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डेट पर प्रतिफल हुआ कमजोर तो पकड़ा जाए अब कौन सा छोर...

तिनेश भसीन और संजय कुमार सिंह |  May 14, 2017 09:08 PM IST

सेवानिवृति के नजदीक पहुंच चुके लोगों के लिए एक बुरी खबर है। 30 साल में पहली बार पिछले 30 वर्षों में सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) पर ब्याज की दर आठ फीसदी से नीचे (अब 7.9 फीसदी) आ गई है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने भी हाल ही में ब्याज दर 15 आधार अंक घटाकर 8.65 फीसदी कर दी है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की पांच वर्ष या इससे अधिक अवधि की जमा पर आपको सालाना महज 6.25 फीसदी का ब्याज मिलेगा। चूंकि सेवानिवृत्ति के लिए बचत के लिहाज से बड़ी तादाद में लोग स्थिर आय वाली योजनाओं पर ही निर्भर रहते हैं, इसीलिए अब उन्हें अपनी रणनीतियों में तब्दीली करनी पड़ेगी।

 
दूसरी ओर कुछ अच्छी खबरें भी हैं। चूंकि मुद्रास्फीति नहीं बढ़ रही है, इसलिए वास्तविक प्रतिफल नकारात्मक नहीं है। वित्त वर्ष 2017 का औसत उपभोक्ता कीमत सूचकांक 4.53 फीसदी पर है, जिससे वास्तविक ब्याज दरें फिलहाल सकारात्मक हैं। ऐसी सूरत में निवेशकों के सामने दो विकल्प हैं। प्रॉफिशिएंट फाइनैंशियल प्लानर्स के संस्थापक स्टीवन फर्नांडीस कहते हैं, 'या तो डेट में निवेश बढ़ाएं या कम प्रतिफल से उबरने के लिए पोर्टफोलियो में कुछ बदलाव करें।' डेट योजनाओं पर प्रतिफल पिछले साल के मुकाबले कम से कम 1 फीसदी तक घटा है और सावधि जमा (एफडी) पर तो प्रतिफल और भी ज्यादा गिर गया है।
 
बैंक में काम करने वाले 54 साल के भूषण आनंद अपनी 8 लाख रुपये की एफडी को लेकर चिंतित हैं, जिन्हें मई अैर जून के बीच परिपक्व होना है। उन्हें एफडी पर सालाना 8 फीसदी के आसपास औसत ब्याज मिलता है। आनंद इसे 6 साल के लिए (सेवानिवृत्त होने तक) दोबारा निवेश करना चाहते हैं। सेवानिवृत्त होने के बाद उनकी योजना इस रकम को वरिष्ठï नागरिक बचत योजना में डाल देने की है। उन्हें आठ फीसदी की ब्याज दर के साथ 12.69 लाख रुपये मिले होते। लेकिन 6.25 फीसदी के हिसाब से यह रकम 11.51 लाख रुपये ही होगी यानी पहले के मुकाबले उन्हें 1.18 लाख रुपये कम मिलेंगे। सेबी के समक्ष पंजीकृत निवेश सलाहकार और पर्सनलफाइनैंसप्लान डॉटइन के संस्थापक दीपेश राघव कहते हैं, 'निवेशकों को अब पुन: निवेश पर जोखिम का सामना करना पड़ रहा है। उनका निवेश ऐसे समय में परिपक्व हो रहा है जब ब्याज दरें नीचे आ चुकी हैं। इससे परिपवक्ता पर मिली रकम को दोबारा निवेश करने पर उन्हें पहले के मुकाबले कम ब्याज मिलेगा।' निवेशकों को अपनी उम्र के आधार पर अपने पोर्टफोलियो में अलग अलग तरह से बदलाव करने की जरूरत होगी।
 
सेवानिवृत्ति के करीब तो..
 
इस जमात के लोगों पर सबसे अधिक असर पड़ रहा है। लेकिन उन्हें सेवानिवृत्ति से तीन-चार साल पहले अपनी रकम इक्विटी से निकालकर डेट में लगाना शुरू कर देना चाहिए ताकि बाजार के उतार-चढ़ाव से बचा जा सके। आनंद की तरह कई लोग डेट फंडों की तुलना में एफडी को ही पसंद करते हैं क्योंकि इनमें प्रतिफल सुनिश्चित है और उनकी पूंजी सुरक्षित भी बनी रहती है। उसके उलट डेट म्युचुअल फंड दीर्घावधि के लिहाज से कर बचाने वाले हैं और कुछ अधिक प्रतिफल दे सकते हैं, लेकिन इनमें उतार-चढ़ाव भी आता है। लैडर7 फाइनैंशियल एडवाइजरीज के संस्थापक सुरेश सदगोपन कहते हैं, 'निवेश पर प्रतिफल बढ़ाने का श्रेष्ठï तरीका यह है कि अपने पोर्टफोलियो में कुछ इक्विटी बनाए रखें और पूरी तरह डेट पर निर्भर नहीं रहें। इक्विटी में उतना ही आवंटन करें, जितना जोखिम झेलने की क्षमता आपके भीतर है। अगर अधिक जोखिम सहन नहीं कर सकते हैं तो 15 फीसदी तक इक्विटी में लगाएं, लेकिन अगर आपको इक्विटी का अच्छा अनुभव है तो 40 फीसदी तक उसमें लगा सकते हैं।' 
 
