2018 में एफएमसीजी शेयरों ने दी बाजार को मात

दीपक कोरगांवकर और पुनीत वाधवा | मुंबई/नई दिल्ली May 25, 2018 11:06 AM IST

कैलेंडर वर्ष 2018 में एफएमसीजी कंपनियोंं का प्रदर्शन अब तक बाजार के मुकाबले बेहतर रहा है। इन कंपनियों की बिक्री की रफ्तार मार्च में समाप्त चौथी तिमाही में उम्मीद से अच्छी रही है।  कैलेंडर वर्ष 2018 में अब तक निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स 5.8 फीसदी चढ़ा है जबकि निफ्टी-50 में 0.95 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई है। वहीं एसऐंडपी बीएसई एफएमसीजी इंडेक्स में 4.3 फीसदी की उछाल आई है जबकि एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स में 0.85 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई है।

निफ्टी-50 और एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स 29 जनवरी 2018 के कारोबारी सत्र में दर्ज सर्वोच्च स्तर से क्रमश: 6.3 फीसदी व 5.3 फीसदी नीचे आए हैं। इसकी तुलना में निफ्टी एफएमसीजी और बीएसई एफएमसीजी इंडेक्स इस अवधि में क्रमश: 3.1 फीसदी व 2.5 फीसदी चढ़े हैं। विश्लेषकों ने इसकी वजह ग्रामीण व शहरी भारत में उपभोक्ताओं की बढ़ती मांग के चलते बिक्री में हुई बढ़ोतरी बताई, जिसके चलते निवेशक इस क्षेत्र की ओर आकर्षित हुए।

उन्होंने कहा, इसके अतिरिक्त निवेशक पिछले कुछ महीने से एफएमसीजी शेयरों की खरीद कर रहे हैं, जिसे उतारचढ़ाव वाले बाजार में सुरक्षित ठिकाना माना जाता है। इक्विनॉमिक्स रिसर्च के संस्थापक व प्रबंध निदेशक जी चोकालिंगम ने कहा, मुझे लगता है कि बिक्री में बढ़त की रफ्तार जारी रहेगी। पिछले कुछ महीनों से मिडकैप व स्मॉलकैप से रकम निकल रही है और लार्ज कैप खास तौर से एफएमसीजी क्षेत्र की ओर जा रही है।

अब तक 32 कंपनियों ने वित्त वर्ष 2018 की चौथी तिमाही के नतीजे घोषित किए हैं और इनके संयुक्त शुद्ध लाभ मेंं साल दर साल के हिसाब से 16.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और यह 74.24 अरब रुपये पर पहुंच गया जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 63.72 अरब रुपये रहा था। इन कंपनियों की शुद्ध बिक्री 6.9 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 465.58 अरब रुपये पर पहुंच गई, जो पिछले साल की समान अवधि में 435.49 अरब रुपये रही थी।

विश्लेषकों को लगता है कि शहरी भारत में मांग मजबूत बनी रहेगी और ग्रामीण इलाके में भी मांग धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रही है। सामान्य मॉनसून आदि के चलते उनका मानना है कि अप्रैल-मई 2019 के आम चुनाव को देखते हुए मांग में धीरे-धीरे सुधार होगा। हालांकि वे तेल की बढ़ती कीमतों को दिमाग में रखे हुए हैं, जो इनमें से कुछ कंपनियों के कच्चे माल की लागत में बढ़ोतरी हो सकती है।

प्रभुदास लीलाधर के विश्लेषकों ने एक रिपोर्ट में कहा, सरकार का इरादा न्यूनतम समर्थन मूल्य और बाजार में हस्तक्षेप के जरिए किसानों की आय में इजाफा करने का है, जो मांग के लिहाज से अच्छा है। इसकी वजह यह है कि ग्रामीण भारत की आबादी कुल आबादी का करीब 60 फीसदी है। नेस्ले इंडिया, एचयूएल, ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज, पराग मिल्क प्रॉडक्ट्स, जुबिलैंट फूडवक्र्स व ज्योति लैबोरेटरीज में 29 जनवरी के स्तर से 11 फीसदी से 28 फीसदी तक की तेजी दर्ज हुई है।

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