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अप्रत्यक्ष कर, सेवा कर भरते हैं तो कराएं जीएसटी के लिए पंजीकरण

प्रिया नायर |  May 28, 2017 09:49 PM IST

वस्तु एवं सेवा कर जीएसटी की दरें आखिरकार घोषित कर ही दी गई हैं। विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें बढ़ें या घटें, उनका इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं पर असर तो जरूर पड़ेगा। लेकिन इस समय बड़ा सवाल यह है कि उद्यमियों और पेशेवरों में से जीएसटी के लिए किसी पंजीकरण कराना होगा? और जुलाई, 2017 के बाद उनके लिए हालात किस तरह और कितने बदलेंगे?

किसे कराना होगा पंजीकरण?
किसी भी कारोबारी या पेशेवर का कुल कारोबार किसी वित्त वर्ष में अगर 20 लाख रुपये से अधिक है तो उसे जीएसटी देना होगा। यह नियम पूरे भारत के लिए है। लेकिन विशेष श्रेणी में रखे गए राज्यों में कारोबार की सीमा 10 लाख रुपये तय की गई है यानी वहां 10 लाख रुपये सालाना से अधिक कारोबार वालों को जीएसटी देना ही पड़ेगा। इस श्रेणी में पूर्वोत्तर के सभी राज्यों के साथ जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड आते हैं।
पीडब्ल्यूसी में पार्टनर (अप्रत्यक्ष कर) अनीता रस्तोगी कहती हैं, 'कुल कारोबार में कर योग्य आपूर्ति यानी वस्तुएं एवं सेवाएं, कर से छूट वाली आपूर्तियां, वस्तुओं और सेवाओं का निर्यात अथवा एक राज्य से दूसरे राज्य में उनकी आपूर्ति शामिल होगी, लेकिन उन पर लगाए गए कर (जीएसटी) का मूल्य इसमें बाहर कर दिया जाएगा।'
जीएसटी कानून में उन सभी कारोबारों और सेवा प्रदाताओं के लिए कर संबंधी प्रावधान किए गए हैं, जो अभी मूल्यवद्र्घित कर (वैट) या केंद्रीय बिक्री कर (सीएसटी) या उत्पाद शुल्क अथवा सेवा शुल्क जैसे वर्तमान अप्रत्यक्ष कर कानूनों के तहत पंजीकृत हैं। उन सभी को जीएसटी के तहत पंजीकरण कराना होगा। ईवाई इंडिया में टैक्स पार्टनर अभिषेक जैन कहते हैं, 'ऐसे पंजीकरण के लिए सबसे पहले एक अस्थायी क्रमांक लेना होगा, जिसके लिए सभी शर्तें पूरी करनी होंगी और उसके बाद उस क्रमांक के स्थान पर जीएसटी प्रणाली के अंतर्गत पंजीकरण का अंतिम प्रमाणपत्र जारी कर दिया जाएगा।'
इसके अलावा कुछ अन्य श्रेणियां हैं, जिनमें आने वाले लोगों को पंजीकरण कराना होगा और रिटर्न भी ऊाइल करना होगा। इनमें एक राज्य से दूसरे राज्य में आपूर्ति करने वाले, स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) करने वाले, ई-कॉमर्स कंपनियां, ई-कॉमर्स कंपनियों के जरिये माल की आपूर्ति करने वाले आपूर्तिकर्ता आदि शामिल हैं।
टैक्समैन डॉट कॉम के महाप्रबंधक नवीन वाधवा के मुताबिक प्रत्येक पंजीकृत डीलर को मासिक बिक्री रिटर्न, मासिक खरीद रिटर्न, मासिक संक्षिप्त रिटर्न और वार्षिक संक्षिप्त रिटर्न दाखिल करने होंगे। कंपोजिशन डीलर को तिमाही में केवल एक बार ही रिटर्न दाखिल करना होगा। उन्होंने कहा, 'कारोबारी को रिटर्न तो दाखिल करना ही पड़ेगा चाहे उस अवधि के दौरान कोई कारोबारी गतिविधि हुई हो अथवा नहीं हुई हो। अगर कोई पंजीकृत कारोबारी किसी वर्ष के दौरान कारोबार नहीं कर रहा है तो उसे अपना जीएसटी पंजीकरण वापस करना होगा ताकि उसे हर महीने जीएसटी रिटर्न दाखिलल करने के पचड़े से बचने का मौका मिल सके।'

कैसे कराएं पंजीकरण?
सरकार ने अप्रत्यक्ष कर में वर्तमान पंजीकरण के स्थान पर जीएसटी के तहत पंजीकरण कराने के लिए अभी 30 अप्रैल 2017 की अंतिम तिथि घोषित की है। ग्रांट थॉर्नटन इंडिया में पार्टनर सुरेश रोहिरा कहते हैं, 'अभी यह साफ नहीं है कि जो लोग आखिरी तारीख तक जीएसटी के तहत अपना पंजीकरण नहीं करा पाए हैं, उन्हें और समय दिया जाएगा या नहीं।' इसके साथ ही ऐसे व्यक्ति को, जो कभी-कभार कर के दायरे में आता हो या कर के दायरे में आने वाले अनिवासी भारतीय को कारोबार शुरू करने से कम से कम पांच दिन पहले पंजीकरण के लिए आवेदन कर देना होगा।
अगर नया पंजीकरण कराया जाता है तो यह ध्यान रखना होगा कि व्यक्ति जिस दिन पंजीकरण के दायरे में आता है, उसके 30 दिन के भीतर उसे राज्य अथवा केंद्रशासित प्रदेश में आवेदन कर देना चाहिए। पंजीकरण के लिए आवेदन करने से पहले व्यक्ति को साझा पोर्टल पर जीएसटी आरईजी-01 फॉर्म खोलकर उसमें अपनी स्थायी खाता संख्या (पैन), मोबाइल फोन नंबर, ई-मेल पता और राज्य या केंद्रशासित प्रदेश का ब्योरा भरना पड़ेगा। समूचे विवरण का सत्यापन होने के बाद एक अस्थायी संदर्भ क्रमांक उस व्यक्ति को मिल जाता है, जो उसके मोबाइल नंबर और ई-मेल पर भेजा जाता है। इस संदर्भ क्रमांक का इस्तेमाल करते हुए आवेदक को जीएसटी आरईजी-01 का भाग बी भरना चाहिए और उसे ऑनलाइन ही भेजना चाहिए। इसके साथ सही हस्ताक्षर होने चाहिए और वे सभी दस्तावेज भी होने चाहिए, जो साझा पोर्टल पर फॉर्म में बताए गए हैं। ये दस्तावेज या तो सीधे भेजने होंगे अथवा इसके लिए आयुक्त द्वारा बताए गए सुविधा केंद्रों का इस्तेमाल किया जा सकता है। आवेदन मिलने पर आवेदक को फॉर्म जीएसटी आरईजी-02 में ऑनलाइन पावती भेज दी जाएगी।
रोहिरा ने कहा, 'जीएसटी साझा पोर्टल इसलिए बनाया गया है ताकि करदाता जीएसटी में पंजीकरण करा सकें। कागजी नामांकन का विकल्प नहीं दिया गया है। यह पोर्टल करदाताओं को अनुपालन संबंधी जरूरतें पूरी करने मसलन रिटर्न दाखिल करने और कर का भुगतान करने में सहायक सिद्घ होगा।'

पंजीकरण नहीं कराया तो?
विशेषज्ञों का कहना है कि जिन नए कारोबारियों ने 30 जनवरी, 2017 के बाद वैट या उत्पाद शुल्क और सेवा कर के तहत अपने पंजीकरण कराए हैं, उन्हें जीएसटी प्रणाली में जाने यानी माइग्रेशन करने का मौका नहीं मिलेगा क्योंकि सरकार ने अभी तक माइग्रेशन के लिए अस्थायी पहचान पत्र मुहैया नहीं कराए हैं। इसलिए इस बात के पूरे आसार हैं कि 30 अप्रैल की मियाद खत्म होने के बाद भी माइग्रेशन की प्रक्रिया चलती रहेगी और उद्यमी तथा पेशेवर जीएसटी में आते रहेंगे।
अच्छी बात यह है कि जीएसटी में आने की तारीख छूट जाए तो भी कारोबारी या पेशेवर पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी। लेकिन यह भी सच है कि देर से पंजीकरण कराने पर नुकसान हो सकता है और उस सूरत में कारोबारी बाहर भेजे गए माल पर चुकाए गए जीएसटी का फायदा अपने ग्राहकों को नहीं दे पाएगा। पीडब्ल्यूसी में टैक्स पार्टनर अभिषेक जैन कहते हैं, 'अगर पंजीकरण नहीं कराए जाने के कारण कर अधिकारी जांच-पड़ताल शुरू करते हैं तो कर अधिकारी ही अपने आप पंजीकरण के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर देंगे और कर संबंधी देनदारी का आकलन भी खुद ही कर डालेंगे।'

कैसे चलेगी यह प्रक्रिया?
आम तौर पर किसी भी कारोबारी को प्रत्येक राज्य के लिए और प्रत्येक पंजीकरण के लिए तीन रिटर्न दाखिल करने होंगे। उनके बाद उसे सालाना रिटर्न भी दाखिल करना होगा। अगर रिटर्न दाखिल नहीं किया जाता है तो हरेक दिन के एवज में 100 रुपये का विलंब शुल्क वसूला जाएगा। हालांकि अधिकतम 5,000 रुपये का जुर्माना ही वसूला जाएगा। रुस्तगी ने कहा, 'जिस राज्य में सालाना रिटर्न नहीं भरा जाता है, वहां कारोबारी से राज्य में उसके कारोबार के 25 फीसदी से भी ज्यादा विलंब शुल्क वसूला जा सकता है।'

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