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खाली कमरे के किराये से कमाएं

प्रिया नायर |  May 01, 2017 09:02 PM IST

अकेले रहने वाले किसी बुजुर्ग दंपती के लिए दिल्ली या मुंबई जैसे महानगरों में तीन बेडरूम वाला घर संभालना मुश्किल भरा हो सकता है। उम्र की मुश्किल तो है ही, इन शहरों में रहन-सहन पर खर्च भी अधिक होता है। लेकिन अगर वे अपने फ्लैट का कोई कमरा किराये पर देंगे तो उन्हें कमाई का एक और स्रोत मिल सकता है। आप अपनी हाउसिंग सोसाइटी से इजाजत लेकर किसी ऐसे विद्यार्थी को कमरा किराये पर दे सकते हैं, जो बहुत अधिक किराया देने की हालत में नहीं है। अगर इमारत किसी व्यावसायिक इलाके में है तो आप इसे व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भी किराये पर दे सकते हैं। 

 
रहने के लिए किराये पर देना
 
सबसे आसान तरीका यह है कि कमरे में किसी पेइंग गेस्ट (पीजी) को किराये पर रख लिया जाए। मगर ऐसा करते समय बिजली, पानी आदि के शुल्क को भी किराये में जोडऩा होगा क्योंकि केवल एक कमरे के लिए अलग से मीटर लगाना खर्चीला हो सकता है। कुशमैन ऐंड वेकफील्ड में वरिष्ठï निदेशक (रिसर्च सर्विसेस) सिद्धार्थ गोयल कहते हैं, 'अगर आप केवल एक कमरा किराये पर लगा रहे हैं तो अलग से मीटर लगाना मुश्किल हो सकता है क्योंकि मालिकाना हक  केवल एक व्यक्ति के नाम पर है। अगर घर किसी एक व्यक्ति के अधीन नहीं है तो आप एक से अधिक मालिक और अलग प्रवेश द्वार दिखाकर अलग मीटर लगवाने के लिए प्रयास कर सकते हैं।' आम तौर पर पानी और बिजली शुल्क अनुपात के आधार पर वसूले जाते हैं यानी तीन कमरों के घर में कुल बिल का एक तिहाई हिस्सा एक कमरे में रहने वाले किरायेदार से वसूला जा सकता है। लेकिन केबल, इंटरनेट, मेड आदि के पूरे शुल्क वसूले जाते हैं। पेइंग गेस्ट रखने वाला मकान मालिक सिक्योरिटी के तौर पर कम रकम ही लेगा, जबकि पूरा मकान किराये पर लेने वाले को अधिक रकम देनी होगी। इन शर्तों का समझौते में उल्लेख होना चाहिए।
 
जेएलएल इंडिया के मुख्य कार्याधिकारी अशविंदर राज सिंह कहते हैं, 'समझौता आवश्यक नहीं है, लेकिन दोनों पक्ष किरायानामा यानी रेंट एग्रीमेंट इसलिए बनवा लेते हैं ताकि बाद में कोई दिक्कत नहीं आए।' नाइट फै्रंक के कार्यकारी निदेशक गुलाम जिया कहते हैं कि कई मामलों में मकान मालिक इस एग्रीमेंट की रजिस्ट्री नहीं कराना चाहता क्योंकि उस सूरत में स्टांप ड्यूटी जैसा अतिरिक्त खर्च होता है। वह कहते हैं, 'जब पूरा मकान किराये पर दिया जाता है तो एग्रीमेंट महत्त्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि किरायेदार मकान खाली नहीं करे तो मकान मालिक मकान पर अपना मालिकाना हक होने के सबूत के तौर पर उसे पेश कर सकता है। लेकिन पीजी के मामले में मकान मालिक उसी घर में रहता है, इसलिए उसका जायदाद पर तब भी नियंत्रण होता है।' मकान मालिक द्वारा किराये की रसीद नहीं दिए जाने पर किरायेदार के लिए कर कटौती का दावा करना मुश्किल हो जाएगा, जैसा कि पीजी के मामले में होता है। 
 
कमरा पेइंग गेस्ट को देने पर किराया सुविधाओं, कमरे की गुणवत्ता आदि के आधार पर तय होता है। उदाहरण के लिए अगर 2 बीएचके (2 बेडरूम, हॉल और किचन) फ्लैट का किराया 30,000 रुपये है तो एक कमरा किराये पर देने से 15,000 रुपये मिल सकते हैं बशर्ते बेडरूम के अलावा किरायेदार को रसोई और लिविंग रूम का इस्तेमाल करने की छूट मिले। गोयल कहते हैं कि पेइंग गेस्ट को ऐसी सुविधाएं नहीं मिलने पर 7,000-10,000 रुपये हो सकता है।
 
व्यावसायिक गतिविधियों के लिए देना
 
व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भी कमरा किराये पर दिया जा सकता है। इसके लिए भी सोसाइटी की अनुमति लेनी होगी। हालांकि पहले यह जरूर देख लें कि आवासीय इलाकों में नगर निगम किस तरह की व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति देता है। ऐसे कई उदाहरण मिले हैं, जब मकान मालिक अपना मकान व्यावसायिक गतिविधियों जैसे योग केंद्र या चार्टर्ड अकाउंटेंट और डॉक्टरों को किराये पर देने के लिए न्यायालय तक पहुंच गए हैं। गोयल कहते हैं, 'नगर निगम के नियमों के अनुसार प्रदूषण नहीं फैलाने वाले और ढांचागत संरचना जैसे पानी के पाइप आदि को नुकसान नहीं पहुंचाने वाली गतिविधियों की इजाजत दी जाती है। हालांकि अगल-अलग शहरों में यह प्रावधान भिन्न हो सकते हैं।'
 
अगर आपका घर चारो तरफ से घिरी सोसाइटी में है तो इस बात की पूरी आशंका है कि व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जाएगी। अधिक लोगों के आने-जाने से दूसरों को परेशानी हो सकती है, लेकिन मिश्रित इस्तेमाल वाली इमारत है और आपका घर भूतल पर है तो व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इसे किराये पर देना आसान हो सकता है। कुछ व्यावसायिक गतिविधियां कर मुक्त होती हैं जबकि कुछ में जायदाद, जल, बिजली आदि दरों पर शुल्क लग सकता है। इसका जरूर ख्याल रखें। 
 
सोना और नाश्ता
 
बेड ऐंड ब्रेकफास्ट सर्विस भी शुरू की जा सकती है। इसके लिए पर्यटन विभाग से लाइसेंस की दरकार होगी। कुछ शुल्कों के साथ और अनापत्ति प्रमाणपत्रों के बाद लाइसेंस उपलब्ध होता है। उदाहरण के लिए महाराष्ट्र पर्यटन विकास निगम प्रॉपर्टी कार्ड, 7/12 एब्सट्रैक्ट, दो स्थानीय लोगों जैसे स्पेस् एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट, सरपंच, तलाठी आदि से पहचान का सत्यापन,  कमरे का किराया, ग्राम पंचायत, नगर परिषद, नगरपालिका, महानगरपालिका से एनओसी, कमरे का फोटोग्राफ, प्रॉपर्टी टैक्स की रसीद, बिजली, पानी बिल आदि कागजातों की मांग करता है। जिया कहते हैं, 'चूंकि, ब्रेड ऐंड ब्रेकफास्ट आतिथ्य क्षेत्र की तरह ही माना जाता है, इसलिए नियम एवं कायदों का पालन करना होता है। अगर आपका घर किसी शहर में है तो इसकी मांग अधिक नहीं होगी लेकिन पर्यटन स्थलों पर लोग अधिक दिलचस्पी दिखाएंगे।'
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