मोदी की आर्थिक नीतियों पर राहुल गांधी का कटाक्ष

भाषा | वॉशिंगटन Sep 12, 2017 03:56 PM IST

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक नीतियों की आज कड़ी आलोचना करते हुए सरकार के नोटबंदी के निर्णय को अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने सरीखा बताया। उन्होंने कहा कि नोटबंदी जैसे खतरनाक निर्णय और जल्दबाजी में लागू की गई जीएसटी व्यवस्था भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए भारी नुकसान की वजह बने हैं। गांधी दो सप्ताह लंबे अमेरिकी दौरे पर यहां आए हुए हैं। वह समकालीन भारत एवं विश्व के इस सबसे बड़े लोकतंत्र के भविष्य पर बर्कले में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के छात्रों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 8 नवंबर का नोटबंदी का फैसला मुख्य आर्थिक सलाहकार या संसद की सलाह के बिना लिया गया। इससे अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि नोटबंदी की देश को भारी कीमत चुकानी पड़ी है। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा, भारत के बेमिसाल संस्थागत ज्ञान को नजरअंदाज कर इस तरह का निर्णय लेना गैर-जिम्मेदाराना और खतरनाक था।

उन्होंने आगे कहा कि भारत में हर रोज 30 हजार नए युवा श्रम बाजार में पहुंच रहे हैं जबकि सरकार प्रति दिन के हिसाब से रोजगार के महज 500 अवसर मुहैया करा पा रही है। उन्होंने कहा, आर्थिक वृद्धि में गिरावट से आज देश में लोगों की नाराजगी बढ़ रही है। सरकार की नोटबंदी और हड़बड़ी में लाए गए जीएसटी अर्थव्यवसथा को भारी नुकसान हुआ है। गांधी ने सरकार पर नोटबंदी के द्वारा लाखों लोगों को तबाह करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, नोटबंदी के परिणामस्वरूप लाखों छोटे कारोबार तबाह हो गए। किसान एवं अन्य लोग जो नकदी का इस्तेमाल करते हैं, बुरी तरह प्रभावित हुए। कृषि बुरी स्थिति में है और देश में किसानों की आत्महत्याएं बढ़ रही हैं। हालांकि, वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि नोटबंदी का परिणाम अनुमान के मुताबिक ही रहा और इससे अर्थव्यवस्था को मध्यम तथा दीर्घ अवधि में फायदा होगा। जेटली का यह बयान तब आया जब रिजर्व बैंक ने कहा कि बंद किए नोटों में से 99 प्रतिशत बैंकिंग प्रणाली में लौट आए हैं। जेटली ने कहा था कि बैंकों में पैसे जमा होने का मतलब यह नहीं है कि यह सारा धन वैध है।

गांधी ने कहा कि भारत मौजूदा दर की आर्थिक वृद्धि और रोजगार सृजन की रफ्तार से आगे बढऩे का जोखिम नहीं उठा सकता है। उन्होंने चेतावनी दी, अगर हम इसी दर से आगे बढ़ते रहे, यदि भारत श्रम योग्य आयु में प्रवेश कर रहे लाखों युवाओं को रोजगार उपलब्ध नहीं कराता है तो इससे नाराजगी बढ़ेगी। इससे अब तक जो भी हासिल हुआ है वह सब समाप्त होने का खतरा है। यह स्थिति भारत और शेष विश्व के लिए काफी नुकसानदायक होगी। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा कि आज देश के समक्ष मुख्य चुनौती रोजगार सृजन करना है। उन्होंने कहा कि देश में हर साल करीब 1.2 करोड़ युवा श्रम योग्य आयु में पहुंच जाते हैं। इनमें से करीब 90 प्रतिशत हाई स्कूल या कमतर शिक्षा प्राप्त होते हैं। भारत एक लोकतांत्रिक देश है, यहां जोर-जबरदस्ती वाला चीनी तरीका नहीं चल सकता। उन्होंने कहा, हमें चीन के तौर-तरीकों से हटकर लोकतांत्रिक माहौल में रोजगार के अवसर सृजित करने होंगे। हम कुछ लोगों द्वारा नियंत्रित बड़े-बड़े कारखानों का मॉडल नहीं अपना सकते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि भारत में नौकरियां छोटे एवं मध्यम श्रेणी के उद्योगों से आएंगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को भारी संख्या में छोटे एवं मध्यम उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में तब्दील करना होगा। गांधी ने आरोप लगाया कि भारत में इस समय शीर्ष सौ कंपनियों पर ही सारा ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा, सब कुछ उनके लिए उपलब्ध है, बैंकिंग प्रणाली पर उनका एकाधिकार है और सरकार के दरवाजे भी उनके लिए हमेशा खुले हुए हैं। उनके ही द्वारा कानून के बारे में सुझाव दिए जा रहे हैं।
 उन्होंने आगे कहा कि छोटे एवं मध्यम कारोबार चला रहे उद्यमियों को ऋण लेने में मशक्कत करनी पड़ रही है। उन्हें कोई समर्थन या संरक्षण नहीं मिल पा रहा है। छोटे एवं मध्यम उद्योग भारत और विश्व के नवाचार के आधार हैं। बड़े कारोबारी भारत में अप्रत्याशित स्थिति का आसानी से सामना कर सकते हैं। वे अपनी भारी-भरकम संपत्ति और ऊंचे संपर्कों के दम पर संरक्षित हैं।

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