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मिड- और स्मॉल-कैप फंडों ने किया दमदार प्रदर्शन

कृष्ण कांत | मुंबई Apr 14, 2017 08:32 PM IST

इक्विटी म्युचुअल फंडों (एमएफ) ने 2016-17 (वित्त वर्ष 2017) में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने बेंचमार्क सूचकांकों को मात दी। मझोले आकार की ओपन-एंडेड इक्विटी योजना ने पिछले 12 महीनों में अपने निवेशकों को 26 प्रतिशत का प्रतिफल दिया जो समान अवधि के दौरान सेंसेक्स में आई 17.8 फीसदी की तेजी की तुलना में काफी अधिक है। म्युचुअल फंडों ने अल्पावधि के लिहाज से भी निराश नहीं किया और इक्विटी योजना ने पिछले तीन महीने में 14.9 फीसदी का प्रतिफल दिया जबकि इस अवधि में सेंसेकस द्वारा दिया गया प्रतिफल 12.2 फीसदी रहा। इसे लेकर आश्चर्य नहीं है कि व्यक्तिगत निवेशक फंडों की ओर लगातार आकर्षित हुए हैं और कई सफल योजनाओं ने सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लांस (एसआईपी) के जरिये मजबूत पूंजी प्रवाह दर्ज किया।
 
हालांकि इक्विटी बाजारों की तरह सभी म्युचुअल फंड निवेशक भाग्यशाली नहीं रहे। पिछला वर्ष स्मॉल और मिड-कैप योजनाओं के लिए सुर्खियों में रहा जबकि लार्ज-कैप और सेक्टर-केंद्रित फंड पीछे रहे। एसबीआई एमएफ में मुख्य निवेश अधिकारी नवनीत मुनॉट ने कहा, 'योजनाओं से प्रमुख सूचकांक में रुझान को प्रदर्शित किया है जिसमें स्मॉल- ऑर मिड-कैप सूचकांकों ने लार्ज-कैप समेत प्रमुख सूचकांकों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया।'
 
मिड-, स्मॉल- और माइक्रो-कैप शेयरों पर केंद्रित फंडों ने अच्छा प्रदर्शन किया और स्मॉल-कैप फंड श्रेणी ने पिछले 12 महीने में 34.1 फीसदी और पिछले पांच वर्षों में 23.9 फीसदी का सालाना (चक्रवृद्घि दर) का प्रतिफल दर्ज किया। वहीं मिड-कैप योजनाएं दूसरे स्थान पर रहीं और इनका पिछले 12 महीनों में प्रतिफल 32.8 फीसदी और पांच साल में 23.3 फीसदी रहा। स्पष्टï रूप से सभी श्रेणियों के फंडों ने प्रमुख सूचकांकों की तुलना में बेहतर प्रतिफल दिया है।
 
दोनों श्रेणियों के बाद लार्ज-कैप का प्रदर्शन रहा है। लार्ज-कैप फंडों ने पिछले 12 महीनों में 20.5 फीसदी और पिछले पांच साल में 14.5 फीसदी का सालाना प्रतिफल दिया। टैक्स प्लानिंग (इक्विटी-लिंक्ड सेविंग स्कीम्स), सेक्टर-फोकस्ड और मल्टी-कैप फंड जैसे अन्य श्रेणियों ने प्रदर्शन के संदर्भ में लार्ज-कैप की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। यह विश्लेषण 171 ओपन-एंडेड इक्विटी योजनाओं के पांच साल के प्रदर्शन रिकॉर्ड और 28 मार्च 2017 तक कम से कम 200 करोड़ रुपये की एयूएम वाली योजनाओं पर आधारित है। यह आंकड़ा वैल्यू रिसर्च से लिया गया है।
 
लार्ज-कैप कंपनियों में पिछले तीन वर्षों के दौरान ठहराव की स्थिति बनी रही और निफ्टी-50 कंपनियों का संयुक्त शुद्घ लाभ तीन साल के लिए 70,000 करोड़ रुपये के आसपास रहा है। इसके परिणामस्वरूप, लार्ज-कैप फंडों ने पिछले साल अच्छा प्रदर्शन नहीं किया। आईडीएफसी एमएफ के प्रमुख अनूप भास्कर कहते हैं, 'निवेशकों ने मिड- और स्मॉल-कैप पर सिर्फ इसलिए अधिक ध्यान नहीं दिया कि वे शानदार प्रतिफल देती हैं बल्कि इसलिए भी इन पर ध्यान दिया कि पिछले कुछ वर्षों में लार्ज-कैप कंपनियां आय वृद्घि में सक्षम नहीं रही हैं। हालांकि यदि वृद्घि की रफ्तार में सुधार होता है तो लार्ज-कैप शेयर भी पीछे नहीं रहेंगे।'
 
फंड प्रबंधक अब मिड- और स्मॉल-कैप शेयरों पर चौकस बने हुए हैं। मुनॉट कहते हैं, 'तेजी की स्थिति में, मिड- और स्मॉल-कैप हमेशा से प्रमुख सूचकांकों को मात देते हैं, लेकिन मूल्यांकन इस सेगमेंट में मूल्यांकन काफी महंगा हो गयाा है जबकि लार्ज-कैप शेयर अपेक्षाकृत सस्ते हैं।'
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