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ईपीएफ से बेहतर है एनपीएस

संजय कुमार सिंह |  Mar 19, 2017 10:26 PM IST

पेंशन भविष्य निधि योजना (ईपीएफ) के तहत मिलने वाली पेंशन योजना अच्छी है या राष्टï्रीय पेंशन योजना (एनपीएस)? अगर मौका मिले तो क्या ईपीएफ से अपनी पेंशन रकम पेंशन कोष में हस्तांतरित करानी चाहिए? इसके तरीके क्या हो सकते हैं? विशेषज्ञों का कहना है कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) और दूसरे मान्यताप्राप्त फंडों के अंशधारकों को अपना पैसा एनपीएस में स्थानांतरित करवाना चाहिए क्योंकि इसमें ज्यादा लचीलापन है और यह ज्यादा पारदर्शी है। पिछले दिनों पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने एक परिपत्र जारी करके बताया है कि आप अपनी रकम कैसे पेंशन योजना में पहुंचा सकते हैं। नियामक ने भविष्य निधि या सेवानिवृत्ति निधि जैसे मान्यताप्राप्त कोष की राशि को राष्टï्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया बताई है।
पैसा हस्तांतरित करवाने के लिए कर्मचारी को सबसे पहले एक टियर वन एनपीएस खाता खोलने की जरूरत है। इसके बाद उसे अपना पैसा एनपीएस खाते में हस्तांतरित करवाने के लिए अपने नियोक्ता के जरिये भविष्य/ सेवानिवृत्ति निधि में आवेदन करना होगा। इसके बाद भविष्य/ सेवानिवृत्ति निधि एक चेक या ड्राफ्ट जारी करेगी। विशेषज्ञ भविष्य/ सेवानिवृत्ति निधि से एनपीएस में जाने की सलाह देते हैं क्योंकि इससे निवेशकों के पास ज्यादा विकल्प रहते हैं। मुंबई के फाइनैंशिसल प्लानर अर्णव पंड्या कहते हैं, 'आप निवेश का विकल्प चुन सकते हैं, इक्विटी में आवंटन का स्तर निर्धारित कर सकते हैं, किस फंड मैनेजर के जरिए निवेश करना चाहते हैं, इसका चुनाव कर सकते हैं।' अगर आप अपने निवेश पर सक्रियता के साथ बराबर नजर रखना चाहते हैं तो आप एक्टिव चॉइस का विकल्प अपना सकते हैं। दूसरी तरफ जो निवेशक तटस्थ रहना चाहते हैं, वे ऑटो चॉइस लाइफस्टाइल फंड का विकल्प चुन सकते हैं। 
साथ ही निवेशक यह भी तय कर सकते हैं कि इक्विटी में उन्हें कितना आवंटन करना है। ऑटो चॉइस विकल्प में वे इक्विटी में 75 फीसदी तक और एक्टिव चॉइस विकल्प में 50 फीसदी तक आवंटन कर सकते हैं। अमूमन लंबी अवधि में बॉन्डों की तुलना में इक्विटी में बेहतर रिटर्न मिलता है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) को फिलहाल इक्विटी में 15 फीसदी ही निवेश करने की इजाजत है। कर्मचारी अच्छा प्रदर्शन कर रहे पेंशन फंड मैनेजर के जरिए भी निवेश कर सकते हैं। आप साल में दो बार निवेश का विकल्प और परिसंपत्ति आवंटन बदल सकते हैं। आपका पेंशन फंड मैनेजर साल में एक बार ऐसा कर सकता है।
पंड्या कहते हैं, 'ईपीएफ में यह विकल्प नहीं है। वहां आपका पैसा ईपीएफओ निवेश करता है। यह पैसा कहां और कैसे निवेश होता है, इसमें आपकी कोई भूमिका नहीं है।' एनपीएस का एक और फायदा यह है कि इसके फंडों पर रिटर्न नियमित रूप से एनपीएसट्रस्टडॉटओआरजीडॉट इन पर जारी होता है और आप जान सकते हैें कि उनका प्रदर्शन कैसा चल रहा है। पंड्या ने कहा, 'ईपीएफ के मामले में मौजूदा वित्त वर्ष में रिटर्न की दर अमूमन नवंबर-दिसंबर में घोषित होती है। कभी-कभार थोड़ी  देर हो जाती है।' ऐसी स्थिति में आपको साल की शुरुआत में पता नहीं चलता है कि आपके पैसे पर रिटर्न की दर क्या होगी?
अलबत्ता कर के लिहाज से ईपीएफ बेहतर है क्योंकि हर स्तर पर यह कर मुक्त है। दूसरी तरफ एनपीएस का 40 फीसदी कोष ही कर मुक्त है।
इसका एक हिस्सा वार्षिकी में डालना पड़ता है जिससे मिलने वाली आय पर कर लगता है। वित्त वर्ष 2016-17 के बजट में स्पष्टï किया गया था कि ईपीएफ से एनपीएस में पैसा हस्तांतरित करने पर कोई कर नहीं लगेगा।

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