बुलेट ट्रेन: समय पर या फिर लेट!

शाइन जैकब |  May 15, 2018 11:57 AM IST

मुंबई और अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर सार्वजनिक तौर पर चिंता जाहिर किए जाने के बाद जापान की सरकार ने भी तयशुदा वक्त के भीतर परियोजना पूरी होने पर संदेह जताया है। वहीं दूसरी तरफ नैशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन (एनएचएसआरसीएल) ने कहा है कि उसे पूरा भरोसा है कि बुलेट ट्रेन परियोजना का काम 2022 तक पूरा हो जाएगा जिस साल देश की आजादी की 75वीं सालगिरह होगी। कॉरपोरेशन ने इस महीने के आखिर में निविदा आमंत्रित करने की तैयारी की है क्योंकि अभी जापान इंटरनैशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जेआईसीए) के साथ ऋण समझौते पर हस्ताक्षर होने बाकी हैं।

रेलवे ने मुआवजे के तौर पर किसानों को जमीन मुहैया कराने के लिए मौजूदा राशि के मुकाबले जमीन के बाजार मूल्य के अतिरिक्त 25 फीसदी तक देने का फैसला किया है। ऐसे में मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना की लागत मौजूदा 1.08 लाख करोड़ रुपये से बढ़ जाने की संभावना है। इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर वसई, पालघर, दहाणु, तालासरी के इलाके में लोगों का गुस्सा देखा जा रहा है और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) खुले तौर पर भूमि अधिग्रहण के खिलाफ है। गुजरात में भी ऐसी ही दिक्कत दिख रही है।

कांग्रेस के सांसद अहमद पटेल भी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के खिलाफ सार्वजनिक तौर पर सामने आए। इसके बाद रिपोर्ट आई कि जापानी सरकार भी परियोजना की प्रगति को लेकर नाखुश थी। एनएचएसआरसीएल के प्रबंध निदेशक अंचल खरे का कहना है, 'हमें पूरा भरोसा है कि हम 2022 की समय सीमा तक परियोजना का काम पूरा कर लेंगे। इसी वजह से हमने इस महीने के आखिर तक निविदा आमंत्रित की है।'

अब तक दोनों देशों के बीच महज 6 अरब रुपये का ऋण समझौता हुआ है और जेआईसीए की मूल्यांकन टीम जुलाई महीने में भारत यात्रा पर आएगी।  खरे ने कहा, 'हम पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन और सामजिक प्रभाव मूल्यांकन रिपोर्ट जमा करने की प्रक्रिया में हैं क्योंकि इसे जेआईसीए के पास भी जमा करना है। 880 अरब रुपये के ऋण समझौता पर जेआईसीए की मूल्यांकन टीम के आकलन के बाद ही हस्ताक्षर हो पाएंगे।' सरकार का मानना है कि इस महीने शुरू होने वाली निविदा प्रक्रिया पर असर नहीं पड़ेगा।

परियोजना के लिए जरूरी कुल 1.08 लाख करोड़ रुपये की लागत में से जापान 0.01 फीसदी की ब्याज दर से रियायती ऋण के तौर पर 880 अरब रुपये मुहैया कराएगा। सितंबर महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने परियोजना के शिलान्यास समारोह के दौरान एक-दूसरे से मुलाकात की थी। उस वक्त दोनों देशों के बीच ऋण समझौते के लिए एक विनिमय नोट हस्तांतरित किया गया था। अगर ऋण की मंजूरी मिल जाती है तब जेआईसीए खर्च के आधार पर ऋण मुहैया कराएगी न कि परियोजना की शुरुआत के साथ रकम जारी होगी।

एनएचएसआरसीएल में भारत सरकार की 50 फीसदी हिस्सेदारी है और 25-25 फीसदी का स्वामित्व महाराष्ट्र तथा गुजरात राज्य सरकार के पास है। कुल 508.17 किलोमीटर पटरी में से 155.642 किलोमीटर पटरी महाराष्ट्र में, 350.530 किलोमीटर पटरी गुजरात में और 2 किलोमीटर पटरी दादरा और नागर हवेली में पड़ेगी। उनका कहना है, 'करीब 460 किलोमीटर क्षेत्र भारतीय कंपनियों की बोली के लिए खुला है। हालांकि बुलेट ट्रेन से जुड़ी तकनीक मसलन इलेक्ट्रिकल, रॉलिंग स्टॉक, सिग्नलिंग और पटरी आदि के लिए प्रमुख निविदाकर्ताओं में सिर्फ जापानी कंपनियां ही शामिल होंगी।' खरे का कहना है कि परियोजना की लागत का अंतिम अनुमान 2014 में लगाया गया था और कंपनी अब विचार कर सकती है कि इसमें बढ़ोतरी होगी या नहीं।

कीवर्ड bullet train, mumbai, मुंबई, अहमदाबाद, बुलेट ट्रेन, भूमि अधिग्रहण, नैशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन, एनएचएसआरसीएल,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक