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दुर्लभ और कीमती सामान का बीमा कराना नहीं आसान

प्रिया नायर |  May 07, 2017 09:32 PM IST

चीते की करीब 75 साल पुरानी खाल के बीमा के लिए हर साल 50,000 रुपये चुकाना उस शख्स के लिए मामूली बात होगी, जो ऐसी खाल अपने घर रखता है। लेकिन दिक्कत यह है कि इसमें व्यक्ति के जेल की सलाखों के पीछे जाने का जोखिम होता है क्योंकि इस समय भारत में चीते की खाल रखने पर प्रतिबंध है। इसका रास्ता यही है कि सरकार से यह प्रमाणपत्र लिया जाना चाहिए कि यह खाल पहले की है और इसलिए वर्तमान प्रतिबंध सूची के तहत नहीं आती है। 

 
सिक्योर नाउ के संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) कपिल मेहता का कहना है कि सरकारी प्रतिबंध की वजह से प्रमाणपत्र होने के बावजूद बीमा कंपनियां कवर मुहैया कराने में आनाकानी कर सकती हैं। मेहता अपने एक ग्राहक के मामले का हवाला देते हुए कहते हैं कि वह 5 लाख रुपये कीमत की चीते की खाल का बीमा कराना चाहता था, लेकिन सरकारी प्रमाणपत्र के बावजूद यह काम आसानी से नहीं हुआ। इसका प्रीमियम भी अधिक था क्योंकि इसकी कीमत का आकलन मुश्किल था और इसमें जोखिम भी ज्यादा थे। मेहता कहते हैं, 'भले ही चीते की खाल विरासत में मिली हो, लेकिन इनका बीमा कराना लगभग असंभव होता है। इसकी वजह यह है कि बीमा कंपनियों को खुद के मुश्किल में पडऩे का डर होता है। आदर्श स्थिति यह है कि सरकारी प्रमाणपत्र के बाद कोई भी व्यक्ति बीमा ले सकता है।'
 
पेंटिंग, विरासत में मिले गहने, शिल्पकृति, मूर्तियां, प्राचीन पुस्तकें या पुस्तकों के प्रथम संस्करण, डाक टिकट, सिक्के या ताले, क्रिस्टल, चीनी मिट्टी के बर्तन जैसी अन्य मूल्यवान वस्तुुओं का बीमा कराना काफी आसान है। ऐसी चीजों का कवर फायर पॉलिसी के तहत आता है क्योंंकि यह व्यक्ति की संपत्ति या घर के बीमे का हिस्सा होती हैं। इसकी वजह यह है कि इन्हें आमतौर पर घर में रखा जाता है। परिवहन, प्राकृतिक आपदा आदि के दौरान आग, चोरी, क्षति से सुरक्षा के लिए इनका बीमा कराया जाता है। घोर लापरवाही या धोखाधड़ी के अलावा अन्य सभी जोखिम इसमेंं कवर किए जाते हैं। टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस के अध्यक्ष (बीमा) एम रविचंद्रन कहते हैं, 'किसी व्यक्ति के पास जो कुछ व्यक्तिगत संग्रह है और वह उसे मूल्यवान मानता है तो हम उसके लिए कवर मुहैया करा सकते हैं।' यहां यह बताया जा रहा है कि आपको कैसे अपने कीमती उत्पादों का मूल्यांकन और बीमा कराना चाहिए।
 
सही कीमत का निर्धारण
 
यह ऐसी मूल्यवान चीजों के लिए बीमा लेने का सबसे मुश्किल हिस्सा है। यह मूल्यांकन आपसी सहमति से निर्धारित कीमत के आधार पर किया जाता है। ग्राहक से यह उम्मीद की जाती है कि वह किसी स्वतंत्र एजेंसी या सरकार से मान्यता प्राप्त मूल्यांकनकर्ता से मूल्यांकन कराए। बीमा कंपनियां मूल्यांकनकर्ता को ढूंढने में मदद करती हैं। बीमा लेने के लिए मूल्यांकन रिपोर्ट जरूरी है। ज्यादातर मूल्यांकनकर्ता आमतौर पर गैलरी और म्यूजियम से जुड़े होते हैं। पेंटिंग के लिए मूल्यांकनकर्ता प्रत्येक नग के हिसाब से 1,000 से 1,500 रुपये वसूल सकते हैं। ग्राहक को यह खर्च वहन करना पड़ता है। 
 
बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस के उत्पाद विकास प्रमुख आर सुरेश नायर कहते हैं, 'दुर्लभ चीजों की अलग-अलग श्रेणियों के लिए विशेष मूल्यांकनकर्ता होते हैं। ग्राहक मूल्यांकनकर्ता को अपना सुझाव दे सकते हैं, लेकिन बीमा कंपनियां उनकी नेकनीयती की जांच करेंगी। हम सरकार से लाइसेंस प्राप्त मूल्य निर्धारकों को तरजीह देते हैं क्योंकि दावे की स्थिति में हम पूरी राशि चुकाने को बाध्य हैं और दावे की राशि पर सवाल नहीं उठा सकते हैं।' 
 
प्रीमियम एक निर्धारित दर के हिसाब से वसूल किया जाता है। यह आम तौर पर वस्तु की कीमत का एक निश्चित प्रतिशत होता है, जो आमतौर पर 1 से 1.5 फीसदी होता है। इसलिए अगर यह एमएफ हुसैन की 1 करोड़ रुपये की पेटिंग है तो सालाना प्रीमियम 1 लाख रुपये होगा। प्रीमियम इन बड़ी चीजों के लिए पुनर्बीमा आधारित कवर हैं। ये दुर्लभ चीजें हैं, इसलिए कीमत बढ़ सकती है। उदाहरण के लिए अगर कोई चित्रकार अचानक सुर्खियों में आता है तो उस पेंटिंग की कीमत बढ़ सकती है। आदर्श स्थिति यह है कि व्यक्ति को हर 3 से 4 साल में वस्तु का मूल्यांकन कराना चाहिए। मूल्यांकन का दूसरा तरीका बेंचमार्क तलाशना है, विशेष रूप से नीलामी या बिक्री के मामलों में। यह डाक टिकटों और सिक्कों जैसी चीजों के लिए कारगर होता है। डाक टिकटों के लिए स्टैनली गिबंस स्टैंप की सूची एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क है, जो वर्तमान कीमत का सही अनुमान दे सकता है।
 
मेहता कहते हैं, 'अगर आप कोई असामान्य चीज देते हैं तो इसका बीमा नहीं किए जाने के आसार होते हैं।' बीमा कंपनियां सरकारी मूल्यांकनकर्ताओं पर निर्भर होती हैं, जिन्हें मूल्यांकन करने का लाइसेंस दिया जाता है। इसमें धोखाधड़ी की आशंका कम होती है, लेकिन इससे पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता है। फ्यूचर जेनेराली इंडिया इंश्योरेंस के प्रबंध निदेशक और सीईओ केजी कृष्णमूर्ति राव कहते हैं, 'अगर यह किसी जाने-माने चित्रकार की कलाकृति है तो आम तौर पर किसी तरह का मानदंड आमतौर पर उपलब्ध होता है।' दरअसल जोखिम की अंडरराइटिंग से पहले कंपनी व्यक्ति को अंडरराइट करती है। रविचंद्रन कहते हैं, 'हम उन लोगों को चुनते हैं, जो कवर चाहते हैं।' मेहता कहते हैं कि अगर बीमा के बाद किसी कलाकृति को जाली पाया जाता है तो कंपनी कम राशि का भुगतान करेगी। उदाहरण के लिए आपने राजा रवि वर्मा की पेटिंग के लिए 50 लाख रुपये चुकाए हैं, लेकिन दो साल बाद आप पाते हैं कि यह जाली थी और इसकी कीमत केवल 2 लाख रुपये है। दावे के मामले में बीमा कंपनी केवल कम कीमत का भुगतान करेगी। 
 
सभी जोखिमों से सुरक्षा
 
इन सभी चीजों का बीमा घोर लापरवाही या धोखाधड़ी को छोड़कर बाकी सभी जोखिमों के लिए होता है। आम तौर पर दावे आग, नुकसान या परिवहन के दौरान खोने के होते हैं। चेन्नई में बाढ़ के दौरान बहुत सी पेंटिंग खराब हो गई थीं क्योंकि पानी 6 से 7 फुट तक जमा हो गया था और बीमा कंपनियों को वह पूरी राशि चुकानी पड़ी, जिस पर उन्होंने सहमति जताई थी। कई बार कंपनियां वस्तु को बहाल करने या मरम्मत करने में मदद करती हैं। रविचंद्रन अपने एक ग्राहक के उदाहरण देते हैं, जिसके पास 90 साल पुरानी रॉयल ओक वॉच थी। यह घड़ी गिरने से टूट गई। कंपनी ने इसे सिंगापुर भेजा और मरम्मत कराई। यह मरम्मत दावे की राशि से कराई गई। अपनी वस्तुओं को सही तरह से सहेजकर रखना जरूरी है। कंपनी इन शर्तों को अपनी पॉलिसी में शामिल करेगी। इसलिए अगर आपकी दुर्लभ वस्तु को सही तरह से सहेजकर नहीं रखा गया तो इस बात के आसार हैं कि आपको दावे की राशि का भुगतान न किया जाए।
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