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रेरा दिलाएगा आपको आसानी से डेरा

तिनेश भसीन |  Apr 30, 2017 09:34 PM IST

ज्यादातर विशेषज्ञ पिछले कुछ समय से पहली बार घर खरीदारों को रियल एस्टेट (नियमन एवं विकास) कानून (रेरा) लागू होने तक इंतजार करने की सलाह देते रहे हैं।  मोटे तौर पर माना जा रहा है कि इस कानून के बाद रियल एस्टेट क्षेत्र में अधिक पारदिर्शता आएगी और जायदाद की कीमतें भी कम हो जाएंगी। हालांकि  खबरों पर भरोसा करें तो राज्यों ने रेरा के कई प्रावधानों में संशोधन किए हैं और उनके लिए 1 मई की समय-सीमा के भीतर इसे लागू करना भी संभव नहीं दिख रहा है। अब मामला पलटते देख विशेषज्ञ घर खरीदारों को इस कानून के लागू होने का इंतजार किए बिना मकान खरीदने की सलाह दे रहे हैं। 

 
नाइट फ्रैंक इंडिया के कार्यकारी निदेशक गुलाम जिया कहते हैं, 'रेरा के ज्यादातर प्रावधान निर्माणाधीन जायदाद के संबंध में हैं। जो लोग रियल एस्टेट नियामक का इंतजार कर रहे थे, वे उन परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं, जो पूरी हो गईं है या पूरी होने के बिल्कुल करीब हैं। खरीदार द्वितीयक बाजार में भी खरीदारी कर सकते हैं।' हालांकि जिया कहते हैं कि जो लोग निर्माणाधीन जायदाद खरीदना चाहते हैं उन्हें राज्यों द्वारा रेरा लागू किए जाने तक इंतजार करना चाहिए।
 
कोलियर्स इंटरनैशनल में नैशनल डायरेक्टर (नॉलेज सिस्टम्स) अमित ओबेरॉय कहते हैं कि खरीदार को हितों की सुरक्षा के लिए केवल रेरा पर ही निर्भर नहीं रहना चाहिए। उनके अनुसार रेरा अस्तित्व में आए चाहे नहीं आए खरीदार को आवश्यक प्रक्रिया तो पूरी करनी ही पड़ेगी। रेरा आने के बाद भी खरीदार को विनिर्माताओं के पिछले प्रदर्शन पर नजर दौड़ानी होगी। 
 
पहला घर खरीदने वाले होंगे खुश 
 
जो लोग पहली बार घर खरीदने जा रहे हैं उनके लिए इससे अच्छा मौका कोई और नहीं हो सकता। इस समय ब्याज दरें कम हैं और आने वाले समय में भी ये नीचे ही रहेंगी। सरकार ने ऋण पर ब्याज सब्सिडी देने की घोषणा की है और छोटे आवास अधिक सस्ते किए गए हैं, लेकिन अगर आप जायदाद निवेशक हैं तो मुनाफा कमाने के लिए आवास ऋण पर निर्भर रहने का समय समाप्त हो गया है। वित्त वर्ष 2017 तक यह जरूर संभव था लेकिन अब चीजें काफी बदल गई हैं। उदाहरण के लिए कराधान में परिवर्तन के कारण खरीदारी पर लागत खासी बढ़ जाएगी। जेएलएल इंडिया में सीईओ (रेसिडेंशियल सर्विसेस) अशविंदर राज सिंह कहते हैं, 'सरकार संपन्न लोगों से लाभ लेकर इसे पहली बार घर खरीदने वाले लोगों और गरीबों में बांट रही है।' उनके अनुसार सरकार की इस पहल से लाभान्वित होने वाले लोग अब बाजार में आ रहे हैं और ज्यादातर 40 लाख से 80 लाख रुपये मूल्य के जायदाद की बिक्री हो रही है। 
 
लाभार्थियों के लिए खुशियां अनेक
 
पिछले तीन-चार सालों से रियल एस्टेट बाजार में खरीदारों की मनमानी चली है और समय के साथ संभावनाएं भी बढ़ी हैं। कुशमैन ऐंड वेकफील्ड इंडिया के प्रबंध निदेशक अंशुल जैन कहते हैं, '2012-13 से कीमतें स्थिर रही हैं या अलग-अलग शहरों में इनमें 10-15 प्रतिशत की गिरावट आई है। महंगाई पर भी गौर करें तो वास्तविक कीमतें खासी कम हुई हैं।' इसके अलावा सरकार ने जो लाभ देने की बात कही हैं उनके हिसाब से पिछले कई वित्त वर्षों के मुकाबले खरीदारों के लिए यह वित्त वर्ष बेहतर है। अगर आप 18 लाख रुपये तक कमाते हैं और पहला घर ऋण लेकर खरीदना चाहते हैं तो सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ऋण के ब्याज वाले हिस्से पर सब्सिडी दे रही है। उधार लेने वाले की आय जितनी कम होगी उसे उतनी ही अधिक सब्सिडी मिलेगी। सरकार ने यह भी कहा है कि चार महानगरों में 30 वर्ग मीटर कारपेट एरिया वाले घर और छोटे शहरों में 60 वर्ग मीटर कारपेट एरिया वाले घर सस्ते आवास श्रेणी में आएंगे। सुविधाओं के आधार पर ऐसे घरों का बिल्ट-अप क्षेत्र 30-35 प्रतिशत अधिक होगा। अगर कोई डेवलपर इसी आकार का घर बनाता है तो उसे कर में रियातत मिलेगी, जिसका लाभ खरीदारों को दिया जा सकता है। हालांकि इस लाभ का दावा करने के लिए बिल्डर को पांच साल के भीतर परियोजना पूरी करनी होगी। 
 
