तीन तलाक विधेयक लोक सभा में पारित

एजेंसियां |  Dec 28, 2017 10:08 PM IST

विवादास्पद तीन तलाक विधेयक गुरुवार  को लोक सभा में पारित हो गया। इस विधेयक में एक बार में तीन तलाक (तलाक ए बिद्दत) को अवैध बनाया गया है, जिसमें पति को तीन साल तक की जेल हो सकती है। सरकार ने इस विधेयक को 'ऐतिहासिक' बताया है।  सदन ने विभिन्न विपक्षी सदस्यों की कई संशोधनों की मांग खारिज करने के बाद विधेयक पारित कर दिया। राजद, एआईएमआईएम, बीजद, अन्नाद्रमुक और ऑल इंडिया मुस्लिम लीग के सांसदों ने विधेयक का यह करते हुए विरोध किया कि यह मनमाना और गलत है। मुस्लिम महिला (शादी के अधिकारों का संरक्षण) विधेयक केवल एक बार में तीन तलाक या 'तलाक ए बिद्दत' पर लागू होता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा संसदीय दल की बैठक में तीन तलाक संबंधी विधेयक को पारित कराने को लेकर आम सहमति की अपील की। 

 
यह विधेयक पीडि़त महिला को यह अधिकार देता है कि वह खुद और अपने छोटे बच्चों की खातिर 'गुजारा भत्ते' के लिए मजिस्ट्रेट से संपर्क कर सकती है। पीडि़त महिला अपने अवयस्क बालकों के संरक्षण की भी हकदार होगी।  इसमें कहा गया है कि किसी व्यक्ति द्वारा उसकी पत्नी के लिए, शब्दों द्वारा, चाहे बोले गए हों या लिखित हों या इलेक्ट्रानिक रूप में हो या किसी अन्य रीति में हो.... चाहे कोई भी हो, तलाक की उद्घोषणा अवैध एवं अमान्य होगी।  इसमें कहा गया है कि जो कोई व्यक्ति अपनी पत्नी को इस प्रकार से तलाक की उद्घोषणा करता है, उसे तीन वर्ष तक कारावास और जुर्माने से दंडित किया जाएगा। 
 
अब इस विधेयक को पारित होने के लिए राज्य सभा में भेजा जाएगा। उसके बाद इस पर राष्ट्रपति हस्ताक्षर करेंगे, जिसके बाद यह कानून बन जाएगा। हालांकि राज्य सभा में सत्तारूढ़ पार्टी के पास बहुमत नहीं है, लेकिन कांग्रेस के इस विधेयक को मौखिक समर्थन देने से यह सदन में पारित हो जाने की संभावना है।  केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि यह कानून ऐतिहासिक है और उच्चतम न्यायालय द्वारा तलाक ए बिद्दत को गैर-कानूनी घोषित किए जाने के बाद मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए इस सदन द्वारा इस संबंध में विधेयक पारित करना जरूरी हो गया है।  विधेयक में कहा गया है कि यह विधान विवाहित मुस्लिम महिलाओं के लिए लैंगिक न्याय और लैंगिक समानता के वृहतर सांविधिक ध्येय सुनिश्चित करेगा। 
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