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नोटबंदी का खत्म असर, अब चमकेंगे एफएमसीजी के शेयर

विवेट सुजन पिंटो |  Feb 05, 2017 09:35 PM IST

वित्त वर्ष 2016-17 की तीसरी तिमाही उपभोक्ता कंपनियों के लिए खराब समय वाली अंतिम तिमाही हो सकती है क्योंकि नोटबंदी का प्रभाव कम हो रहा है और हाल में घोषित बजट में ग्रामीण और कृषि अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की कोशिश की गई है। अपने तीसरी तिमाही के वित्तीय नतीजों की घोषणा कर चुकी कंपनियां यह संकेत दे चुकी हैं कि नोटबंदी के बाद पैदा हुआ दबाव कम हुआ है और बिक्री में सुधार आया है। देश की सबसे बड़ी कंज्यूमर गुड्ïस कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी संजीव मेहता ने पिछले दिनों कंपनी के तीसरी तिमाही के नतीजों की घोषणा के वक्त कहा, ' दिसंबर की तुलना में जनवरी बेहतर रही और नवंबर की तुलना में दिसंबर का महीना बेहतर रहा।'

 
गोदरेज गु्रप के चेयरमैन आदि गोदरेज ने कहा, 'नोटबंदी का प्रभाव घट रहा है और विमुद्रीकरण को लेकर सरकार के प्रयासों का असर दिख रहा है। इसके अलावा आम बजट में ग्रामीण विकास, कृषि, आवासीय, विद्युतीकरण और बुनियादी ढांचा क्षेत्र पर जोर दिया जाना भी लोगों के लिए शुभ संकेत है। इससे खपत में तेजी आएगी।' विश्लेषकों का मानना है कि उपभोक्ता कंपनियों की चौथी तिमाही में बिक्री पर नोटबंदी का ज्यादा प्रभाव नहीं दिखेगा। राजस्व के मोर्चे पर तस्वीर तीसरी तिमाही की तुलना में बेहतर होगी। विश्लेषकों का कहना है कि हालांकि एकमात्र चुनौती होगी बढ़ती उत्पादन लागत का प्रबंधन करना, जिससे आगामी तिमाहियों में मार्जिन पर दबाव पड़ेगा। 
 
इक्विनोमिक्स रिसर्च ऐंड एडवाइजरी के संस्थापक जी चोकालिंगम कहते हैं, 'एक साल पहले अपस्फीतिकर परिवेश देख रहे थे क्योंकि जिंस कीमतों में गिरावट आई थी। कच्चे तेल की कीमत भी गिरकर 20 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई थी। स्थिति अब बदल गई है क्योंकि कच्चा तेल भी चढ़ा है और यह 57 डॉलर के निशान के करीब है। निकट भविष्य में कच्चा तेल 60 डॉलर प्रति बैरल को छू सकता है।' इस अपस्फीतिकर परिवेश से उपभोक्ता कंपनियों को मार्च 2016, जून 2016 और सितंबर 2016 की तिमाहियों में मुनाफा वृद्घि की रफ्तार मजबूत बनाने में मदद मिली। आईआईएफएल वेल्थ ऐंड ऐसेट मैनेजमेंट में शोध प्रमुख अमर अंबानी जैसे विश्लेषकों का मानना है कि जीएसटी का क्रियान्वयन जहां अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा है, वहीं कंपनियों को बिक्री पर अस्थायी रूप से कुछ दबाव (उपभोक्ता कंपनियों पर) देखा जा सकता है क्योंकि नई कर व्यवस्था का व्यापार पर असर दिखेगा। हालांकि कंपनियों के साथ साथ कुछ विश्लेषक भी आश्वस्त बने हुए हैं। केआर चोकसी इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के प्रबंध निदेशक देवेन चोकसी कहते हैं, 'अगले दो वर्ष शानदार होंगे। आय स्तर में सुधार आ रहा है और इससे खपत स्तर भी बढ़ रहा है। बजट में ग्रामीण इलाकों पर ध्यान दिया गया है और मेरा मानना है कि समग्र एफएमसीजी खपत में तेजी आएगी।' 
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