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छोटे और मझोले शेयरों से अब निकल लें

तिनेश भसीन |  Apr 23, 2017 08:52 PM IST

निवेश सलाहकार जी चोक्कालिंगम को मिड- और स्मॉल-कैप शेयरों में रकम लगाने के बारे में अपने ग्राहकों को नए तर्क देने में समस्या का सामना करना पड़ रहा है। उनका मानना है कि मिड- और स्मॉल-कैप शेयरों में बुलबुले जैसी स्थिति है  क्योंकि इनका मूल्यांकन कीमतों के अनुरूप नहीं है। चोक्कालिंगम का कहना है, 'ऐतिहासिक रूप से ऐसे कुछ खास क्षेत्र या थीम हैं जिन्होंने दबावग्रस्त मूल्यांकन पर कारोबार किया है और उनसे मिड- और स्मॉल-कैप सूचकांकों में बदलाव दिखेगा। यह पहली बार है जब मैं संपूर्ण रूप से अधिक मूल्यांकन की स्थिति देख रहा हूं।'
 
वह अपने ग्राहकों को उनके पोर्टफोलियो में लार्ज-कैप कंपनियों का  50 फीसदी, छोटी कंपनियों का 30 फीसदी हिस्सा और शेष नकदी बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं। पिछले साल तक उन्होंने अपने ग्राहकों को 80 फीसदी निवेश मिड- और स्मॉल-कैप शेयरों में करने की सलाह दी थी। निवेश प्रबंधकों का मानना है कि निवेशकों को उस स्थिति में मिड- और स्मॉल-कैप शेयरों में मुनाफावसूली कर लेनी चाहिए जब उन्हें लग रहा हो कि मूल्यांकन दबाव में है। एएसके इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के बिजनेस हेड एवं मुख्य निवेश अधिकारी प्रतीक अग्रवाल का कहना है, 'नकदी बनाए रखने और अवसरों के लिए इंतजार करने वाले लोगों को धीरे धीरे बिकवाली शुरू कर देनी चाहिए। अगर उनके पास निवेश का विकल्प हो तो वे महंगे शेयरों से निकल सकते हैं।'
 
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि निवेशकों को अब लार्ज-कैप पर ध्यान देना चाहिए। यदि बाजार में गिरावट शुरू होती है तो छोटी कंपनियों के शेयर तेजी से गिरते हैं। यदि लार्ज-कैप की बात की जाए तो इनमें गिरावट कम आएगी। बोनांजा पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज के फंड प्रबंधक योगेश नागांवकर कहते हैं, 'निवेशक यदि छोटी कंपनियों में निवेश बनाए रखना चाहते हैं तो उन्हें काफी हद तक चुनिंदा रुख अपनाने की जरूरत होगी।' उनका मानना है कि निवेशकों को कुछ खास कंपनियों, उनके प्रतिस्पर्धी लाभ और फिर सेक्टर पर ध्यान देना चाहिए। उनका कहना है कि वे प्लास्टिक, फोर्जिंग और निर्माण क्षेत्र की कंपनियों में आकर्षक मूल्यांकन देख रहे हैं। 
 
म्युचुअल फंडों में निवेश करने वाले निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में डाइवर्सिफाइड फंडों को रखने की खास जरूरत होगी। मिड और स्मॉल-कैप फंडों में निवेश कुल इक्विटी पोर्टफोलियो के 30-40 फीसदी तक सीमित होना चाहिए। उन्हें अपने एसआईपी निवेश को बाजार मूल्यांकन की चिंता किए बगैर बरकरार रखना चाहिए और फंड प्रबंधकों को उन्हें सही सलाह देनी चाहिए।
 
हाल में कोटक इंस्टीट्ïयूशनल इक्विटीज ने एक रिपोर्ट में कहा, 'हम अपने कवरेज में कई मिड-कैप शेयरों के मूल्यांकन में काफी तेजी देख रहे हैं। दरअसल, यह कहना गलत नहीं होगा कि कुछ शेयरों की तेजी बुलबुले जैसी स्थिति है जो कभी भी फट सकती है।' ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि कुछ कंपनियां निश्चित रूप से मजबूती दर्ज करेंगी, लेकिन उनका मूल्यांकन अत्यधिक ऊंचाई पर है, खासकर सेमी-ब्रांडेड (सेमी-कमोडिटी) स्पेस में मूल्यांकन काफी महंगा है। 
 
रिपोर्ट में ऐसे 19 शेयरों को शामिल किया गया है जिनमें अमर राजा बैटरीज, डालमिया भारत, श्री सीमेंट, क्रॉम्पटन ग्रीव्स कंज्यूमर, ग्रीनप्लाई इंडस्ट्रीज, वोल्टास और व्हर्लपूल मुख्य रूप से शामिल हैं। निवेश प्रबंधकों का मानना है कि मिड- और स्मॉल-कैप में बुलबुले की स्थिति इसलिए है क्योंकि मौजूदा कीमतों को जायज ठहराने के लिए इन कंपनियों को अगले दो वर्षों में अपने आय कई गुना बढ़ाने की जरूरत होगी। लेकिन आर्थिक वृद्घि, औद्योगिक उत्पादन और ऋण वृद्घि में ठहराव के कारण यह संभव नहीं दिख रहा है। 
 
दरअसल, डीएसपी ब्लैकरॉक ने मिड और स्मॉल-कैप शेयरो में तेजी के बाद अपने श्रेष्ठï प्रदर्शन वाले फंड डीएसपी ब्लैकरॉक माइक्रोकैप फंड में ताजा निवेश प्रवाह रोक दिया है। विश्लेषकों का कहना है कि छोटी कंपनियां निवेशकों को आकर्षित करने में सफल रह सकती हैं क्योंकि शेयर बाजार लगातार तेजी की ओर बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश में भाजपा की जीत के बाद यह उम्मीद बढ़ी है कि पार्टी अगले आम चुनाव में भी फिर विजयी होगी। अगले सात वर्षों के लिए एक स्थायी सरकार की संभावना से निवेशकों में नई उम्मीद पैदा हुई है और निवेश को लेकर उनका नजरिया स्पष्टï हो सकता है। 
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