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'उदय' से ये 10 शेयर होंगे मजबूत

हंसिनी कार्तिक |  Apr 09, 2017 08:45 PM IST

नवंबर 2015 में सरकार ने विद्युत वितरण कंपनियों (डिस्कॉम्स) के कायाकल्प के लिए उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना (उदय) की घोषणा की थी तो इसे लेकर काफी कम उम्मीद थी कि इससे राज्य विद्युत बोर्डों (एसईबी) का कर्ज और परिचालन दबाव घटेगा। लेकिन 16 महीने में उदय विद्युत क्षेत्र के लिए कारगर साबित हुई है और इस क्षेत्र की कई कंपनियां अच्छी आय वृद्घि दर्ज कर रही हैं। जहां पावर ग्रिड और एनटीपीसी इन प्रयासों की सबसे बड़ी लाभार्थी बन सकती है वहीं सीमेंस, एबीबी, कल्पतरू, केईसी, जेएसडब्ल्यू एनर्जी, सीईएससी और पावर फाइनैंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) तथा रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन (आरईसी) भी बढ़त दर्ज कर सकती हैं। आइए, इसकी वजह जानते हैं।

एबीबी इंडिया
एबीबी ने वर्ष की शुरुआत 11,800 करोड़ रुपये के पुराने ऑर्डर प्रवाह के साथ की जिससे इस वर्ष की आय की संभावना मजबूत हुई है। कंपनी की रेलवे और पारेषण एवं वितरण (टीऐंडडी) क्षेत्रों में भी उपस्थिति अन्य सकारात्मक कारक है। ये दोनों क्षेत्र ऑर्डरों में तेजी दर्ज कर रहे हैं। स्वीडन की पैतृक कंपनी से टेक्नोलॉजी समर्थन हासिल होने से उसे परियोजनाओं के लिए आक्रामक ढंग से बोली लगाने में मदद मिली है। जहां एबीबी इंडिया के लिए मूल्यांकन महंगा है, वहीं यह दीर्घावधि निवेशकों के लिए मजबूत वृद्घि की पेशकश करती है।

सीईएससी
अपेक्षाकृत एक स्वतंत्र विद्युत उत्पादक होने की वजह से सीईएससी मजबूत आय संभावनाओं वाली कंपनी है। चंद्रपुर (महाराष्टï्र) परियोजना में सुधार से परिदृश्य और मजबूत होगा। इस परियोजना के वित्त वर्ष 2019 में मुनाफे की स्थिति में आने की उम्मीद की जा रही है। चिंताजनक स्थिति रियल एस्टेट और रिटेल जैसी गैर-प्रमुख परिसंपत्तियों में सीईएससी के निवेश को लेकर है। इन व्यवसायों से निवेश घटाने के ठोस प्रयासों से इस शेयर को मदद मिलनी चाहिए।

जीई टीऐंडडी
शुद्घ लाभ में लगातार चार तिमाहियों तक गिरावट झेलने के बाद जीई टीऐंडडी ने दिसंबर तिमाही में बढ़त दर्ज की। हालांकि मूल्य निर्धारण दबाव या प्रतिस्पर्धा में कमी नहीं आई है, लेकिन निष्पादन में सुधार से कंपनी को वित्त वर्ष 2018 में राजस्व को मजबूत बनाने में मदद मिल सकती है। कंपनी की ऑर्डर बुक 8,150 करोड़ रुपये है। इससे भी राजस्व को मदद मिलेगी। सौर बिजली के लिए निवेश भी सकारात्मक दिशा में है।

कल्पतरू पावर
एसईबी और रेलवे से ऑर्डर प्रवाह (28,600 करोड़ रुपये पर अनुमानित) से वित्त वर्ष 2018 के लिए आय मजबूत होने की संभावना बढ़ी है, वहीं स्टैंडएलोन ऑर्डर बुक 8,300 करोड़ रुपये पर दर्ज की गई है, जबकि सहायक कंपनी जेएमसी प्रोजेक्ट्ïस के लिए यह दिसंबर तिमाही के अंत में 6,800 करोड़ रुपये पर थी। इससे पावर ग्रिड के ऑर्डरों से नुकसान की भरपाई हो सकती है। इंजीनियरिंग, संवद्र्घन और निर्माण (ईपीसी) परिचालन में सुधार से कंपनी को कर्ज पर अपनी निर्भरता घटाने में मदद मिलेगी।

केईसी इंटरनैशनल
पिछले दो वर्षों में, केईसी को अंतरराष्टï्रीय ऑर्डरों से फायदा हुआ है। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि वित्त वर्ष 2018 से घरेलू व्यवसाय का उसके वित्तीय परिणाम पर अधिक असर दिखेगा। एसईबी और रेलवे ऑर्डरों से केईसी की व्यस्तता बरकरार रहेगी। कंपनी द्वारा अपनी कार्यशील पूंजी जरूरतों को घटाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं जिससे उसे वित्त वर्ष 2018 से ब्याज खर्च कम करने में मदद मिलेगी।

पीएफसी और आरईसी
लगभग 70 प्रतिशत डिस्कॉम का कर्ज पुनर्गठित होने के साथ साथ उदय से पीएफसी और आरईसी को एसईबी और डिस्कॉम को दिए ऋणों पर नुकसान की पहचान करने में मदद मिली है। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में एसईबी से मांग की वजह से दोनों कंपनियों की ऋण बुक में लगातार तेजी आई है। एग्रीगेट टेक्नीकल ऐंड कमर्शियल (एटीएंडसी) नुकसान में कमी, लागत और राजस्व के बीच अंतर में कमी, ब्याज लागत बचत आदि से एसईबी के फंसे कर्ज के बड़े हिस्से को अपग्रेड करने और इसका समाधान निकालने में मदद मिलेगी। नवीकरणीय क्षेत्र में बढ़ते अवसर भी दोनों कंपनियों के लिए शुभ संकेत हैं।

सीमेंस
विद्युत टीऐंडडी, मेट्रो रेल, रेलवे सिग्नलिंग और स्मार्ट सिटी के लिए हाई-टेक्नोलॉजी सॉल्युशनों में मजबूत बाजार भागीदारी ने सीमेंस को विद्युत और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सरकारी निविदाओं का लाभ उठाने के लिए मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया है। सीमेंस इंडिया अपनी पैतृक कंपनी की योजनाओं में वैश्विक भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रमुख भागीदार है। इससे एशिया और उत्तर अमेरिका के लिए निर्यात में तेजी आने की उम्मीद है।

स्किपर
पिछले वर्षों में परियोजना क्रियान्वयन में सफलता ने स्किपर को पावर ग्रिड और एसईबी अनुबंधों से लाभ कमाने में सक्षम बनाया है। हालांकि इसके पॉलिमर उत्पाद व्यवसाय पर दबाव बना हुआ है लेकिन वित्त वर्ष 2018 में इसमें सुधार आने की उम्मीद है। टावरों और पारेषण खंभों के लिए अपनी गुवाहाटी इकाई में पूंजीगत विस्तार का सकारात्मक असर वित्त वर्ष 2018 के शुरू से दिखना चाहिए।

टेक्नो इलेक्ट्रिक
पावर टीऐंडडी और अक्षय ऊर्जा में उपस्थिति के साथ टेक्नो इलेक्ट्रिक सभी क्षेत्रों की विद्युत परियोजनाओं पर दांव लगाने पर प्रमुख कंपनी है। पावर ग्रिड और एनटीपीसी का उसकी ऑर्डर बुक में 87 फीसदी का हिस्सा है जिससे ऑर्डर क्रियान्वयन का जोखिम दूर हो रहा है। उसकी ऑर्डर बुक 2300 करोड़ रुपये पर है जिससे कम से कम दो वर्षों के लिए आय संभावना मजबूत बनी हुई है।

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