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टायर कंपनियों के शेयरों में आ सकती है चमक

राम प्रसाद साहू |  Jun 11, 2017 08:08 PM IST

एमआरएफ के नेतृत्व में टायर शेयरों ने शुक्रवार को 52 सप्ताह का नया ऊंचा स्तर बनाया। प्राकृतिक रबर कीमतों, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, मूल्य निर्धारण के मोर्चे पर मजबूती आने से इन कंपनियों के राजस्व और मुनाफे को ताकत मिली है। शेयर बाजार में 72,835 रुपये के साथ सर्वाधिक कीमत वाला शेयर और टायर क्षेत्र में बाजार पूंजीकरण के लिहाज से भी दिग्गज एमआरएफ ने 2.6 फीसदी की तेजी दर्ज की और नई ऊंचाई को छुआ। एमआरएफ के अलावा सिएट, बालकृष्ण इंडस्ट्रीज, अपोलो और जेके टायर इंडस्ट्रीज जैसे टायर शेयरों ने भी पिछले सप्ताह के दौरान अपने सर्वाधिक ऊंचे स्तर बनाए।

 
तेजी में प्रमुख योगदान प्राकृतिक रबर कीमतों का है जिनमें अप्रैल के ऊंचे स्तर के बाद से लगभग 19 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। इससे राहत मिली है क्योंकि रबर कीमतें मार्च तिमाही में काफी बढ़ गई थीं और कंपनियों को अपनी कीमतें बढ़ाने के लिए बाध्य होना पड़ा था। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भी टायर कंपनियों के लिए सकारात्मक है क्योंकि टायर उत्पादन में क्रूड ऑयल डेरिवेटिव्स का इस्तेमाल होता है। टायर कंपनियों के लिए इनकी लागत में लगभग 70 प्रतिशत योगदान रबर का होता है और रबर की कीमतों में गिरावट से मार्जिन में सुधार आया है। 
 
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के विश्लेषकों ने एक ताजा रिपोर्ट में कहा है कि टायर सेक्टर कम पीई मल्टीपल पर कारोबार कर रहा है और इस क्षेत्र के लिए रेटिंग में बदलाव की गुंजाइश बनी हुई है। उनका मानना है कि प्रतिस्पर्धी तीव्रता घटने से कंपनियों को सभी चक्रों में मार्जिन सुधारने में मदद मिली है जिससे रेटिंग में बदलाव की संभावना बढ़ी है। टायर कंपनियों ने पिछले तीन महीनों के दौरान कई बार कीमत वृद्घि का सहारा लिया। यह इसलिए भी संभव था क्योंकि चीनी आयात पिछले स्तर से घटकर आधा रह गया। खासकर नोटबंदी के बाद इसमें गिरावट आई और भारतीय कंपनियों के लिए मूल्य निर्धारण ताकत बढ़ाने में मदद मिली।
 
सामान्य मॉनसून की उम्मीद और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मजबूती को देखते हुए वाहन कंपनियों से मांग में सुधार से इस क्षेत्र को बिक्री वृद्घि की रफ्तार को मजबूत बनाए रखने में मदद मिलेगी। जहां अमार राजा अपने वित्त वर्ष 2019 के अनुमानों के 20 गुना पर कारोबार कर रहा है, वहीं अपोलो टायर्स 12 गुना पर कारोबार कर रहा है। विश्लेषकों के अनुसार अपोलो टाइगर्स के लिए तेजी की वजह हंगरी में संयंत्र के विस्तार और बाजार भागीदारी में बढ़ोतरी की वजह से बेहतर यूरोपीय प्रदर्शन है। वहीं जेके टायर के लिए चेन्नई संयंत्र की शुरुआत सकारात्मक है और इसे कीमत वृद्घि से भी मुनाफे को मजबूत बनाने में मदद मिलनी चाहिए। फिलिप कैपिटल के विश्लेषकों का मानना है कि सिएट को रबर कीमतों में नरमी और दोपहिया सेगमेंट में सुधार से मार्जिन बढ़ाने में मदद मिलेगी। 
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