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'भारत उभरती अर्थव्यवस्थाओं में एक मजबूत देश है'

समी मोडक |  Jun 11, 2017 08:10 PM IST

मॉर्गन स्टैनली में एशिया और उभरते बाजारों के इक्विटी रणनीतिकार और प्रमुख जोनाथन गार्नर का कहना है कि भारत एशियाई बाजारों में पसंदीदा दांव में से एक है। समी मोडक के साथ साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि भारत समेत वैश्विक बाजारों का प्रदर्शन अगले साल के दौरान मजबूत रहेगा। पेश हैं मुख्य अंश: 

 
वैश्विक तेजी को लेकर आपका क्या नजरिया है?
 
मजबूत वैश्विक आर्थिक सुधार और आय वृद्घि की वजह से दुनियाभर में इक्विटी बाजार मजबूत हो रहे हैं। इनमें भारत समेत कुछ बाजार दूसरों की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ रहे हैं। हमारा मानना है कि वैश्विक बेंचमार्क ऑल-कंट्री वल्र्ड इंडेक्स के लिए कॉरपोरेट आय सालाना आधार पर 18 फीसदी के दायरे में बढ़ेगी। 
 
भारतीय शेयरों में 6 महीने में 20 फीसदी की तेजी दर्ज की गई है। अब निवेशकों को बाजार को लेकर किस तरह का कदम उठाना चाहिए?
 
हम बाजार में तेजी को पसंद कर रहे हैं, लेकिन यह पिछले 6 महीने में 20 फीसदी का मजबूत प्रतिफल पहले ही दे चुका है। प्रतिफल अगले 6 महीनों के दौरान घटकर 10 फीसदी के आसपास रह जाएगा। उम्मीद है कि हम आय में तेजी बरकरार रहेगी। यदि स्थिति में कमजोरी आनी शुरू होती है तो हम निवेशकों को बताएंगे। कम से कम इस साल की दूसरी छमाही तक हमें इसकी आशंका नहीं है। निवेशकों को इस पर नजर रखने की जरूरत होगी कि केंद्रीय बैंक, खासकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व क्या कदम उठाता है। 
 
भारत ने आय और अर्थव्यवस्था में बड़ा सुधार दर्ज नहीं किया है। इस बारे में आपकी क्या प्रतिक्रिया है? 
 
कॉरपोरेट आय सुधार दर्ज कर रही है। लेकिन बड़ी संख्या में समस्याएं भी पैदा हुई हैं जिनसे आय प्रभावित हुई है। नोटबंदी इनमें एक है। लेकिन भविष्य में हम बेहद मजबूत आय वृद्घि देखेंगे। मार्च में समाप्त हो रहे वर्ष 2018 में आय 18 फीसदी की दर से वृद्घि दर्ज करेगी। इसलिए अपने आय अनुमानों के 16.5 गुना पर, आप 34,000 का सेंसेक्स का लक्ष्य निर्धारित कर सकते हैं। हमारा यह भी मानना है कि रुपया यदि मजबूत नहीं हुआ तो कम से कम स्थिर बना रहेगा। 
 
सरकार ने तीन साल पूरे किए हैं। सरकार के बारे में आपका क्या आकलन है?
 
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) जैसी कुछ ठोस उपलब्धियां हासिल की गई हैं। विदेशी निवेशक नोटबंदी को लेकर चिंतित रहे हैं, लेकिन यह जरूरी था। भूमि अधिग्रहण नियमन में सुधार आया है। विदेशी प्रत्यक्ष निवेश में बड़ा सुधार आया है। राजकोषीय स्थिति ढांचागत तौर पर सुधरी है। काफी कुछ प्रयास अभी किए जाने की जरूरत है। हमने बड़े पैमाने पर निजीकरण नहीं देखा है। मैं यह समझता हूं कि कुछ क्षेत्रों में यह चुनौतीपूर्ण क्यों हो सकता है। भ्रष्टïाचार के खिलाफ कुछ उपाय किए गए हैं, लेकिन इनमें तेजी लाए जाने की जरूरत होगी। हालात में सुधार का प्रमाण यह है कि चालू खाते का घाटा काफी कम है। राजकोषीय घाटा और महंगाई अब नियंत्रण में हैं। बचत दर मजबूत हो रही है। भारतीय वृहद ढांचा अब उभरते बाजारों के वर्ग में सबसे ज्यादा मजबूत है।
 
वैश्विक निवेशकों में भारत के बारे में किस तरह की आशंकाएं हैं?
 
भारत के बारे में निवेशक धारणा सकारात्मक है। यहां नोटबंदी के प्रभाव को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। हमारा मानना है कि वृद्घि की रफ्तार तेजी से वापसी करेगी। साथ ही कुछ निवेशक इसे लेकर चिंतित हैं कि आय में तेजी नहीं आ रही है। वे भारत के मूल्यांकन को लेकर बहुत ज्यादा चिंतित नहीं हैं। कुछ निवेशक निर्यात समस्याओं को लेकर भी चिंतित हैं।
 
आप किन क्षेत्रों पर सकारात्मक हैं?
 
ऐसे कई प्रमुख क्षेत्र हैं जिन्हें हम पसंद करते हैं। इनमें फाइनैंशियल, कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी, इंडस्ट्रियल और टेक्नोलॉजी मुख्य रूप से शामिल हैं। मध्य वर्ग का लगातार शहरीकरण कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी क्षेत्र के लिए अच्छा होगा। फाइनैंशियल घटते फंसे कर्ज और मजबूत होती ऋण वृद्घि की रफ्तार की वजह से अच्छी स्थिति में है। वहीं टेक्नोलॉजी को लेकर हम 'कॉन्ट्रा कॉल' की स्थिति में हैं। 
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