होम » Investments
«वापस

पैसा आपका, रिटर्न मां-बाप का

तिनेश भसीन |  Jun 04, 2017 09:09 PM IST

फिलहाल शायद ही ऐसी कोई योजना हो, जिसे कोई व्यक्ति अपने माता-पिता की आर्थिक मदद के लिए खरीद सकता हो। नियमों के अनुसार कोई भी संतान न तो अपने माता-पिता को म्युचुअल फंड के यूनिट उपहार में दे सकती है और न ही उनके लिए निवेश पर आधारित कोई बीमा पॉलिसी खरीद सकती है।
जो लोग अपने निवेश का ध्यान रखने के लिए सक्रिय नहीं होना चाहते, उनके लिए यह काम आसान बनाने के मकसद से यूटीआई म्युचुअल फंड ने एक सुविधा - यूटीआई फैमिली (फादर ऐंड मदर आई लव यू) शुरू की है, जिसमें निवेशक अपने नाम से म्युचुअल फंड के यूनिट खरीद सकते हैं। इन इकाइयों पर जो भी प्रतिफल मिलेगा, वह सीधे उनके माता-पिता के बैंक खाते में जाएगा। इस तरह वे अपने माता-पिता की आर्थिक मदद कर सकते हैं और इसके लिए उन्हें लगातार पैसे भी नहीं भेजने पड़ते।
यूटीआई म्युचुअल फंड ने दो योजनाएं चालू की हैं - यूटीआई एमआईएस एडवांटेज प्लान (यूएमैप) और यूटीआई वेल्थ बिल्डर फंड (यूडब्ल्यूबीएफ)। पहली योजना मासिक निवेश योजना (एमआईपी) है, जिसमें 25 फीसदी तक रकम इक्विटी में और बाकी रकम डेट योजनाओं में लगाई जाती है। पिछले एक साल के दरम्यान इस फंड की श्रेण्ी के अन्य फंडों ने औसतन 12.10 फीसदी प्रतिफल दिया है और इस फंड का प्रतिफल 11.83 फीसदी रहा है। दूसरी योजना यानी वेल्थ बिल्डर परिसंपत्ति आवंटन फंड है, जिसमें कम से कम 65 फीसदी रकम इक्विटी में डाली जाती है और बाकी रकम डेट योजनाओं तथा गोल्ड एक्सचेंज में ट्रेडिंग वाले फंडों में लगाई जाती है। इस फंड ने पिछले एक साल के दौरान 15.38 फीसदी प्रतिफल दिया है।
यूटीआई म्युचुअल फंड के उत्पाद प्रमुख आर राजा कहते हैं, 'एमआईपी से बैंकों की स्थायी जमा (एफडी) या डेट फंड की तुलना में बेहतर प्रतिफल मिलता है। परिसंपत्ति आवंटन यानी ऐसेट ऐलोकेशन फंड से कर बचाने में ज्यादा सहूलियत होती है, इसीलिए इसे इक्विटी फंड की श्रेणी में डाला गया है।' यूडब्ल्यूबीएफ में यूमैप के मुकाबले अधिक जोखिम हो सकता है और अधिक उतार-चढ़ाव भी आ सकता है क्योंकि इक्विटी में अधिक रकम आवंटित की जा रही है। लेकिन इसी की वजह से लंबी अवधि में यह योजना निवेशक को बेहतर प्रतिफल भी दे सकती है।
अगर कोई व्यक्ति अपने माता-पिता को नियमित आय दिलाना चाहता है तो उसे इनमें से किसी एक फंड में निवेश करना होगा और व्यवस्थित निकासी योजना (एसडब्ल्यूपी) चुनना होगा। आपके माता-पिता को हर महीने जितनी भी रकम निकालने की जरूरत पड़ती है, आप इसमें वह रकम निर्धारित कर सकते हैं। निवेश के समय अपने बैंक खाते का ब्योरा देने के बजाय निवेशक को अपने माता या पिता के बैंक खाते का विवरण देना पड़ता है। इसमें कागजी कार्रवाई भी कुछ ज्यादा करनी पड़ती है क्योंकि माता-पिता में से जिसके भी बैंक खाते का ब्योरा दिया जाता है, निवेशक के साथ-साथ उसे भी नो योर कस्टमर (केवाईसी) की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। निवेशक को लाभार्थी के साथ अपने रिश्ते का प्रमाण भी पेश करना पड़ता है।
जानकारों का कहना है कि यूटीआई म्युचुअल फंड की यह सुविधा उन लोगों के लिए काम की होती है, जो अपने निवेश की नियमित रूप से खबर लेने के पचड़े में नहीं पडऩा चाहते। वाइजइन्वेस्ट एडवाइजर्स के मुख्य कार्याधिकारी हेमंत रुस्तगी कहते हैं, 'सक्रिय निवेशक अपने कुल पोर्टफोलियो के एक हिस्से से भी अपने माता-पिता की वित्तीय मदद कर सकते हैं। निवेश की रकम, अवधि और फंडों के आधार पर वे या तो इक्विटी डाइवर्सिफाइड फंड में अलग से रकम लगा सकते हैं और चाहें तो डेट फंड में भी रकम लगा सकते हैं क्योंकि ये दोनों फंड लगातार सधा हुआ प्रदर्शन करते रहे हैं।' रुस्तगी का यह भी कहना है कि अगर रकम बड़ी है तो कई बार लाभांश का विकल्प चुनना भी कारगर और बेहतर साबित हो सकता है। एसडब्ल्यूपी मूलधन में सेंध लगा सकती है क्योंकि किसी भी म्युचुअल फंड योजना में लगातार एकसमान प्रतिफल हासिल नहीं होता है। इस योजना में रकम तभी लगानी चाहिए, जब किसी फंड के लाभांश से होने वाली प्राप्ति रकम की जरूरत पूरी नहीं कर पाती है।
कर विशेषज्ञों का कहना है कि इन योजनाओं में निवेश संतान के नाम पर होता है, इसलिए आयकर भी उसी को भरना पड़ता है। माता-पिता को जो रकम मिलेगी, वह उपहार मानी जाएगी, इसलिए उस पर कोई कर नहीं लगेगा। एमआईएस एडवांटेज योजना में यदि तीन साल की अवधि पूरी होने से पहले ही एसडब्ल्यूपी के जरिये निकासी शुरू कर दी गई तो उसे निवेश की आय में जोड़ दिया जाएगा। तीन साल बाद निकासी हुई तो इंडेक्सेशन के साथ 20 फीसदी का आंकड़ा होगा। वेल्थ बिल्डर फंड में साल भर के बाद निकासी हुई तो कोई कर नहीं लगेगा, लेकिन पहले साल में ही रकम निकासी होने पर 15 फीसदी कर देना होगा। पीडब्ल्यूसी इंडिया में पार्टनर एवं लीडर (व्यक्तिगत कर) कुलदीप कुमार कहते हैं, 'चूंकि इकाइयां निवेशक के नाम पर होती हैं माता-पिता के नाम पर नहीं, इसलिए कोई अन्य कानूनी वारिस उन पर अपना दावा नहीं कर सकता।
लेकिन यदि वह व्यक्ति धन अपने माता-पिता को बतौर उपहार दे दिया जाए और उसके बाद रकम को माता-पिता के नाम पर ही निवेश कर दिया जाए तो दिक्कत हो सकती है।'

कीवर्ड mutual fund, uti, parents,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक