नई ई-कॉमर्स नीति छह महीने में

शुभायन चक्रवर्ती | नई दिल्ली Apr 24, 2018 10:51 PM IST

नई नीति में ई-कॉमर्स कारोबार और ग्राहकों के हितों का रखा जाएगा पूरा ध्यान
इसमें डेटा की निजता और कराधान सहित तकनीकी पहलू भी होंगे शामिल
 
ई-कॉमर्स पर गठित थिंक टैंक की पहली बैठक, कई कारोबारी दिग्गज हुए शामिल
नई नीति के लिए कार्यबल बनाने का प्रस्ताव, जो 5 महीने में देगा अपनी रिपोर्ट

सरकार ने आखिरकार आज घोषणा कर दी कि बहुप्रतीक्षित ई-कॉमर्स नीति का मसौदा 6 महीने में बनकर तैयार हो जाएगा। इस व्यापक नीति में ऑनलाइन ई-कॉमर्स कारोबार और उसके उपभोक्ताओं से जुड़े हर पहलू पर जोर दिया जाएगा। डेटा प्राइवेसी और कराधान के अलावा ऑनलाइन कारोबार से जुड़े कई तकनीकी पहलू जैसे प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, सर्वर को देश में ही रखने और कनेक्टिविटी भी इस नीति का हिस्सा होंगे।  

वाणिज्य सचिव रीता तेवतिया ने आज को कहा कि ई-कॉमर्स नीति का मसौदा बनाने की कवायद में बड़ी संख्या में मंत्रालय, कई प्रमुख कंपनियां और भारतीय प्रतिस्पद्र्घा आयोग और भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण जैसे नियामक शामिल हैं। सरकार ने इस नीति का मसौदा तैयार करने के लिए एक थिंक टैंक का गठन किया था जिसकी मंगलवार को पहली बैठक हुई।

ई-कॉमर्स क्षेत्र के लिए संभावित नियामक के मुद्दे पर तेवतिया ने कहा कि यह इस बात पर निर्भर करेगा कि नीति को विधायी आवश्यकताओं और नए कानून की जरूरत होगी या फिर मौजूदा कानून पर्याप्त होंगे। अब एक कार्यबल बनाया जाएगा जो अगले 5 महीने में ई-कॉमर्स थिंक टैंक को अपनी सिफारिशें देगा। इसके बाद थिंक टैंक के पास मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए एक महीने का समय होगा।

गुरुवार को थिंक टैंक ने ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ इस बारे में सलाह मशविरा किया और इस दौरान इस क्षेत्र की सभी श्रेणियों की दिग्गज कंपनियों के प्रतिनिधि मौजूद थे। इनमें फ्लिपकार्ट और स्नैपडील, पेटीएम और मेकमाईट्रिप शामिल है। अधिकांश कंपनियां डेटा प्राइवेसी के अलावा कराधान के मुद्दे पर ज्यादा मुखर दिखीं। उन्होंने दुकानदारों के इन आरोपों का भी जोरदार तरीके से खंडन किया कि वे बहुत ज्यादा छूट दे रही हैं।

स्नैपडील के मुख्य कार्याधिकारी कुणाल बहल ने कहा, 'इस बात पर चर्चा हुई कि कोई छूट देने की अनुमति नहीं है और ऑनलाइन मार्केटप्लेस पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इनवेंट्री स्वामित्व की अनुमति नहीं है। अलबत्ता इस बात को लेकर काफी चिंता जताई गई कि इसे कारगर तरीके से लागू किया जा रहा है या नहीं और अगर ऐसा नहीं है तो इस पर क्या किया जा रहा है।'

पिछले दो वर्षों में विकसित देशों की ओर से ई-कॉमर्स के लिए वैश्विक नियमों का पालन करने पर जोर दिया जा रहा है। भारत का तर्क है कि इससे विकासशील देशों से जुड़े खाद्य सुरक्षा और अन्य विकास के मुद्दे दरकिनार हो जाएंगे। लेकिन घरेलू ई-कॉमर्स उद्योग भी प्रस्ताव को लेकर ठंडी प्रतिक्रिया दे रहे हैं, उन्हें आशंका है कि नए नियमों से विदेशी कंपनियों के लिए बाजार खुल जाएगा।

पेटीएम के प्रमुख विजय शेखर शर्मा ने कहा, 'यह डब्ल्यूटीओ का एजेंडा है, इसलिए हमारा सुझाव है कि भारत के डेटा प्लेटफॉर्म और बाजार की पहुंच उपलब्ध कराना पारस्परिक होना चाहिए। भारत का खुला बाजार वैश्विक कंपनियों के लिए काफी फायदेमंद है लेकिन घरेलू कंपनियों के लिहाज से यह ठीक नहीं है।'

 

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