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निवेश के लिए बढिय़ा दांव बने हुए हैं डेट फंड

चंदन किशोर कांत |  Feb 05, 2017 09:34 PM IST

डेट म्युचुअल फंडों में निवेशक उत्साहित हैं। इसकी वजह यह है कि डेट फंड सेगमेंट ने लगातार दो वर्षों से इक्विटी को मात दी है। जहां प्रमुख सूचकांक दो साल की अवधि के दौरान सपाट बना रहा, वहीं फिक्स्ड इनकम फंडों ने समान अवधि में 10 फीसदी से अधिक का सालाना प्रतिफल दिया। विश्लेषकों का मानना है कि आम बजट में खर्च पर सरकार द्वारा सख्ती बरते जाने और आरबीआई से दर कटौती की उम्मीद से डेट फंड फिर से 2017 में भी इक्विटी को मात दे सकते हैं। 

 
हालांकि डेट म्युचुअल फंडों का प्रतिफल पिछले दो वर्षों के प्रदर्शन के समान नहीं रह सकता है, लेकिन फंड प्रबंधकों का कहना है कि निवेशक कुछ खास श्रेणियों में एक अंक के प्रतिफल की उम्मीद कर सकते हैं। ब्रोकरेज फर्मों खासकर विदेशी कंपनियां 2017 में भी इक्विटी बाजार के लिए एक अंक के प्रतिफल की उम्मीद जता रही हैं। हालांकि सरकारी प्रतिभूतियों (गिल्ट) पर प्रतिफल पिछले साल काफी नीचे आ गया था और विश्लेषकों का मानना है कि संक्षिप्त अवधि के बॉन्डों में और नरमी की गुंजाइश देखी जा सकती है। जब बॉन्ड प्रतिफल गिरता है तो बॉन्ड कीमतें चढ़ती हैं और डेट फंडों की वैल्यू में तेजी आती है। फंड प्रबंधकों का कहना है कि कॉरपोरेट डेट फंडों, ड्ïयूरेशन बॉन्ड फंडों और अल्ट्रा-शॉर्ट-टर्म डेट फंडों की श्रेणी में डेट म्युचुअल फंड अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। 
 
इन्वेस्को म्युचुअल फंड में फिक्स्ड इनकम के प्रमुख सुजय दास कहते हैं, 'लंबी अवधि के फंडों के साथ साथ गिल्ट फंड वर्ष 2017 में पूंजीगत लाभ दर्ज करने की स्थिति में होंगे। कॉरपोरेट डेट फंडों को भी क्रेडिट रेटिंग में अपग्रेड, कम उधारी लागत और उपभोक्ता मांग में तेजी का लाभ मिलेगा।' बेंचमार्क 10-वर्ष के गिल्ट में प्रतिफल पिछले साल के 7.87 फीसदी से घटकर अब 6.41 फीसदी रह गया है और 24 नवंबर, 2016 को यह 6.19 फीसदी के निचले स्तर पर था।
 
फ्रैंकलिन टेम्पलटन एमएफ ने एक रिपोर्ट में कहा है, 'भले ही जिल्ट में प्रतिफल पिछले कुछ महीनों में काफी घटा है, लेकिन हमारा मानना है कि वृद्घि की रफ्तार में सुस्ती, महंगाई में नरमी और कम सरकारी उधारी से आरबीआई को एक फीसदी की ब्याज दर कटौती की गुंजाइश दिख सकती है। इसलिए उतार-चढ़ाव को पसंद करने वाले निवेशक ड्ïयूरेशन गिल्ट फंडों पर विचार कर सकते हैं।' 
 
राजकोषीय समेकन को ध्यान में रखकर आरबीआई 8 फरवरी की अपनी मौद्रिक समीक्षा में ब्याज दरों में एक-चौथाई फीसदी तक की कमी कर सकता है और साल के दौरान बाद में भी दर कटौती पर विचार कर सकता है। कोटक एमएफ में मुख्य निवेश अधिकारी (फिक्स्ड इनकम) लक्ष्मी अय्यर का कहना है, 'शुद्घ उधारी स्तर काफी बड़ा है और बैंकिंग सिस्टम में नकदी भी बढ़ रही है। ये सभी बदलाव ब्याज दर की स्थिति में सुधार के लिए महत्त्वपूर्ण संकेतक हैं और आरबीआई को 25-50 आधार अंक की कटौती में मदद मिल सकती है।'
 
हालांकि कुछ विश्लेषक आरबीआई द्वारा दर कटौती के अनुमानों को लेकर जोखिम भी देख रहे हैं। एचएसबीसी इंडिया में मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजल भंडारी कहते हैं, 'तेल में तेजी, ऊंचे सरकारी पारिश्रमिक और अमेरिकी फेडरल द्वारा दर वृद्घि की उम्मीद से दर कटौती के लिए गुंजाइश धूमिल पड़ रही है। हम 25 आधार अंक की कटौती की उम्मीद कर रहे हैं।' अय्यर का कहना है कि विभिन्न घरेलू और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाक्रम इस साल डेट बाजार को अनिश्चित बनाए रख सकते हैं। 
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