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वित्तीय परिसंपत्तियों पर दावे के लिए करें उत्तराधिकार प्रमाणपत्र का इस्तेमाल

प्रिया नायर |  Apr 16, 2017 09:23 PM IST

नामित नहीं किए जाने या वसीयत के अभाव में किसी जायदाद या वित्तीय परिसंपत्ति के उत्तराधिकारी को दावे का प्रमाण देना होगा। ऐसे मामलों में परिसंपत्तियों के आधार पर उत्तराधिकारी को सक्सेशन सर्टिफिकेट या लेटर ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन देने के लिए कहा जा सकता है। चल संपत्तियों जैसे भविष्य निधि, बैंक जमा, शेयर, ऋण या अन्य प्रतिभूतियों के लिए उत्तराधाकार प्रमाणप9 अर्थात सक्सेशन सर्टिफिकेट की आवश्यकता होती है। अचल संपत्ति जैसे भूमि या आभूषण के लिए उत्तराधिकारी को अपने दावे के पक्ष में लेटर ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन सौंपना होगा। 

 
उदाहरण के तौर पर मृत्यु से पहले किसी व्यक्ति ने किसी कंपनी या व्यक्ति को रकम उधार दी थी तो उधार लेने वाला उत्तराधिकारी से साक्ष्य की मांग कर सकता है। ऐसी स्थिति में उत्तराधिकारी को न्यायालय से एक प्रमाणपत्र प्राप्त करना होगा, जिसमें लिखा होगा कि उत्तराधिकारी दिवंगत व्यक्ति की जायदाद का मालिक होगा। डी एम हरीश ऐंड कंपनी में वकील अनिल हरीश कहते हैं,'यह प्रमाणपत्र हासिल करने के बाद वह उधार लेने वाले को रकम भुगतान के लिए कह सकता है और एक पावती जारी कर सकता है, जो सिद्ध करेगी कि उधार लेने वाले ने सही व्यक्ति को रकम लौटाई है।' बैंक खाते, भविष्य निधि या शेयरों के मामले में नामित व्यक्ति के लिए प्रावधान हैं, लेकिन विवाद होने पर न्यायालय सक्सेशन सर्टिफिकेट की मांग कर सकता है।
 
 
शार्दुल अमरचंद मंगलदास में पार्टनर दिवि दत्ता कहती हैं, 'बैंक और वित्तीय एवं निजी संस्थान स्वयं ही नामित व्यक्ति को रकम लौटा देते हैं। हालांकि नामित व्यक्ति कानूनी उत्तराधिकारी नहीं हो सकता है। वास्तविक लाभार्थी के निर्धारण तक वह एक न्यासी के तौर पर काम कर सकता है। लिहाजा अगर नामित व्यक्ति सहयोग करने से इनकार कर दे या कोई विवाद खड़ा हो जाए तो इसमें एक सक्सेशन सर्टिफिकेट की जरूरत होगी।' इसी तरह अगर रकम बहुत बड़ी है और वित्तीय संस्थान को लगता है कि दावा करने वाला व्यक्ति सही नहीं है तो वह उस व्यक्ति को सक्सेशन सर्टिफिकेट प्रस्तुत करने के लिए कह सकता है। दत्ता कहती हैं कि कुछ राज्यों में एक अचल संपत्ति पर टाइटल हस्तांतरण के लिए प्रोबेट (न्यायालय द्वारा सत्यापित वसीयत की प्रति) और सक्सेशन सर्टिफिकेट अनिवार्य होते हैं।
 
हरियानी ऐंड कंपनी में एसोसिएट पार्टनर अंशुमन जगताप का कहना है कि रकम छोटी होने पर बैंक या वित्तीय संस्थान उत्तराधिकारी से हलफनामे की मांग कर सकते हैं, लेकिन रकम को लेकर कोई तय नियम नहीं है। कुछ मामलों में बैंक या वित्तीय संस्थान कानूनी उत्तराधिकार प्रमाणपत्र की मांग कर सकते हैं, जिसे प्राप्त करना सक्सेशन सर्टिफिकेट के मुकाबले आसान है। दत्ता कहती हैं कि अंतर यह है कि दिवंगत व्यक्ति के जीवित उत्तराधिकारी की पहचान के लिए कानूनी उत्तराधिकार प्रमाणपत्र दिया जाता है, जबकि सक्सेशन सर्टिफिकेट उत्तराधिकारी की प्रामाणिकता साबित करने और उसे विरासत की जायदाद देने के लिए जारी किया जाता है।
 
पत्र प्राप्त करने के लिए लाभार्थी को नाम, रिश्ता, अन्य उत्तराधिकारियों के नाम, समय, तारीख और मृत्यु के स्थान के साथ न्यायालय में याचिका दाखिल करनी होगी। याचिका के साथ मृत्यु प्रमाणपत्र और अन्य आवश्यक प्रमाणपत्र जमा कराए जाने चाहिए। न्यायालय याचिका की समीक्षा के बाद सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर सकता है, साथ ही समाचार पत्र में नोटिस छपवाकर किसी तरह की आपत्ति दर्ज कराने के लिए एक समय सीमा तय कर सकता है। अगर कोई भी नोटिस पर सवाल नहीं उठाता है और न्यायालय संतुष्टï हो जाता है तब यह याचक को सक्सेशन सर्टिफिकेट जारी करने का आदेश देता है। अगर एक से अधिक याची है तो न्यायालय संयुक्त रूप से उन्हें सर्टिफिकेट जारी कर सकता है। जगताप कहते हैं, 'सक्सेशन सर्टिफिकेट जारी करने में न्यायालय को एक साल लग सकता है। अगर कोई विवाद है तो याचिका मुकदमें में चला जाता है।'
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