दिल्ली: रेड श्रेणी वाले उद्योगों पर शिंकजा

रामवीर सिंह गुर्जर | नई दिल्ली Jun 05, 2018 10:58 AM IST

प्रदूषण पर लगाम

प्रतिबंधित, अवैध रूप से चल रहे उद्योगों की स्थानीय क्षेत्र पर्यावरण निगरानी दस्ते करेंगे जांच
डीपीसीसी हर माह सीपीसीबी को भेजेगा कार्रवाई की रिपोर्ट
सीपीसीबी का निर्देश रेड श्रेणी उद्योगों में लगे निरंतर उत्सर्जन निगरानी प्रणाली

दिल्ली सरकार राष्ट्रीय राजधानी में अवैध रूप से चल रहे रेड श्रेणी के तहत आने वाले उद्योगों पर शिकंजा कसेगी। दरअसल केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने अन्य राज्यों की प्रदूषण नियंत्रण समिति/बोर्ड समेत दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) को रेड श्रेणी के तहत आने वाली एवं जल प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों में निरंतर उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (सीईएमएस) लगाने के निर्देश दिए हैं।

साथ ही, इस तरह की इकाइयों में प्रदूषण नियंत्रण उपायों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए समय समय पर जांच करने को कहा है। सीपीसीबी के निर्देश के बारे में  डीपीसीसी के एक अधिकारी ने कहा कि वैसे तो दिल्ली में रेड श्रेणी के तहत आने वाले उद्योग प्रतिबंधित हैं, लेकिन अधिसूचित, नॉन कन्फर्मिंग औद्योगिक क्षेत्रों या फिर आवासीय क्षेत्रों में कुछ रेड श्रेणी के उद्योग चलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

अधिकारी ने कहा कि डीपीसीसी इन क्षेत्रों में प्रतिबंधित उद्योगों पर शिकंजा कसेगी। इसके लिए स्थानीय क्षेत्र पर्यावरण निगरानी दस्तों का गठन किया जा रहा है, जो अवैध तरीके से चल रहे उद्योगों की पहचान करेगा। इसके बाद इन अवैध उद्योगों के खिलाफ कार्रवाई कर इन्हें बंद कराया जाएगा। प्रत्येक दस्ते में दो पर्यावरण अभियंता (ईई) शामिल होंगे। सभी अनुमति प्रबंधन सेल (सीएमसी) को निर्देश दिए गए हैं कि वे सीपीसीबी के निर्णय पर जरूरी कार्रवाई करें।

सीएमसी के अधिकारी प्रतिबंधित उद्योगों की जा रही जांच के तहत की गई कार्रवाई की हर महीने एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) तैयार करेंगे। इस रिपोर्ट को सीएमसी-1 के साथ वेस्ट मेनेजमेंट सेल को दिया जाएगा। इसके बाद विभिन्न सेलों की समग्र एटीआर रिपोर्ट हर माह सीपीसीबी को भेजी जाएगी। दिल्ली में चलने वाले उद्योग को 637 प्रकार उद्योगों में विभाजित किए गए हैं। इनमें 233 उद्योग ऑरेंज, 217 व्हाइट, 114 ग्रीन और 73 उद्योग रेड श्रेणी के तहत आते हैं।

दिल्ली में व्हाइट श्रेणी के तहत आने वाले उद्योगों को पर्यावरण अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होती है। उन्हें सिर्फ कागज पर लिखकर यह देना होता है कि वे व्हाइट श्रेणी के तहत आते हैं। दिल्ली में रेड श्रेणी के तहत आने वाले उद्योग प्रतिबंधित हैं। रेड श्रेणी के उद्योगों में वाटर पार्क, लेदर फिनिसिंग/ डाइंग, गेल्वेनाइजिंग, कॉटन वीविंग आदि उद्योग आते हैं।

दिल्ली सरकार की अधिसूचित औद्योगिक क्षेत्रों में कानूनन चल रहे उद्योगों पर प्रदूषण के संदर्भ में सख्त नजर है। दिल्ली सरकार ने पिछले साल करीब 12,000 उद्योगों को  प्रदूषण नियंत्रण उपायों के अनुपालन के संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी किए थे।  कुछ महीने पहले डीपीसीसी ने दिल्ली की तीनों नगर निगमों को ऐसे उद्योगों को फैैक्ट्री लाइसेंस न देने को कहा था, जिन्होने डीपीसीसी से जरूरी मंजूरी नहीं ली हो। इसके बाद निगमों ने फैक्ट्री लाइसेंस के लिए डीपीसीसी की जरूरी मंजूरी को अनिवार्य कर दिया। 

 

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