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'विश्व में हवाई अड्डों के निजीकरण के नतीजे बेहतर नहीं'

भाषा |  Jun 04, 2018 03:30 PM IST

विमानन कंपनियों के वैश्विक संघ आईएटीए ने एक अध्ययन के आधार पर कहा है कि पूरी दुनिया में हवाई अड्डों के निजीकरण का अनुभव अच्छा नहीं रहा है। निजीकरण के बाद उनकी सेवाएं महंगी हुई हैं पर उनकी गुणवत्ता में सुधार नहीं दिखता। अंतरराष्ट्रीय वायु परिवहन संघ (आईएटीए) ने इस मामले में सरकारों के लिए कुछ नीतिगत सुझाव पेश किए हैं ताकि सार्वजनिक धन का दुरुपयोग न हो।

विमानपत्तन क्षेत्र पर वैश्विक शिखर सम्मेलन के दौरान आईएटीए के मुख्य अर्थशास्त्री ब्रायन पीयर्स ने हवाई अड्डों के निजीकरण के पहले और बाद के प्रदर्शन में अंतर का पता लगाने के लिए कराए गए व्यापक अध्ययन पर आधारित यह रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि निजीकरण के बाद हवाई अड्डों के काम में कोई खास सुधार नहीं दिखता पर निजी हवाई अड्डों का लाभ आश्चर्यजनक रूप से बहुत ऊंचा हुआ है।

पीयर्स ने कहा , यह स्पष्ट है कि निजीकरण लागू करने को लेकर सामान्य रूप से जो स्वीकृत धारणा है वह विमानपत्तन क्षेत्र के मामले में सही साबित नहीं हुई है। निजी हवाई अड्डों की फीस ऊंची है। किसी भी क्षेत्र में निजीकरण से इस तरह की बात हमें स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे ग्राहकों या सरकारों को यह बात अच्छी नहीं लगेगी कि निजीकरण के दौरान हमारे क्षेत्र में एयरलाइनों के किराए महंगे हों।

पीयर्स और आईएटीए के विमानपत्तन एवं ईंधन मामलों को देखने वाले निदेशक हमेंत मिस्त्री ने कहा कि आईएटीए निजीकरण के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि संगठन ने हवाई अड्डों के लिए निजी सरकारी भागीदारी (पीपीपी) या निजीकरण के दूसरे माडल अपनाने की बात सोच रहीं सरकारों के लिए परामर्श सेवा कंपनी डेलायट के साथ मिल कर कुछ दिशानिर्देशक सामग्री प्रकाशित की है।

उन्होंने कहा कि हवाई अड्डा एक महत्वपूर्ण बुनियादी सुविधा है। इसके निजीकरण का निर्णय करते समय दीर्घकालि दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने अध्ययन रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि नजीकरण के बाद हवाई अड्डों की परिचालन कुशलता में कोई अधिक सुधार नहीं दिखता है। यह रिपोर्ट 90 हवाई अड्डों की जांच पर आधारित है।

आईएटीए के अर्थशास्त्री ने कहा हम विमानन क्षेत्र से जुड़े लोगों को यह समझाना चाहते हैं कि एकाधिकारवादी हवाई अड्डा क्षेत्र में निजीकरण दीर्घकालिक सामाजिक आर्थिक हित में ठीक साबित नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में सरकारों ने अल्पकालिक वित्तीय लाभ को वरीयता दी और विमानन उद्योग से परामर्श कर कोई ठोस कारोबारी माडल विकसित नहीं किया। उन्होंने कहा कि निजी हवाई अड्डों के कामकाज का तरीका प्राय: बिन मांगे सुझावों, निजी पार्टियों या धन लगाने वालों के हितों से प्रेरित है। नियामकीय व्यवस्था ढ़ीली है।

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