सौर ऊर्जा क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण क्षमता के लिए तैयार हो रही रूपरेखा

भाषा | नई दिल्‍ली Dec 05, 2017 05:20 PM IST

सरकार देश में सौर ऊर्जा क्षेत्र में उपकरणों के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए व्यापक रूपरेखा बना रही है। इसके तहत 20,000 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए निविदा जारी की जाएगी, जिसमें वही कंपनियां बोली लगा सकेंगी जो उपकरणों के विनिर्माण के लिए यहां संयंत्र लगाएंगी। उल्लेखनीय है कि देश में सौर ऊर्जा क्षेत्र में विनिर्माण क्षमता पर्याप्त नहीं है और परियोजनाओं में लगने वाले उपकरणों को लेकर आयात पर निर्भरता अधिक है। बिजली और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने कहा कि पवन ऊर्जा क्षेत्र में देश में पहले से विनिर्माण क्षमता है। लेकिन सौर ऊर्जा के क्षेत्र में ऐसा नहीं है। हम घरेलू विनिर्माण क्षमता को बढ़ाने के लिए रूपरेखा तैयार कर रहे हैं। इसके तहत हम दो ईओआई (रुचि पत्र) ला रहे हैं।
 
उन्होंने कहा, इसके तहत हम 20 गीगावाट (20,000 मेगावाट) क्षमता की परियोजनाओं के लिए निविदा लाएंगे। इसमें वही कंपनियां बोली लगा सकेंगी जो यहां उपकरणों के विनिर्माण के लिए संयंत्र लगाएंगी। सिंह ने कहा कि बोलीदाताओं को चरणबद्ध तरीके से विनिर्माण क्षमता स्थापित करनी होगी। इस बारे में व्यापक रूपरेखा की जानकारी देते हुए मंत्री ने कहा, यह चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। पहले साल में घरेलू सेल और मोड्यूल क्षमता, दूसरे चरण में वेपर, तीसरे चरण में इनगाट तथा बाद के चरण में उसे घरेलू पाली सिलिकन की विनिर्माण क्षमता लगानी होगी। उन्होंने कहा कि इसके अलावा हम जलाशयों में भी फ्लोटिंग सौर परियोजनाएं लगाने की संभावना तलाश रहे हैं। इस बारे में सर्वे किया जा रहा है।

सिंह ने कहा कि देश में हजारों किलोमीटर में जलाशय फैले हैं, ऐसे में फ्लोटिंग सौर परियोजनाओं के जरिये हजारों मेगावाट बिजली पैदा की जा सकती है। स्टोरेज (बैटरी) के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि इसके दाम कम हो रहे हैं लेकिन यह अब भी थोड़ा ऊंचा है। उन्होंने कहा, जिस दिन स्टोरेज की कीमत व्यावहारिक होगी, जीवाश्म ईंधन की जरूरत खत्म हो जाएगी।  गौरतलब है कि स्वच्छ ऊर्जा का बेहतर लाभ तभी होगा, जब हमारे पास लागत प्रभावी तथा दक्ष स्टोरेज समाधान होगा।
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