निजी हाथ में जयपुर लखनऊ हवाई अड्डे

अरिंदम मजूमदार | नई दिल्ली May 14, 2018 11:03 AM IST

चेन्नई और कोलकाता हवाई अड्डे भी शामिल
30 साल के लिए सौंपा जाएगा निजी हाथों में
टर्मिनलों की निजीकरण योजना को नहीं मिला भाव

हवाई अड्डों के टर्मिनल का रखरखाव निजी हाथों में सौंपने की सरकार की कोशिशों को निवेशकों ने कोई भाव नहीं दिया है। नरेंद्र मोदी सरकार अब हवाई अड्डों के पूर्ण निजीकरण पर विचार कर रही है। पिछली संप्रग सरकार ने यह योजना शुरू की थी लेकिन कर्मचारी संगठनों के विरोध के कारण मोदी सरकार ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया था। सरकार की चेन्नई, कोलकाता, कोच्चि, पुणे, अहमदाबाद, जयपुर, लखनऊ और गुवाहाटी के हवाई अड्डों को निजी हाथों में सौंपने की योजना है।

सूत्रों के मुताबिक फिलहाल नागरिक उड्डïयन मंत्रालय में उन मॉडलों पर चर्चा कर रहा है जिनके तहत हवाई अड्डों को बोली के जरिये बेचा जाएगा। इन हवाई अड्डों को 30 साल के लिए निजी हाथों में दिया जाएगा और टैरिफ पहले की निर्धारित कर दिया जाएगा। अभी दो मॉडलों पर चर्चा हो रही है जिनमें से एक फॉरवर्ड बोली प्रक्रिया है जो प्रति यात्री टैरिफ पर आधारित है।

इस मॉडल के तहत कंपनियां प्रति यात्री फीस पर बोली लगाएंगी जिसे वे भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) के साथ साझा करेंगी। सबसे बड़ी बोली लगाने वाली कंपनी विजेता होगी। छूट की अवधि के दौरान ऑपरेटर द्वारा लिया जाना वाला लैंडिंग और उपयोगकर्ता शुल्क मंत्रालय पहले ही निर्धारित कर देगा। दूसरा मॉडल रिवर्स बोली मॉडल है जो टैरिफ आधारित बोली व्यवस्था है।

इसके तहत लैंडिंग और उपयोगकर्ता शुल्क पर सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी विजेता बनेगी। इस मामले में एएआई के साथ साझा किए जाने वाले राजस्व को पहले की तय कर दिया जाएगा।  एएआई के अध्यक्ष गुरुप्रसाद महापात्र ने कहा कि सरकार विभिन्न सुझावों पर विचार कर रही है लेकिन उन्होंने इस बारे में विस्तार से बताने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, 'हम सभी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।'

अधिकारियों का कहना है कि बोली का मॉडल दिल्ली और मुंबई हवाई अड्डों में अपनाए गए मॉडल से अलग होगा। एक अधिकारी सरकारी ने कहा, 'निजीकरण का हमारा अनुभव कहता है कि लागत प्लस परियोजनाओं में टैरिफ ऑपरेटर द्वारा किए गए निवेश पर आधारित है। इसके परिणामस्वरूप उपयोगकर्ता शुल्क बढ़ गया। अब हम एक ऐसे मॉडल की तलाश में हैं जहां हवाई अड्डों को तय टैरिफ के आधार पर निजी हाथों में सौंपा जा सके।'

दिल्ली और मुंबई हवाई अड्डों के निजीकरण के मामले में हवाई अड्डे के सकल राजस्व से एएआई को की गई सर्वाधिक राजस्व हिस्सेदारी की पेशकश के आधार पर बोलीकर्ता का चयन किया गया। इससे डेवलपर के लिए निवेश पर प्रतिफल की गुंजाइश कम हो गई जिससे मुआवजे के लिए टैरिफ बढ़ गया। पिछले दशक के दौरान इन दो हवाई अड्डों के ऑपरेटरों जीएमआर और जीवीके की लागत अनुमान से बढ़ गई क्योंकि पूंजीगत खर्च की उचित सीमा के लिए स्पष्ट प्रक्रिया नहीं थी।

उदाहरण के लिए दिल्ली और मुंबई हवाई अड्डों के आधुनिकीकरण की प्रत्येक की लागत दोगुना से अधिक बढ़कर 3 अरब डॉलर पहुंच गई। एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट एयरपोर्ट ऑपरेटर्स के महासचिव सत्यन नायर ने कहा, 'हम सरकार के इस कदम का स्वागत करते हैं। पहले टैरिफ निर्धारित करने से नियामकीय स्पष्टïता आएगी और विदेशी हवाई अड्डा डेवलपर भारतीय हवाई अड्डों में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित होंगे।

हवाई अड्डों के विस्तार के लिए जरूरी निवेश का एक बड़ा हिस्सा विदेशी कंपनियों से आएगा।' अहमदाबाद और जयपुर के हवाई अड्डा टर्मिनलों के संचालन और रखरखाव का काम निजी हाथों को सौंपने के लिए आमंत्रित की गई बोली प्रक्रिया विवाद के साथ खत्म हो गई। इसके लिए केवल जीवीके समूह ने ही बोली लगाई थी। इसके बाद ही सरकार को दूसरे मॉडल तलाशने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

बोली प्रक्रिया का संचालन करने वाले एएआई के अधिकारियों ने कहा कि निजी कंपनियों के मुताबिक ये परियोजनाएं व्यावहारिक नहीं थीं और इसी कारण वे इससे दूर रहीं। संचालन एवं रखरखाव मॉडल के तहत जयपुर और अहमदाबाद में केवल टर्मिनल के रखरखाव और कार पार्किंग को ही निजी हाथों में सौंपा जाना था। एक अधिकारी ने कहा, निजी कंपनियों का कहना है कि केवल हवाई अड्डा टर्मिल के प्रबंधन के लिए निवेश करना उनके लिए फायदे का सौदा नहीं है। उनका सुझाव है कि आसपास के विकास की गतिविधियों को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए।

 

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