मास्टर प्लान में संशोधन वाले आदेश में आंशिक सुधार

भाषा | नई दिल्ली May 16, 2018 10:40 AM IST

केंद्र को 15 दिन में आपत्तियां आमंत्रित करने और उस पर अंतिम निर्णय लेने का निर्देश दिया
दिल्ली में सीलिंग से राहत दिलाने के लिए मास्टर प्लान में किया जा रहा है संशोधन

उच्चतम न्यायालय ने मास्टर प्लान-2021 में संशोधन पर आगे बढऩे पर रोक लगाने संबंधी अपने 6 मार्च के आदेश में आज आंशिक संशोधन किया। न्यायालय ने केंद्र को निर्देश दिया कि मास्टर प्लान में प्रस्तावित संशोधनों पर आपत्तियां मंगाने के लिए 15 दिन का समय दें और सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद अंतिम निर्णय लिया जाए।

न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा के पीठ ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल से पूछा कि क्या विभाग के संबंधित अधिकारियों को उनके अधिकार क्षेत्र वाले इलाकों में अनधिकृत निर्माण होने पर निलंबित किया जाएगा? वेणुगोपाल ने 6 मार्च के आदेश में सुधार का अनुरोध करते हुए अधिकारों के बंटवारे की अवधारणा का हवाला दिया।

उन्होंने कहा कि विधायी प्राधिकारियों को कानून बनाने से रोका नहीं जा सकता। इस पर शीर्ष अदालत ने केंद्र से कहा कि प्रस्तावित संशोधनों पर आपत्तियां मंगाने के लिए 15 दिन का वक्त दिया जाए और सरकार को सभी पहलुओं पर विचार के बाद ही अंतिम निर्णय लेना चाहिए। अब इस मामले की सुनवाई 17 मई को होगी। मास्टर प्लान-2021 विस्तृत विकास सुनिश्चित करने के लिए शहरी नियोजन और महानगर के विस्तार की रूपरेखा है।

प्रस्तावित संशोधनों का मकसद दुकान एवं रिहायशी भूखंडों और परिसरों को रिहायशी भूखंडों के एफएआर के समान लाना है। शीर्ष अदालत ने 6 मार्च को राष्ट्रीय राजधानी में चल रहे सीलिंग अभियान में अवैध निर्माणों को संरक्षण प्रदान करने के लिए दिल्ली मास्टर प्लान-2021 में संशोधन के मामले में किसी भी तरह की आगे कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। न्यायालय ने अवैध निर्माणों का पता लगाने और उन्हें सील करने के लिए 24 मार्च, 2006 को गठित निगरानी समिति को भी बहाल कर दिया था। 

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