिसर्च ऐंड एडवाइजरी के संस्थापक जी चोकालिंगम ने कहा कि मॉनसून का प्रभाव शेयर बाजार पर कम होता दिख रहा है। उन्होंने कहा, 'मुद्रास्फीति और ग्रामीण मांग के लिहाज से बारिश महत्त्वपूर्ण है लेकिन अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी कम हो रही है। सकल घरेलू उत्पाद का अधिकांश हिस्सा अब मॉनसून पर निर्भर नहीं है।'

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के कार्यकारी उपाध्यक्ष एवं मुख्य निवेश अधिकारी पीयूष गर्ग ने कहा कि कुछ क्षेत्रों जैसे कि ग्रामीण इलाकों में ऋण देने वाली कंपनियां और खपत मांग से जुड़ी कंपनियां मॉनसून पर ज्यादा निर्भर हैं। गंभीर सूखे की स्थिति से वित्तीय नीति प्रभावित हो सकती है क्योंकि ऐसे में सरकार को सकारात्मक कदम उठाने पड़ते हैं। हालांकि आमतौर पर शेयर बाजार में इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है। उन्होंने कहा, 'साल दर साल बारिश का बाजार पर असर कम हो रहा है।'

2004 में जब बारिश लंबी अवधि का औसत से 13 फीसदी कम रही थी तब सेेंसेक्स में 13.08 फीसदी की तेजी आई थी। वैश्विक मंदी के बाद 2009 में इसमें 81.03 फीसदी की उछाल आई जबकि उस साल 22 फीसदी कम बारिश हुई थी।

2014 में भी बारिश करीब 12 फीसदी कम रही लेकिन सेंसेक्स में 29.89 फीसदी की तेजी आई। केवल 2015 ही अपवाद रहा जब बारिश 14 फीसदी कम रही और सूचकांक में 5.03 फीसदी की गिरावट आई। मिजुहो बैंक के इंडिया स्ट्रैटजिस्ट तीर्थंकर पटनायक भी इससे सहमत हैं कि मॉनसून का बाजार पर उतना प्रभाव नहीं पड़ता है।

उन्होंने यह भी कहा कि कई बार मॉनसून अच्छा रहने से भी गिरावट की आशंका रहती है। उन्होंने कहा, 'महंगाई घटने के लिहाज से अच्छी बारिश मुफीद है लेकिन खाद्यान्न उत्पादन बढऩे से कृषि प्राप्तियों पर दबाव देखा जा सकता है।' ग्रामीण इलाकों में लोगों के हाथों में कम पैसा होने से मांग भी घटती है। सोमवार को मॉनसून सामान्य रहने का अनुमान जारी किया गया तो बाजार में पिछले आठ दिनों से तेजी बनी हुई थी। मंगलवार को भी बाजार में तेजी रही और सेंसेक्स 89.63 अंक चढ़कर बंद हुआ।

अब 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड की प्राप्तियां और एसऐंडपी बीएसई 500 की यील्ड का अंतर करीब-करीब समान हो गया है, जो बाजार में हालिया गिरावट से पहले का स्तर है। 10 वर्षीय बॉन्ड की यील्ड मंगलवार को 6.489 फीसदी रही और बीएसई 500 की यील्ड 5.48 फीसदी रही।

अगर अप्रैल की समाप्ति इसी स्तर पर होती है तो दोनों के बीच अंतर 2.01 फीसदी का रह जाएगा। जबकि पिछले दशक के महीनों में यह 90 फीसदी हुआ करता था। ज्यादा अंतर होने से गिरावट का संकेत मिलता है।

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