तेजी की ओर चली महंगाई

शुभायन चक्रवर्ती और इंदिवजल धस्माना | नई दिल्ली May 14, 2018 10:18 PM IST

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक और थोक मूल्य सूचकांक दोनों आधार पर महंगाई का दबाव बढ़ रहा है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित महंगाई दर तीन महीने के उच्च स्तर 4.58 प्रतिशत पर पहुंच गई है। वहीं थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित महंगाई दर 4 महीने के उच्च स्तर 3.18 प्रतिशत पर पहुंच गई। इन आंकड़ों के बाद मौद्रिक नीति समिति के सचेत रुख को सही ठहराया जा सकता है।  मार्च में सीपीआई 4.28 प्रतिशत और डब्ल्यूपीआई 2.47 प्रतिशत पर थी। 
 
गैर खाद्य और गैर तेल सीपीआई महंगाई 44 महीने के उच्चतम स्तर 5.9 प्रतिशत पर पहुंच गई। वहीं दूसरी ओर प्रमुख डब्ल्यूपीआई महंगाई 3.6 प्रतिशत पर करीब पूर्ववत बनी रही।  केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों मे बढ़ोतरी को पूरी तरह से ग्राहकों पर डालने से बच रही है। कर्नाटक में चुनाव होने की वजह से पेट्रोलियम की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं हुईष इसके बावजूद ईंधन की कीमतों ने महंगाई बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। केंद्र सरकार ने कर्नाटक में मतदान खत्म होने का इंतजार किया और उसके तत्काल बाद पेट्रोल व डीजल के दाम में क्रमश: 17 और 21 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की घोषणा की। ऐसे में अप्रैल की तुलना में मई में इसका ज्यादा असर दिख सकता है। 
 
इसके बावजूद पेट्रोल की महंगाई दर अप्रैल महीने में 9.58 प्रतिशत बढ़ी, जिसमें इसके पहले महीने में 2.55 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी। वहीं इस अवधि के दौरान डीजल के दाम में 13.01 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि इसके पहले महीने में 6.12 प्रतिशत की तेजी आई थी। इसके साथ ही इस दौरान पेट्रोल की खुदरा महंगाई 2.04 प्रतिशत से बढ़कर 8.08 प्रतिशत हुई है, जबकि डीजल की महंगाई 6.13 प्रतिशत से दोगुनी होकर 13.29 प्रतिशत पर पहुंच गई।  मौद्रिक नीति समिति ने 2018-19 के लिए महंगाई दर के अनुमान में कमी की थी, लेकिन कहा ता कि कच्चे तेल की कीमतों में हाल के समय में उतार चढ़ाव कम अवधि के परिदृश्य को उल्लेखनीय रूप से प्रभावित कर सकता है। 
 
इक्रा में मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नैयर ने कहा, 'कच्चे तेल के  दाम में तेज बढ़ोतरी का जोखिम सीपीआई महंगाई दर के अनुमान पर असर डाल सकता है और वित्त वर्ष 19 की पहली छमाही में एमपीसी के 4.7 से 5.7 प्रतिशत रहने के अनुमान से यह ज्यादा हो सकती है।' पेट्रोलियम पर उत्पाद शुल्क की कटौती के बारे में नैयर ने कहा कि सरकार जीएसटी के मासिक राजस्व के स्तर की अभी और निगरानी को प्राथमिकता दे सकती है और ई वे बिल पेश किए जाने के बाद इसके स्थिर होने पर ही फैसले की संभावना है। 
 
नैयर ने कहा, 'कुछ एमपीसी सदस्य जून 2018 की नीति में बदलाव के लिए मतदान कर सकते हैं, लेकिन विभिन्न महंगाई दरों में स्पष्टता, राजकोषीय जोखिम सहित विभिन्न पहलुओं की जांच के बगैर दरों में बढ़ोतरी की संभावना कम है।' वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में दरों में बढ़ोतरी के जोखिम की वजह से निकट अवधि के दौरान बॉन्ड यील्ड बढ़ सकता है। डब्ल्यूपीआई और सीपीआई में खाद्य महंगाई को देखें तो थोड़ा अंतर नजर आता है। सीपीआई महंगाई दर जहां पिछले महीने के करीब बराबर ( अप्रैल में 2.80 प्रतिशत रही, जबकि मार्च में 2.81 प्रतिशत थी) बनी रही, वहीं डब्ल्यूपीआई में 0.29 प्रतिशत की कमी आई है। 
कीवर्ड WPI, CPI, economy,

  
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