कोलियर्स इंटरनैशनल इंडिया के अमित ओबेरॉय कहते हैं, 'कई ऐसे संस्थान है, जिनकी ऐसी परियोजनाओं पर नजर है। हम संभावित लाभ का मूल्यांकन कर रहे हैं।' अगर संस्थागत धन इन परियोजनाओं में आया तो खरीदार को परियोजना की गुणवत्ता और इसके समय पर पूरा होने को लेकर आश्वस्त किया जा सकता है। जो लोग बड़े और अधिक महंगे घर खरीद रहे हैं वे भी आज खुशहाल हैं, क्योंकि यह खरीदारों के अनुकूल बाजार है। सीबीआरई के चेयरमैन (भारत एवं दक्षिण-पूर्व एशिया) अंशुमन मैगजीन कहते हैं, 'मौजूदा मकान बेचने के लिए विनिर्माता अपनी विपणन रणनीति में बदलाव कर रहे हैं। इसमें मोल-भाव को लेकर लचीला रुख, विभिन्न भुगतान योजनाओं की पेशकश और यहां तक कि मुफ्त पेशकश आदि शामिल हैं।'
 
बतौर निवेशक रहें चौकस
 
सरकार ने खाली जायदाद खरीदने पर आयकर छूट का लाभ वापस ले लिया है, जो निवेशकों के लिए एक झटका माना जा रहा है। पहले जब कोई व्यक्ति आवास ऋण के साथ जायदाद खरीदता था, जिसमें उसे स्वयं नहीं रहना होता था तो वह अपनी आय से ऋण पर ब्याज का पूरा हिस्सा काट सकता था। अब यह कटौती सालाना 2 लाख रुपये कर दी गई है। अगर किसी व्यक्ति ने 20 साल के लिए 80 लाख रुपये का आवास ऋण 8.65 प्रशितत ब्याज पर लिया है तो उसकी मासिक किस्त 70,187 रुपये बनती है। पहले साल वह बैंक को 8.42 लाख रुपये भुगतान करता है। इसमें पहले साल ब्याज 6.86 लाख रुपये हो जाता है क्योंकि बैंक शुरुआती सालों में अधिक ब्याज लेते हैं। अब पूरे ब्याज पर कटौती का दावा न कर निवेशक केवल 2 लाख रुपये तक का दावा कर सकता है। जैन कहते हैं, 'इससे निवेश के लिए खरीदी गई जायदाद पर खासा असर पड़ेगा।'
 
निवेशकों को अब खरीदारी की लागत पर भी विचार करना होगा क्योंकि इन दिनों किराये भी कम हो रहे हैं। वे तभी मुनाफा कमा सकते हैं जब वे बाजार में लंबे समय के लिए हैं। मैंगजिन कहते हैं, 'अब संभावित खरीदार जायदाद खरीदने में अधिक सतर्कता दिखाएंगे और निवेश पर दीर्घ अवधि के प्रतिफल के मूल्यांकन करने सहित विभिन्न पक्षों पर ध्यान केंद्रित करेंगे।'
 
निवेशकों के लिए भी छोटी रियायतें हैं लेकिन ब्याज कटौती पर सीमा के मुकाबले यह काफी कम है। जब कोई व्यक्ति केवल दो साल तक जायदाद रखने के बाद इसकी बिक्री करता है तो वह दीर्घ अवधि के पूंजी लाभ पर कर कटौती का दावा कर सकता है। पहले यह अवधि तीन साल की थी। इसके साथ ही सरकार ने कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स के लिए आधार वर्ष में भी बदलाव किया है, जिससे कर देनदारी में कमी आएगी। जायदाद की बिक्री पर सरकार महंगाई पर विचार करते हुए विक्रेता को जायदाद की खरीद मूल्य बढ़ाने का अधिकार देता है। पूंजीगत लाभ कम हो जाएगा क्योंकि जायदाद खरीदने की लागत बढ़ जाएगी और इसलिए जायदाद की बिक्री के समय कर बोझ भी कम हो जाएगा।
कीवर्ड real estate, property, रियल एस्टेट (नियमन एवं विकास) अधिनियम,

  
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