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दबाव के बाद हालात में आया बदलाव

शीतल अग्रवाल |  Jun 04, 2017 09:14 PM IST

पिछले कुछ वर्षों में कीमत-आधारित वृद्घि या प्राप्तियों में लगातार दबाव के बाद भारतीय कंपनियों के लिए हालात में बदलाव आता दिख रहा है। मार्च तिमाही (चौथी तिमाही) में कई कंपनियों का राजस्व हाल के समय की तुलना में मजबूत प्राप्तियों पर केंद्रित रहा। जिन 31 बड़ी कंपनियों के लिए बिक्री वृद्घि और प्राप्ति वृद्घि के बीच घरेलू राजस्व के आंकड़े उपलब्ध हैं, उनमें से 20 ने इन मोर्चों पर दो फीसदी से अधिक की वृद्घि दर्ज की है, जबकि जून 2016 की तिमाही में यह इन कंपनियों की तादाद महज 9 थी। इस्पात, सीमेंट, कंज्यूमर स्टैपल्स और वाहन क्षेत्रों की कंपनियों ने चौथी तिमाही में प्राप्तियों में मजबूत वृद्घि दर्ज की है।
उदाहरण के लिए, इस्पात में, ऊंचे न्यूनतम आयात मूल्य के लिए सरकारी उपायों से जेएसडब्ल्यू स्टील और टाटा स्टील को मूल्य निर्धारण में मदद मिली। ये सस्ते कच्चे माल खरीदने में सक्षम थीं जिससे उन्हें बिक्री में दो अंकों की वृद्घि में मदद मिली। बढ़ती उत्पादन लागत कंज्यूमर स्टैपल कंपनियों द्वारा कीमत वृद्घि के लिहाज से प्रमुख कारक थी। हिंदुस्तान यूनिलीवर, गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्ïस, ब्रिटानिया और आईटीसी (सिगरेट) अपनी बिक्री वृद्घि की रफ्तार को नोटबंदी से पहले जैसी बनाने और प्राप्तियों में सुधार लाने में सफल रहीं।
वाहन क्षेत्र में, प्रीमियम और अधिक-मार्जिन वाले उत्पादों की भागीदारी में लगातार वृद्घि से मारुति सुजूकी और महिंद्रा ऐंड महिंद्रा की प्राप्तियों को ताकत मिली, वहीं अशोक लीलैंड जैसी कुछ कंपनियों ने कीमत वृद्घि का भी सहारा लिया। प्राप्तियों में सुधार सराहनीय है, क्योंकि तिमाही में बीएस-4 मानकों के अनुरूप बदलाव की वजह से भारी डिस्काउंट भी देखा गया।
टाइटन कंपनी ने भी मजबूत प्राप्ति वृद्घि दर्ज की। कंपनी ने नए कलेक्शन लॉन्च किए और वह शादियों के सीजन, असंगठित क्षेत्र से ग्राहकों को जोडऩे और अपनी 'गोल्डन हार्वेस्ट' स्कीम के लिए मिली शानदार प्रतिक्रिया की वजह से अपना आधार बढ़ाने में भी सफल रही। ऐम्बिट इंस्टीट्ïयूशनल इक्विटीज के इक्विटी प्रमुख प्रमोद गुब्बी कहते हैं, 'क्षमता विस्तार की लंबी अवधि के बाद, हम सीमेंट क्षेत्र में समेकन पर जोर दे रहे हैं, जिसकी वजह से नई क्षमता वृद्घि सुस्त पड़ गई है। साथ ही कुछ खास क्षेत्रों- आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और पूर्वोत्तर और पूर्व में मांग के संदर्भ में सकारात्मक संकेत दिखे हैं। क्षमता वृद्घि और मांग में सुधार को लेकर ठहराव की स्थिति से मूल्य निधारण में तेजी आई है।'
एसीसी, अल्ट्राटेक और अंबुजा सीमेंट ने बिक्री को प्रभावित किए बगैर मजबूत प्राप्ति वृद्घि दर्ज की है। मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज का मानना है कि कंपनियों के स्टॉक की बिक्री वृद्घि 11 तिमाहियों की ऊंचाई पर है।
शेष 11 कंपनियों में से तीन - अपोलो टायर्स, टीवीएस मोटर और एशियन पेंट्ïस ने प्राप्तियों में सपाट वृद्घि (0.2 फीसदी) दर्ज की है। अन्य कंपनियों ने 1 से 5 फीसदी की गिरावट दर्ज की। दूरसंचार कंपनियों भारती एयरटेल और आइडिया ने वॉयस और डेटा प्राप्तियों दोनों में दो अंक की भारी गिरावट दर्ज की। इन कंपनियों को रिलायंस जियो की पेशकश से दबाव का सामना करना पड़ा है। इन कंपनियों को बिक्री में गिरावट से जूझना पड़ा। चूंकि इस क्षेत्र को सितंबर से ही दबाव का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन ये रुझान तुलना योग्य नहीं हैं और खपत संबंधी मांग में इन रुझानों का असर नहीं दिखा है।
भविष्य में, निवेशक मजबूत प्राप्ति वृद्घि के इस रुझान की निरंतरता पर नजर रखेंगे। विश्लेषकों का मानना है कि वाहन क्षेत्र में बढ़त का रुझान और सीमित क्षमता विस्तार (सीमेंट में) के साथ मांग में सुधार बरकरार रहने की संभावना है क्योंकि ये कंपनियां लगातार मजबूत प्राप्ति वृद्घि दर्ज कर सकती हैं। उत्पादन लागत स्थिर रहने से उपभोक्ता खाद्य कंपनियां मूल्य निर्धारण और बिक्री के बीच संतुलन बनाने पर जोर दे सकती हैं और ब्रांड निर्माण, नवाचार और बिक्री वृद्घि के साथ साथ बाजार भागीदारी बढ़ाने के अन्य प्रयासों पर पुन: निवेश कर सकती हैं। जीएसटी की पेशकश से अल्पावधि दबाव की वजह से ये कंपनियां इस अवधि में कीमत वृद्घि नहीं कर सकती हैं।
ऐम्बिट इंस्टीट्ïयूशनल इक्विटीज के गुब्बी का कहना है, 'सुधार के कुछ सकारात्मक संकेत दिखे हैं। तिमाही में सुधार की रफ्तार और कंपनियों की मूल्य निर्धारण ताकत में इजाफा हुआ है, लेकिन यह देखना जरूरी है कि यह सुधार कितना टिकाऊ है।'

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