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प्रौद्योगिकी और आप: डिजिटल निवेश से रकम बचेगी जनाब

प्रिया नायर |  Jun 11, 2017 08:01 PM IST

प्रौद्योगिकी से बचत करने वालों और निवेश करने वालों की कई तरह से मदद हो रही है। लागत में कमी और उसकी वजह से प्रतिफल में बढ़ोतरी उसका स्पष्टï उदाहरण है। अगर आप किसी म्युचुअल फंड हाउस की वेबसाइट पर जाते हैं और प्रत्यक्ष योजना यानी डायरेक्ट प्लान के रूप में म्युचुअल फंड खरीद लेते हैं तो आपके खर्च में नियमित यानी रेग्युलर प्लान की तुलना में 100 आधार अंक की बचत हो सकती है। साल-दर-साल 100 आधार अंक की बचत होती जाए तो प्रतिफल में बहुत बढ़ोतरी हो सकती है।

 
यदि आपने 10 फीसदी सालाना का प्रतिफल देने वाली किसी इक्विटी योजना में 1 लाख रुपये का एकमुश्त निवेश किया है तो 5 साल बीतने के बाद डायरेक्ट प्लान में रकम लगाने वाले निवेशक को 1.46 लाख रुपये मिलेंगे, जबकि रेग्युलन प्लान के निवेशक को 1.37 लाख रुपये ही मिलेंगे। इस तरह डायरेक्ट प्लान वाले निवेशक को 9,000 रुपये अधिक मिलेंगे। 15 वर्ष बीत जाएंगे तो यही अंतर 60,000 रुपये से भी ज्यादा हो जाएगा। इसकी सीधी वजह यह है कि डायरेक्ट और रेग्युलर प्लान की लागत में 125 आधार अंक का फर्क होता है। बात सिर्फ खर्च में कमी और प्रतिफल में इजाफे की ही नहीं है, प्रौद्योगिकी ने जिंदगी को कई तरह से आसान बना दिया है।
 
प्रौद्योगिकी ने बढ़ाई सहूलियत
 
बचतकर्ताओं को प्रौद्योगिकी से बहुत अधिक फायदा मिला है। पहले किसी बैंक में सावधि जमा यानी एफडी खोलने के लिए निवेशक को बैंक की शाखा तक जाना पड़ता था और फॉर्म भरने पड़ते थे। लेकिन आज बैंक की वेबसाइट पर महज एक क्लिक कर आप एफडी शुरू कर सकते हैं और अपने बचत खाते में पड़ी रकम उसमें डाल सकते हैं। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) लगभग पूरी तरह डिजिटल हो गया है। आप इसकी वेबसाइट पर जाकर देख सकते हैं कि आपके पीएफ खाते में कितनी रकम है। सेवानिवृत्ति के बाद रकम हासिल करने के लिए आप ऑनलाइन क्लेम सेटलमेंट भी घर बैठे शुरू करा सकते हैं। यह सुविधा मई में ही शुरू हुई है। ईपीएफओ की योजना यह है कि जिन ईपीएफ खातों को आधार और बैंक खातों से जोड़ दिया गया है, उनके दावों का निपटान आवेदन मिलने के तीन घंटे के भीतर कर दिया जाएगा।
 
जर्मिनेट वेल्थ सॉल्युशंस के संस्थापक एवं मैनेजिंग पार्टनर संतोष जोसफ कहते हैं, 'प्रौद्योगिकी गहन जानकारी प्रदान करती है, जिससे फैसले लेते समय कोई पूर्वग्रह नहीं बचता है, कम खर्च वाले तरीके से जरूरी सूचना प्राप्त करने में आसानी होती है और सूचना हासिल करना भी आसान होता है क्योंकि केवल एक क्लिक पर उसे कहीं भी किसी भी समय देखा जा सकता है। प्रौद्योगिकी से निवेशक देख सकता है कि मामला कहां तक बढ़ा है और उसे अपने निवेश पर नजर रखने में भी मदद मिलती है।'
 
जो लोग यह जानना चाहते हैं कि उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद कितनी रकम की जरूरत होगी तो वे ऑनलाइन कैलकुलेटर का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो हर समय उपलब्ध हैं। ये ऑनलाइन कैलकुलेटर बताते हैं कि आपको हर महीने कितनी बचत करने की जरूरत है। एल्गोरिदम से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि आपको अपनी उम्र, आय, जीवन के लक्ष्य आदि के आधार पर विभिन्न परिसंपत्ति वर्गों में कितना निवेश करना चाहिए। इसके अलावा म्युचुअल फंड जैसी निवेश योजनाओं के लिए कई वेबसाइट भी मौजूद हैं, जो फंड के पिछले प्रदर्शन, प्रतिफल, रेटिंग जैसी जानकारी के आधार पर सही योजनाओं का चयन करने में निवेशक की मदद करती हैं।
 
