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विदेशी निवेश की राह होगी और आसान

शुभायन चक्रवर्ती और अरूप रायचौधरी | नई दिल्ली May 28, 2017 10:06 AM IST

एफडीआई

मल्टी ब्रांड खाद्य रिटेल, एकल ब्रांड रिटेल और प्रिंट मीडिया में एफडीआई हो सकता है और उदार
घरेलू उत्पादों से इतर भी मिल सकती है मल्टी ब्रांड रिटेल में मंजूरी
एकल ब्रांड रिटेल में 100 फीसदी एफडीआई की मंजूरी स्वत: मार्ग के जरिये संभव
प्रिंट मीडिया में मौजूदा 26 फीसदी एफडीआई सीमा को बढ़ाकर 49 फीसदी करने पर हो सकता है विचार

विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) को खत्म करने के बाद नरेंद्र मोदी सरकार प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को और उदार बनाने के अगले बड़े कदम की घोषणा जल्द ही कर सकती है। इनमें घरेलू खाद्य उत्पादों के अतिरिक्त अन्य खाद्य उत्पादों के मल्टी-ब्रांड रिटेल में एफडीआई की मंजूरी, एकल ब्रांड रिटेल में स्वत: मार्ग के जरिये 100 फीसदी एफडीआई की मंजूरी के साथ ही साथ प्रिंट मीडिया में एफडीआई की सीमा मौजूदा 26 फीसदी से बढ़ाकर 49 फीसदी की जा सकती है।

सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक एफडीआई पर वित्त मंत्रालय, औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग तथा अन्य मंत्रालयों के बीच अंतर-मंत्रालयी बातचीत लगभग पूरी हो चुकी है। एक अधिकारी ने कहा, 'एफडीआई को और उदार बनाने की बाबत कैबिनेट मसौदे के प्रारूप को सभी संबंधित हितधारकों की राय को शामिल करते हुए अंतिम रूप दिया जा रहा है।'

एक अन्य अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जर्मनी, स्पेन, फ्रांस और रूस के दौरे से वापस लौटने के बाद होने वाली कैबिनेट की बैठक में इस मसले पर विचार किया जा सकता है। खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर बादल 'फूड-प्लस' में एफडीआई की अनुमति देने की वकालत कर रही हैं। पिछले साल जून में सरकार ने ई-कॉमर्स के माध्यम से फूड रिटेल सहित मल्टी-ब्रांड फूड रिटेल में 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति दी थी। हालांकि ऐसे खाद्य उत्पादों का उत्पादन, प्रसंंस्करण या विनिर्माण देश में होना चाहिए।

हालांकि अंतरराष्ट्रीय रिटेल कंपनियों ने अब तक इसमें कम ही दिलचस्पी दिखाई है। उनकी शिकायत है कि 'केवल फूड' स्टोर व्यवहार्य विकल्प नहीं है। सूत्रों ने कहा कि कि बहुराष्ट्रीय रिटेलरों - वॉलमार्ट और फ्रांस की रिटेल दिग्गज ओशान समूह ने संकेत दिए थे कि वह भारत में निवेश कर सकती है, अगर सरकार 'फूड प्लस' यानी खाद्य पदार्थों के साथ अन्य चीजों में एफडीआई की अनुमति दे। हालांकि खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय चाहता है कि रिटेलरों के कुल उत्पादों में 25 फीसदी गैर-फूड उत्पादों की बिक्री की अनुमति दी जाए, वहीं डीआईपीपी सहित अन्य मंत्रालय इससे सहमत नहीं है।

प्रिंट मीडिया में समाचार और समसामयिक प्रकाशित करने वाले समाचारपत्रों एवं पत्रिकाओं में फिलहाल 26 फीसदी एफडीआई की अनुमति है। यह भी मंजूरी के जरिये हासिल है। हालांकि सूत्रों के मुताबिक सरकार इस सीमा को बढ़ाकर 49 फीसदी करने पर विचार कर रही है।

इसके साथ ही एकल-ब्रांड रिटेल में भी एफडीआई को और उदार बनाने पर विचार किया जाएगा। हालांकि इस क्षेत्र में 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति है जिनमें से 49 फीसदी स्वत: मार्ग के जरिये जबकि इससे अधिक निवेश के लिए मंजूरी लेनी पड़ती है। लेकिन सरकार अब 100 फीसदी एफडीआई को स्वत: मार्ग के जरिये निवेश की अनुमति देने पर विचार कर रही है। ऐसा हुआ तो ऐपल और जारा जैसी कंपनियां भारत में अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक इकाइयों के जरिये बिक्री कर सकती हैं। कैबिनेट ने पिछले हफ्ते 25 साल पुराने एफआईपीबी को खत्म करने की मंजूरी दी थी। अब नई व्यवस्था के तहत विदेशी निवेश प्रस्तावों को संबंधित मंत्रालयों द्वारा मंजूरी दी जाएगी। संवेदनशील क्षेत्रों से जुड़े प्रस्तावों को गृह मंत्रालय से भी मंजूरी लेनी होगी।

कीवर्ड FIPB, FDI, investment,

  
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