डिजिटल इंडिया की बढिय़ा उड़ान

करण चौधरी और शाइन जैकब |  May 24, 2018 11:42 AM IST

अरुणाचल प्रदेश के पपुमपारे जिले में स्थित छोटे से गांव रामघाट के युवाओं को दो साल पहले तक किसी सरकारी नौकरी में आवेदन करने के लिए 20 किलोमीटर दूर ईटानगर मोटरसाइकिल से जाना पड़ता था। वहां वे साइबर कैफे में बैठकर आवेदन फॉर्म डाउनलोड करते और फिर इसे भरने की सारी औपचारिकताएं पूरी करते। लेकिन अब उनके लिए ऐसा करना आसान हो गया है। इसकी वजह यह है कि उनका गांव न केवल इंटरनेट संपर्क से जुड़ गया है बल्कि गांव के कुछ लोगों ने एक ई-कॉमर्स साइट से कुछ कंप्यूटर खरीदकर अपना इंटरनेट कैफे भी शुरू कर दिया है। अब गांव के किसी व्यक्ति को इंटरनेट की तलाश में इधर-उधर नहीं भटकना पड़ता है।

केरल के एर्णाकुलम रेलवे स्टेशन पर कुली का काम करने वाले श्रीनाथ के ने वहां उपलब्ध मुफ्त वाईफाई का इस्तेमाल केरल लोक सेवा आयोग की लिखित परीक्षा की तैयारी के लिए किया। वह इस परीक्षा में सफल रहे और उनकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई।  ये कुछ ऐसे उदाहरण हैं जिनसे पता चलता है कि डिजिटल इंडिया और सबके लिए इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराने के सरकार के कार्यक्रम भारत नेट ने पिछले कुछ वर्षों में किस तरह लोगों का जीवन बदला है।

डिजिटल इंडिया की शुरुआत नरेंद्र मोदी सरकार ने 2014 में की थी। इसका मकसद देश की 2.5 ग्राम पंचायतों को इंटरनेट से जोडऩा है। अगर सबकुछ योजना के मुताबिक चला तो यह योजना मोदी सरकार की पांच साल की उपलब्धियों के ताज में एक नगीना होगी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।  अलबत्ता डिजिटल इंडिया और सबके लिए इंटरनेट के रास्ते में अब भी कई मुश्किलें हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हर किसी तक इंटरनेट पहुंचाने की होड़ में साइबर सुरक्षा, सार्वजनिक डेटा की सुरक्षा और सूचना प्रौद्योगिकी कानून कहीं पीछे छूट गए हैं।

आगे की योजना

भारत नेट के पहले चरण की शुरुआत में गांवों तक इंटरनेट पहुंचाने का रास्ता काफी मुश्किलों भरा था। कई इलाकों में ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) बिछाई जा चुकी थी लेकिन इंटरनेट सुविधा देने के लिए जरूरी गीगाबिट पैसिव ऑप्टिकल नेटवर्क (जीपीओएन) उपकरण उपलब्ध नहीं थे। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक ताजा निविदाएं जारी होने के बाद इस समस्या का समाधान हो गया।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, 'ताजा निविदाएं जारी करने और उपकरण आने के बाद चीजें जल्दी ही पटरी पर आ गई थीं। पिछले साल 31 दिसंबर तक हमने 29 राज्यों में 107,743 स्थानों को इंटरनेट से जोड़ दिया था।' डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत इस साल फरवरी तक देशभर में 292,482 कॉमन सर्विसेज सेंटर (सीएससी) काम कर रहे थे जिनमें से ग्राम पंचायत स्तर पर 183,184 केंद्र बनाए गए हैं।

देश के ग्रामीण इलाकों और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के लाभार्थियों को लक्ष्य बनाकर 3.44 लाख करोड़ रुपये से अधिक राशि सीधे बैंक खातों में डाली गई है। सरकार ने डिजिटल साक्षरता अभियान के तहत 536,7000 लोगों को डिजिटल प्रौद्योगिकी के बारे में प्रशिक्षण दिया है। साथ ही अक्टूबर, 2017 में प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान भी शुरू किया गया।

टेक्रोपैक के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अरविंद सिंघल ने कहा, 'पिछले चार वर्षों में डिजिटल व्यवस्थाओं को अपनाने के मामले में काफी बढ़ोतरी हुई है। आधार, यूपीआई और भुगतान के आंकड़े बताते हैं कि उनकी संख्या बढ़ रही है। डिजिटल इंडिया का मकसद कई सार्वजनिक सुविधाओं को भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाना था और इसमें भी बहुत प्रगति हुई है।

भारत नेट के मामले में पिछले 12 महीने में बहुत काम हुआ है।' संचार मंत्री मनोज सिन्हा ने इस साल जनवरी में कहा था कि भारत नेट परियोजना का दूसरा चरण इस साल दिसंबर तक पूरा हो जाएगा। इसके तहत 1.5 लाख ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड से जोड़ा जाना है। भारत नेट के दूसरे चरण का काम पूरा करने की समयसीमा मार्च 2019 है।

बड़ी कंपनियों के सहारे

2014 में डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के शुरू होने के बाद से ही अमेरिका की दिग्गज प्रौद्योगिकी कंपनियों फेसबुक और गूगल ने इस कार्यक्रम के हर पहलू में अहम भूमिका निभाई है। लोगों को इंटरनेट के बारे में जागरूक करने, दूरदराज के क्षेत्रों को हाई स्पीड नेट से जोडऩे, स्टार्टअप इन्क्यूबेटर बनाने, महिला सशक्तीकरण, मतदाता पंजीकरण अभियान चलाने, साइबर सुरक्षा और आतंकवाद निरोधक अभियान में फेसबुक और गूगल ने सरकार की बढ़चढ़कर मदद की।  उद्योग के जानकारों के मुताबिक सरकार के लिए अपने कार्यक्रम को शुरू करने के लिए इन कंपनियों के संसाधनों, पहुंच और डेटा का इस्तेमाल करना बहुत आसान काम था। इंटेरा इनफॉर्मेशन टेक्रोलॉजीज के अध्यक्ष और मुख्य कार्याधिकारी तथा इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक के लाहा का कहना था कि गूगल और फेसबुक का इस्तेमाल करना सुरक्षित है। तो फिर सरकार किसी छोटी कंपनी के साथ हाथ क्यों मिलाती? इन कंपनियों के पास बहुत डेटा है जो पूरी तरह अपडेटेड है।

साइबर सुरक्षा अब भी बड़ी चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का मकसद देश में क्रांतिकारी बदलाव लाना है लेकिन इससे जुड़े कानूनी, नीतिगत और नियामकीय मुद्दों को सही ढंग से नहीं सुलझाया गया है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और उच्चतम न्यायालय के वकील पवन दुग्गल ने कहा, 'सूचना प्रौद्योगिकी कानून, 2000 डिजिटल इंडिया की चुनौतियों से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं है। साथ ही डिजिटल इंडिया कार्यक्रम में साइबर सुरक्षा के मुद्दे पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है। इसकी एक वजह यह भी है कि भारत के पास पूरी तरह साइबर सुरक्षा को समर्पित कानून नहीं है। डिजिटल इंडिया को मजबूत बनाने और साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय कानूनी दृष्टिïकोण और रणनीति की जरूरत है।'

 
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