इसी तरह बीमा एग्रीगेटर वेबसाइटें भी हैं, जो जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा पॉलिसयों के विभिन्न विकल्प मुहैया कराती हैं। वे यह भी बताती हैं कि सबसे कम प्रीमियम किन योजनाओं का है और सबसे अधिक प्रीमियम किनका है। पॉलिसीबाजार डॉटकॉम के मुख्य कार्याधिकारी एवं सह-संस्थापक याशीष दहिया कहते हैं, 'एक समय था, जब आपको बीमा के प्रीमियम का अंदाजा लगाने के लिए कंपनी से पूछना पड़ता था और जानकारी हासिल करने में आपको दो से तीन दिन लग जाते थे। लेकिन अब आप एक साथ 30 कंपनियों के बारे में जानकारी तुरंत हासिल कर सकते हैं। इससे ग्राहकों को बहुत आसानी हो गई है और वे खुद ही सही बीमा पॉलिसी चुन सकते हैं।' विभिन्न बैंकों की वेबसाइटों पर जाने के बजाय आप लोन एग्रीगेटर वेबसाइट पर जाइए। वहां आपको फौरन पता चल जाएगा कि किस बैंक की ब्याज दर आपकी कर्ज संबंधी जरूरतों के लिए सबसे सही है या किसी खास अवधि के लिए जमा पर सबसे उम्दा ब्याज कौन सा बैंक दे रहा है।
 
'प्रौद्योगिकी आपके साथ' सुविधा के लिए प्रौद्योगिकी
 
वे दिन लद गए जब आपको अपने पास पासबुक रखनी पड़ती थी या खाते का ब्योरा यानी स्टेटमेंट निकलवाने के लिए बैंक की शाखा तक जाना पड़ता था। म्युचुअल फंड के लिए या क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट के लिए बैंक जाना भी गुजरे जमाने की बात है। अब सब कुछ आपके ई-मेल इनबॉक्स में आ जाता है। जब आपको रिटर्न दाखिल करना हो तो उन्हें अटैच करें और आयकर विभाग को भेज दें। भारत में केपीएमजी के वित्तीय सेवा पार्टनर एवं प्रमुख नरेश मखीजानी कहते हैं, 'म्युचुअल फंड की यूनिट बेचने के लिए कागजी फॉर्म भरने और उसके बाद क्षेत्रीय कार्यालय तक जाने के किस्से भी पुराने पड़ गए हैं। अब ऑनलाइन केवाईसी है, जिसकी वजह से खरीद और बिक्री भी घर बैठे ऑनलाइन की जा सकती है। इससे निवेशक में यह भरोसा जगा है कि वह खुद भी निवेश कर सकता है।' 
 
खर्च घटाने के लिए प्रौद्योगिकी
 
यह हर किसी के लिए शायद सबसे बड़ा वरदान साबित हुआ है। कंपनियां भी लागत के पहलू को ध्यान में रखते हुए ही ऑनलाइन विकल्पों पर जोर दे रही हैं। एगॉन लाइफ इंश्योरेंस ने पिछले साल एजेंसियों के जरिये कारोबार खत्म ही कर दिया और अब वह सीधे ग्राहक तक पहुंचने के मॉडल पर काम कर रही है। एगॉन लाइफ इंश्योरेंस के मुख्य डिजिटल अधिकारी मार्टिन डी जोंग कहते हैं, 'हम फेसबुक, गूगल, ईमेल और यूटï्यूब जैसे डिजिटल माध्यमों के जरिये ऑनलाइन ग्राहकों तक पहुंच रहे हैं। हम ऐसी सामान्य योजनाएं पेश करते हैं, जिन्हें समझना और खरीदना बहुत आसान होता है। इसके अलावा ऑनलाइन ग्राहकों को आम तौर पर बहुत अधिक जानकारी होती है क्योंकि वे पहले ही अच्छी खासी जांच-पड़ताल कर चुके होते हैं। हम अपनी वेबसाइट और टेलीसेल्स सलाहकारों के जरिये बेहद स्पष्टï और पारदर्शी सलाह देते हैं।'
 
दो हफ्ते पहले ही एको जनरल इंश्योरेंस को भारत में सामान्य बीमा कारोबार शुरू करने के लिए नियामकीय मंजूरी मिली है। एको स्वतंत्र सामान्य बीमा कंपनी के तौर पर काम करेगी और उसका पूरा कामकाज डिजिटल तरीके से ही होगा। ग्राहकों को इससे उसी तरह की बड़ी बचत हो सकती है, जैसी लेख के आरंभ में म्युचुअल फंड के उदारहण में दिखाई गई है। टर्म प्लान जैसी ऑनलाइन बीमा योजनाओं की खरीदारी के मामले में भी दोहरा फायदा हो सकता है। आम तौर पर ऑनलाइन टर्म प्लान किसी भी ऑफलाइन यानी सामान्य प्लान की तुलना में 30-40 फीसदी सस्ते होते हैं। इसलिए आपको वही पॉलिसी कम रकम में मिल सकती है या आपको उसी रकम में अधिक बीमित रकम हासिल हो सकती है।
 
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