आपको इक्विटी में कितना निवेश करना चाहिए, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपको सेवानिवृत्ति के बाद कितनी आय की जरूरत है। अगर उतनी आय के लिए आपको समूचे पोर्टफोलियो की जरूरत पड़ती है तो आप मासिक आय योजनाओं (एमआईपी) का विकल्प अपना सकते हैं, जो 15-25 फीसदी निवेश इक्विटी में और शेष डेट में करती हैं। पिछले साल इन फंडों ने 12.43 फीसदी प्रतिफल दिया और पांच साल में उनका औसत सालान प्रतिफल 10.28 फीसदी रहा।
 
अगर आपके पास इतना समय है कि आप अपने पोर्टफोलियो का एक हिस्सा 5 से 7 वर्ष के लिए अलग रख सकते हैं तो आपको इकिवटी बैलेंस्ड फंडों पर विचार करना चाहिए। बाद में मुद्रास्फीति बढऩे के साथ ही आपकी आय खर्च पूरे करने के लिहाज से पर्याप्त नहीं रह जाती है तो आप इन फंडों से व्यवस्थित ढंग से निकासी कर सकते हैं। ये फंड लंबी अवधि के दौरान एमआईपी की तुलना में बेहतर प्रतिफल देते हैं। वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि एक साल में अपने निवेश का 10 फीसदी हिस्सा निकाला जा सकता है। पांच से सात वर्षों के लिए निवेश यह सुनिश्चित करेगा कि इस अवधि के दौरान एकत्रित प्रतिफल आपको निरंतर प्रतिफल प्रदान करता रहेगा, बाजार चाहे चढ़े या गिरे। 
 
कई लोगों को सेवानिवृति के बाद पेंशन या संपत्ति हासिल होती है, जिससे उन्हें खर्च पूरे करने के लिए निर्धारित आय प्राप्त होती है। ऐसे निवेशक सात वर्षों की अवधि को ध्यान में रखकर लार्ज-कैप या मल्टी-कैप फंडों पर विचार कर सकते हैं। बाजार में उतार-चढ़ाव के दौर में निवेश पर प्रतिफल सुनिश्चित करने के लिए सिस्टेमैटिक ट्रांसफर प्लान के जरिये इक्विटी में निवेश करना उचित रहेगा।
 
40 से 50 के बीच उम्र तो..
 
चूंकि आपकी सेवानिवृत्ति में अभी 10 साल से भी अधिक समय है, इसलिए इक्विटी आवंटन में 5-10 फीसदी का इजाफा करना एक उपयुक्त समाधान है। यदि आप इक्विटी पर बहुत अधिक जोर देते हैं (इक्विटी में 60 फीसदी या अधिक निवेश करते हैं) तो उसमें 5 फीसदी तक इजाफा कर लें। इक्विटी में 40-50 फीसदी पूंजी निवेश वाले निवेशक 10 फीसदी और बढ़ा सकते हैं। 
 
निवेश सलाहकारों का कहना है कि इस वर्ग में लोगों को उन एफडी से रकम निकाल लेनी चाहिए, जिनमें 8 फीसदी से कम प्रतिफल मिल रहा है। उस रकम को उन्हें डेट फंड में लगा देना चाहिए। राइट हॉराइजंस के संस्थापक एवं मुख्य कार्याधिकारी अनिल रेगो कहते हैं, 'निवेशक को कॉरपोरेट बॉन्ड फंडों जैसे डेट फंडों पर अधिक ध्यान देना चाहिए। लेकिन साख का ध्यान रखें। कर-मुक्त बॉन्ड भी कर बचाने के बढिय़ा विकल्प हैं।'
 
20 से 30 साल उम्र तो...
 
घटती ब्याज दरों से इस आयुवर्ग के निवेशकों को खास फर्क नहीं पड़ता। राघव का कहना है, 'ऐसे निवेशकों ने परिसंपत्ति के जिस प्रकार के आवंटन का फैसला किया है, उन्हें उसी पर टिके रहना चाहिए। ब्याज दरों की चक्रीय चाल यह सुनिश्चित करती है कि दीर्घावधि में उन्हें मनचाहा प्रतिफल मिल ही जाएगा।' सैंक्टम वेल्थ मैनेजमेंट में प्रोडक्ट्ïस ऐंड सॉल्युशंस प्रमुख प्रतीक पंत कहते हैं, 'इस उम्र वर्ग में निवेशकों को अपने सेवानिवृति रकम के लिए 100 प्रतिशत निवेश इक्विटी में करना चाहिए और डेट में पैसा तभी लगाना चाहिए, जब वे 40 वर्ष के हो जाएं।' यूं भी ईपीएफ और पीपीएफ डेट संबंधी जरूरतों को पूरा कर देते हैं।
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