90 रुपये लीटर पहुंचेगा पेट्रोल!

अभिषेक वाघमारे | नई दिल्ली May 22, 2018 11:29 AM IST

दिल्ली में पेट्रोल की खुदरा कीमत 85 रुपये और मुंबई में 90 रुपये लीटर तक पहुंच सकती है। बिज़नेस स्टैंडर्ड के एक विश्लेषण के मुताबिक अगर 2018-19 में भारत का तेल आयात बिल 50 अरब डॉलर बढ़ता है तो पेट्रोल की कीमतों में आग लग सकती है।  अगर केंद्र अपने उत्पाद शुल्क और राज्य मूल्य वद्र्घित कर (वेट) में कटौती नहीं करते हैं और डॉलर-रुपये की विनिमय दर 2017-18 के स्तर पर बरकरार रहती है तो पेट्रोल की कीमतें 85-90 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती हैं।

अगर रुपया कमजोर होता है तो पेट्रोल की खुदरा कीमत इससे भी कहीं अधिक होगी। तेल की आसमान छूती कीमतों को रोकने के लिए सरकार के पास उत्पाद शुल्क में कटौती करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष सी गर्ग ने पिछले शुक्रवार को कहा था कि वैश्विक कारणों से भारत के कच्चे तेल के आयात का बिल पर 25 से 50 अरब डॉलर का बोझ पड़ेगा।

भारत ने 2017-18 में 88 अरब डॉलर का कच्चा तेल आयात किया था जबकि पेट्रोलियम उत्पादों को मिलाकर यह बिल 109 अरब डॉलर का था। बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच, जैफ्रीज और मॉर्गन स्टैनली जैसे अमेरिका के निवेश बैंकों ने पिछले सप्ताह अनुमान जताया था कि 2018-2022 के दौरान तेल की कीमतें 90 से 100 डॉलर प्रति बैरल पहुंच सकती है।

अलबत्ता कुछ वैश्विक और घरेलू कंपनियों ने इसके 80 डॉलर प्रति बैरल रहने की संभावना जताई है। लेकिन उनका कहना है कि अगर उत्पाद शुल्क में कटौती नहीं की गई तो कीमतें बढ़ सकती हैं। एचएसबीसी ग्लोबल रिसर्च के मुख्य अर्थशास्त्री (भारत) प्रांजल भंडारी ने एक रिपोर्ट में कहा कि अगर कच्चे तेल की कीमत साल में औसतन 80 डॉलर रहती है तो मुख्य महंगाई 5.4 फीसदी होगी जबकि केंद्र और राज्यों का संयुक्त राजकोषीय घाटा 6.2 फीसदी पहुंच जाएगा।

इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने इस महीने अपनी रिपोर्ट में कहा, 'सरकार को राजकोषीय घाटे और महंगाई के जोखिमों के बीच संतुलन बनाना होगा। अगर तेल की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर जाती है तो उत्पाद शुल्क में कटौती से राजकोषीय स्थिति प्रभावित होगी।' ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म सीएलएसए की हाल में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक तेल की ऊंची कीमतों से भारत जैसे उभरते बाजारों में अल्पावधि और दीर्घावधि में महंगाई बढ़ेगी जबकि विकसित अर्थव्यवस्थाओं के लिए दीर्घावधि में इससे महंगाई कम होगी।

पिछले आंकड़ों के मुताबिक अगर भारत को अपना आयात बिल 130 अरब डॉलर रखना है तो वित्त वर्ष 2019 के दौरान तेल की औसत कीमत 81 डॉलर प्रति बैरल रहनी चाहिए। अप्रैल-मई में तेल की औसत कीमत 71-72 डॉलर प्रति बैरल है और आने वाले महीनों में यह 85 से 90 डॉलर प्रति बैरल पहुंच सकती है। इससे तेल विपणन कंपनियों को कीमतें बढ़ानी होंगी जिससे दिल्ली में पेट्रोल की खुदरा कीमत 85 रुपये लीटर पहुंच जाएगी।

कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक तेल विपणन कंपनियों का मुनाफा बनाए रखने के लिए आज पेट्रोल की कीमत 4.6 रुपये और डीजल की 3.8 रुपये लीटर बढ़ाने की जरूरत है जब कच्चे तेल की कीमत 77 डॉलर प्रति बैरल है। ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध, वेनेजुएला में राजनीतिक संकट, लीबिया और इराक में अस्थिरता, सऊदी अरब की कंपनी अराम्को का तत्काल सार्वजनिक निर्गम, अमेरिका के शेल तेल क्षेत्रों से आपूर्ति में कमी और उभरते बाजारों से मांग में बढ़ोतरी से तेल की कीमतों में तेजी आ रही है।

तेल निर्यात करने वाले देशों के संगठन ओपेक ने इस महीने की अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 2018 में तेल की रोजाना मांग 16.5 लाख बैरल बढऩे का अनुमान है। इस तरह रोजाना औसतन मांग 988.5 लाख बैरल पहुंच जाएगी। यह अप्रैल के अनुमान से रोजाना 25,000 बैरल अधिक है। रिपोर्टों के मुताबिक अरामको के सार्वजनिक निगम की बेहतर कीमत पाने के लिए वहां की सरकार निकट भविष्य में तेल की कीमतें बढ़ाना चाहती है।

ओपेक की रिपोर्ट में कहा गया है कि वेनेजुएला से 2016 में रोज 22 लाख बैरल तेल की आपूर्ति हो रही थी जबकि अप्रैल 2018 में घटकर 14 लाख बैरल रह गई।अमेरिका से हाल के वर्षों में शेल तेल की आपूर्ति स्थिर बनी हुई है। डेलॉयट टच तोहमात्सू एलएलसी के देवाशिष मिश्रा ने कहा कि अमेरिका ने 1973 के बाद पहली बार रोजाना आपूर्ति में सुधार करके इसे एक करोड़ बैरल पहुंचाया है और उसके तेल क्षेत्रों की संख्या बढ़ रही है लेकिन बुनियादी समस्याओं के कारण हाल के दिनों में तेल आपूर्ति में कमी आई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि दीर्घावधि में तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से 2019 में आपूर्ति बहुत बढ़ सकती है। मिश्रा ने कहा, 'अगर सीमित आपूर्ति के कारण कीमतें बढ़ती हैं तो अराम्को के आईपीओ के बाद आपूर्ति बढऩे से कीमतें गिरेंगी। दिल्ली में अभी पेट्रोल की कीमत अब तक के सर्वोच्च स्तर 76.57 रुपये, मुंबई में 84.4 रुपये, चेन्नई में 79.47 रुपये और कोलकाता में 79.24 रुपये है। पेट्रोल की कीमतें रोज संशोधित हो रही हैं। कर्नाटक चुनावों के कारण 19 दिन तक कीमतें बढ़ाने पर अप्रत्यक्ष रोक लगी थी।

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