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सड़क निर्माण कंपनियों के शेयरों की रफ्तार सुस्त

हंसिनी कार्तिक |  Mar 12, 2017 08:00 PM IST

सड़क निर्माण शेयरों में तेजी का सिलसिला वर्ष 2013 में इस उम्मीद के साथ शुरू हुआ था कि केंद्र में भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आएगी। इसके अलावा जब नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री के तौर पर जिम्मेदारी संभाली तो इन शेयरों को और ताकत मिली। 2013 ओर 2014 के बीच कई सड़क निर्माण कंपनियों के शेयर बढ़कर दोगुने या तिगुने हो गए थे। लेकिन इन शेयरों में यह मजबूती ज्यादा लंबे समय तक टिकी नहीं रह सकी और 2015 के शुरू में इनकी चमक फीकी पडऩे लगी। एक साल के दौरान एनसीसी के शेयर में सिर्फ तीन से चार फीसदी तक की तेजी आई वहीं इस अवधि में सदभाव इंजीनियरिंग, अशोका बिल्डकॉन, जे कुमार इन्फ्रास्ट्रक्चर और आईआरबी इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए प्रतिफल में कमी देखने को मिली। हालांकि कुछ शेयर इस सुस्ती से बचे रहने में सफल रहे हैं जिनमें आईटीडी सीमेंटेशन और आईएलऐंडएफएस ट्रांसपोर्टेशन भी शामिल हैं जिनमें 21 फीसदी और 10 फीसदी की तेजी आई है।

 
स्पष्टï है कि तेजी की उम्मीदें फीकी पड़ी हैं और यह समय कंपनियों के लिए क्रियान्वयन पर जोर देने का है। यह समय भारतीय राष्टï्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा बुनियादी ढांचागत खर्च की दिशा में कदम उठाने का है। दूसरे शब्दों में कहें तो, जब तक बाजार में मजबूत आय वृद्घि और ऑर्डर प्रवाह के स्पष्ट संकेत नहीं दिखते तब तक सड़क निर्माण कंपनियों की शेयर कीमतों में ज्यादा तेजी के आसान नहीं दिख रहे हैं। खासकर, आय बेहद महत्त्वपूर्ण है। पिछले दो वर्षों में एनसीसी, अशोका, जे कुमार और आईआरबी इन्फ्रा जैसी प्रतिष्ठिïत कंपनियों के लिए राजस्व वृद्घि (वित्त वर्ष 2014-16 में) एक अंक में रही। अहलूवालिया कंस्ट्रक्शन और सिम्प्लेक्स इन्फ्रा की राजस्व वृद्घि सपाट रही। साथ ही हाल के समय में परिचालन मुनाफा मार्जिन भी प्रभावित हुआ है। ब्याज खर्च एक अन्य बोझ है। हालांकि ब्याज दरें हाल में नीचे आई हैं, लेकिन कंपनियों द्वारा इसका बड़ा लाभ हासिल किया जाना बाकी है। वित्त वर्ष 2014-15 के दौरान पीएनसी इन्फ्राटेक, अशोका बिल्डकॉन और सदभाव इंजीनियरिंग ने ब्याज खर्च में सालाना 24-50 फीसदी की चक्रवृद्घि दर दर्ज की। मुनाफा वृद्घि प्रभावित हुई है। वह कहते हैं, 'मजबूत बैलेंस शीट वाली कुछ ही कंपनियां समय पर वित्तीय व्यवस्था में सक्षम होंगी।' 
 
एमके ग्लोबल फाइनैंशियल के अधिदेव चट्टïोपाध्याय का कहना है कि कंपनियों को परियोजनाओं के लिए वित्तीय व्यवस्था तय समय पर नहीं होने की वजह से आसान क्रियान्वयन की राह में आगे बढऩे में समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इस सेक्टर को असंगठित ऑर्डर निविदा व्यवस्था से भी जूझना पड़ रहा है। चूंकि ऑर्डर अधिक असंगठित हो गए हैं और अधिक बोलीदाताओं के प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण पर जोर देने से मुनाफा मार्जिन प्रभावित हुआ है। इसका चालू वित्तीय परिणामों में प्रभाव दिखा है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि अधिक प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया की समस्या का समाधान नहीं निकाला जाता है तो आने वाले वर्षों में मार्जिन प्रभावित हो सकता है। वह कहते हैं, 'प्रतिस्पर्धा बढऩे से बाजार दिग्गजों के लिए अधिक ऑर्डर प्रवाह भागीदारी प्रभावित होगी। 
 
यही वजह है कि आय की संभावना अनिश्चित लग रही है।' विश्लेषकों का कहना है कि हाल के वर्षों में पूंजी उगाही या परियोजना क्रियान्वयन के संदर्भ में सड़क निर्माण बेहद अप्रत्याशित व्यवसायों में शामिल हो गया है। इस संदर्भ में, विश्लेषक निवेशकों को कर्ज-मुक्त कंपनियों के साथ जुड़े रहने की सलाह देते हैं। साथ ही कम चर्चित कंपनियों और परियोजना क्रियान्वयन के कमजोर रिकॉर्ड वाली कंपनियों से दूरी बनाए रखने की जरूरत है। साथ ही शेयरों के चयन के लिहाज से कॉरपोरेट प्रशासन पर भी नजर रखे जाने की जरूरत है। विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा समय में तीन से पांच साल की निवेश अवधि वाले निवेशक केएनआर कंस्ट्रक्शन, आईआरबी इन्फ्रा, एनसीसी, अहलूवालिया कंस्ट्रक्शन और आईटीडी सीमेंटेशन जैसे शेयरों की खरीदारी पर विचार कर सकते हैं। 
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