कच्चे तेल के आयात में तेजी

शुभायन चक्रवर्ती | नई दिल्ली May 15, 2018 09:56 PM IST

इंजीनियरिंग के सामान और दवाओं के निर्यात में दो अंकों की वृद्धि दर की वजह से अप्रैल महीने में भारत का निर्यात 5.71 प्रतिशत बढ़कर 25.91 अरब डॉलर पहुंच गया है। मार्च महीने में निर्यात में 0.66 प्रतिशत की कमी आई थी, उस हिसाब से यह बेहतर सुधार है। बहरहाल रत्न एवं आभूषण, चमड़ा और तैयार परिधान जैसे श्रम आधारित बड़े क्षेत्रों के निर्यात में कमी आई है, जिससे नौकरियों पर असर पड़ सकता है।  कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में तेजी आई है। अप्रैल महीने में रिफाइनरी उत्पादों का निर्यात 4.48 प्रतिशत कम हुआ है। बहरहाल संकुचन मार्च में 13.22 प्रतिशत घटने के बाद फरवरी में 27.44 प्रतिशत बढ़ी है। 
 
अप्रैल महीने में गैर तेल और गैर रत्न एवं आभूषण क्षेत्र का निर्यात 11.73 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि इसके पहले के महीने में 4.60 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी।  बहरहाल भारत के निर्यात में बढ़ोतरी आयात में वृद्धि से फीकी पड़ी है। अप्रैल महीने में आयात 4.60 प्रतिशत बढ़ा है, हालांकि मार्च महीने में हुई 7.15 प्रतिशत की बढ़ोतरी की तुलना में यह कम है।  इसके परिणामस्वरूप अप्रैल महीने में कारोबारी घाटा मामूली बढ़कर 13.7 अरब डॉलर हो गया है, जो मार्च के 13.6 अरब डॉलर के कारोबारी घाटे की तुलना में थोड़ा ज्यादा है। फरवरी में कारोबारी घाटा 12 अरब डॉलर था। 
 
कच्चे तेल का आयात 41 प्रतिशत बढऩे से आयात में तेजी आई है, जो इसके पहले महीने में हुई 13 प्रतिशत आयात वृद्धि की तुलना में ज्यादा है। इससे पता चलता है कि कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी हुई है।  विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया है कि भारत के तेल आयात के बिल में चालू वित्त वर्ष में बढ़ोतरी जारी रहेगी क्योंकि बाहरी दबाव जैसे ईरान समझौता रद्द होने और तेल उत्पादकों द्वारा उत्पादन में कटौती की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी होगी।  इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, 'अगर हम भारतीय क्रूड बॉस्केट की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल मानें तो हमें उम्मीद है कि कुल पेट्रोलियम, कच्चे तेल और उत्पादों का आयात बिल वित्त वर्ष 19 में बढ़कर 93 अरब डॉलर हो जाएगा, जो वित्त वर्ष 2018 में 70 अरब डॉलर था। इससे चालू खाता घाटा  65-70 अरब डॉलर तक बढऩे की संभावना है, जो वित्त वर्ष 2019 के जीडीपी का 2.4 प्रतिशत होगा।' 
 
श्रम आधारित क्षेत्रों में रेडीमेड गारमेंट्स के निर्यात में अक्टूबर 2017 से लगातार गिरावट आ रही है। इस क्षेत्र ने सिर्फ 1.49 अरब डॉलर का निर्यात किया है और अप्रैल में निर्यात में 22.7 प्रतिशत की गिरावट आई है, जो मार्च में आई 17.78 प्रतिशत गिरावट की तुलना में ज्यादा है।  परिधान निर्यात संवर्धन परिषद के चेयरमैन एचकेएल मागू ने कहा, 'इस समय यह क्षेत्र बुरे दौर से गुजर रहा है क्योंकि इसकी प्रतिस्पर्धा क्षमता खत्म हो गई है। इसकी वजह से अक्टूबर 2017 से हर महीने निर्यात में कमी आ रही है।' 
 
फेडरेशन आफ इंडियन एक्सपोट्र्स ऑर्गेनाइजेशन (फियो) के अध्यक्ष गणेश कुमार गुप्ता ने कहा, 'श्रम से जुड़े करीब सभी क्षेत्रों, रत्न एवं आभूषण, चमड़ा एवं चर्म उत्पाद, रेडीमेड गार्मेंट्स, टेक्सटाइट, फ्लोर कवरिंग, कालीन, हस्तशिल्प सहित जूट विनिर्माण, कृषि उत्पाद सहित तमाम वस्तुओं के निर्यात में कमी आई है, जिनके विनिर्माण से एमएसएमई क्षेत्र जुड़े हुए हैं।' उन्होंने कहा कि एमएसएमई से जुड़ा निर्यात क्षेत्र अभी भी नकदी के संकट से जूझ रहा है क्योंकि बैंक और कर्ज देने वाली एजेंसियां लगातार कर्ज देने के मानक सख्त कर रही हैं और जीएसटी रिफंड भी सुस्त है जिसकी वजह से नए वित्त वर्ष में निर्यात को लेकर चिंता बढ़ी है। 
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