बुलेट ट्रेन परियोजना में देरी के आसार

रॉयटर्स |  Jun 13, 2018 02:01 PM IST

जापान के सहयोग से चलाई जाने वाली 17 अरब डॉलर की लागत वाली बुलेट ट्रेन परियोजना पर संकट के बादल घिरने लगे हैं। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि फल की बागवानी करने वाले किसानों द्वारा जमीन अधिग्रहण के विरोध को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना के लिए दिसंबर तक जमीन अधिग्रहण कर पाना संभव नहीं लग रहा है।  

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) जापान को यह विश्वास दिलाने की कोशिश में है कि पश्चिमी महाराष्ट्र के किसानों के साथ गहन चर्चा कर जमीन अधिग्रहण के रास्ते की रुकावटों को दूर कर लिया जाएगा। इसके लिए पीएमओ इस परियोजना की साप्ताहिक आधार पर समीक्षा कर रहा है। हाल के महीनों में मुंबई से अहमदाबाद को जोडऩे वाली पूरे बुलेट ट्रेन गलियारा के पांचवे हिस्से के बराबर 108 किलोमीटर (67 मील) खंड के अध्रिहण की कोशिश हुई। लेकिन यह स्थानीय नेताओं के समर्थन से भड़के प्रदर्शन की भेंट चढ़ गया। 

मुंबई के दक्षिण में पालघर शहर में चीकू की बागवानी करने वाले 62 वर्षीय किसान दशरथ पूरव ने कहा, 'मैंने इसकी खेती के लिए तीन दशक तक कड़ी मेहनत की है और वे मुझे कह रहे हैं कि मैं अपनी जमीन छोड़ दूं। मैंने परियोजना के लिए जमीन देने के लिए दिन रात एक नहीं किया था। यह सब कुछ मैंने अपने बच्चों के लिए किया है।' पूरव कहते हैं कि वे अपनी जमीन उसी शर्त पर देंगे जब उनके दो बेरोजगार बेटों में से कम से कम एक को सरकारी नौकरी देने का वादा किया जाए।

भारत में जमीन अधिग्रहण को लेकर विरोध एक सामान्य बात है जहां करोडों की संख्या में किसान छोटी जोत वाले हैं। एक कंसोर्टियम द्वारा 44 अरब डॉलर की लागत से रिफाइनरी लगाने की योजना भी महाराष्ट्र में जमीन अधिग्रहण को लेकर अटकी पड़ी है। इस कसोर्टियम में दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक सऊदी अरामको भी शामिल है।

इस परियोजना की देखरेख करने वाली नैशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) के प्रवक्ता धनंजय कुमार ने कहा, 'भारत में किसी भी परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण एक जटिल समस्या रही है। यहां जमीन अधिग्रहण में बहुत अधिक रुकावटों की वजह से भी हमें समस्या का सामना करना पड़ रहा है।' भारतीय रेलव के दो अधिकारियों ने नाम नहीं लिए जाने की शर्त पर बताया कि अंतिम समयसीमा तक बुलेट ट्रेन के लिए भूमि अधिग्रहण नहीं हो पाने पर जापान इंटरनैशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जेआईसीए) द्वारा सुलभ ऋण के भुगतान में भी देरी होगी।

जीआईसीए एक सरकारी तंत्र है जो अगले महीने इस परियोजना की समीक्षा करने जा रही है। जेआईसीए के एक प्रवक्ता ने कहा कि भारत को परियोजना के आसपास बसे लोगों के पुनर्वास की योजना तुरंत बनानी चाहिए और ऋण समझौते में प्रवेश करने के लिए इसे सार्वजनिक करना चाहिए जिसमें बुलेट ट्रेन परियोजना के मुख्य हिस्से को शामिल किया जाना चाहिए।

 उन्होंने कहा, 'चूंकि भारत पर्यावरणीय और सामाजिक क्षतिपूर्ति के संबंध में जीआईसीए के दिशानिर्देशों के मुताबिक उचित और सावधानीपूर्ण कदम उठाने के लिए संभव है कि समझौते पर हस्ताक्षर करने में समय लगता है।' एक अधिकारी ने बताया कि जापान की चिंता को दूर करने के लिए भारतीय अधिकारी इसी महीने टोक्यो में वहां परिवहन मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे।

भारत परियोजना पूरी करने की समयसीमा को एक साल बढ़ाकर 2022 कर दिया जाए जो कि भारत की आजादी का 75वां वर्ष होगा। बुलेट ट्रेन परियोजना से जुड़े जापान के परिवहन मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि भारतीय अधिकारियों ने उनसे कहा है कि वे जमीन अधिग्रण के मामले का हल निकाल लेंगे।  

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