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बैंकिंग म्युचुअल फंड रहे कमाई में आगे

चंदन किशोर कांत |  Jun 11, 2017 08:10 PM IST

मजबूत म्युचुअल फंड (एमएफ) कंपनियों के बैंकिंग क्षेत्र के थीमेटिक फंडों ने पिछले एक साल के दौरान निवेशकों को अच्छी कमाई का मौका दिया है। जहां प्रमुख सूचकांकों का प्रतिफल लगभग 17 फीसदी रहा वहीं बैंकिंग फंडों ने निवेशकों को 38 फीसदी का प्रतिफल दिया। प्रमुख इक्विटी फंड प्रबंधक इस क्षेत्र को लेकर सकारात्मक रहे हैं। निजी और सरकारी बैंकों, दोनों से अपने पसंदीदा शेयरों से उन्हें अपने पोर्टफोलियो का प्रतिफल बेहतर बनाने में मदद मिली है। बैंकिंग फंड न सिर्फ प्रमुख सूचकांकों को मात देने में कामयाब रहे हैं बल्कि एमएफ की मिड-कैप और स्मॉल-कैप श्रेणियों की तुलना में भी बेहतर प्रदर्शन दर्ज करने में सफल रहे हैं।

 
मौजूदा समय में 16 बैंकिंग फंड हैं। इनमें प्रमुख हैं कोटक बैंकिंग ईटीएफ फंड (3,277 करोड़ रुपये), रिलायंस बैंकिंग फंड (2,707 करोड़ रुपये), आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल बैंकिंग एंड फाइनैंशियल सर्विसेज फंड (1,840 करोड़ रुपये) और बिड़ला सन लाइफ बैंकिंग एंड फाइनैंशियल सर्विसेज फंड (1,100 करोड़ रुपये)। जहां बैंकिंग फंडों का श्रेणी औसत प्रतिफल 38 फीसदी था, वहीं इनमें से कई ने स्टैंडएलोन आधार पर बेहतर प्रदर्शन किया। उदाहरण के लिए, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल से बैंकिंग फंड ने 53 फीसदी का सर्वाधिक प्रतिफल दिया, जिसके बाद कोटक पीएसयू बैंक ईटीएफ ने 45.5 फीसदी का प्रतिफल दर्ज किया। एचडीएफसी एमएफ के मुख्य निवेश अधिकारी (सीआईओ) प्रशांत जैन इस सिद्घांत में विश्वास रखते हैं कि यदि कोई अर्थव्यवस्था अच्छा प्रदर्शन करती है तो बैंक भी अच्छा प्रदर्शन करते हैं। उन्हें सार्वजनिक क्षेत्र के कुछ बैंकों, खासकर एसबीआई में बड़े निवेश के लिए जाना जाता है। 
 
वह कहते हैं, 'सार्वजनिक क्षेत्र के बड़े बैंकों ने बाजार हिस्सेदारी में बड़ी कमी दर्ज नहीं की है, जो उस नजरिये के विपरीत है जिसे हम हर दिन सुन रहे हैं। किसी भी मामले में, बैंकिंग क्षेत्र में बाजार भागीदारी बहुत ज्यादा महत्त्वपूर्ण नहीं है। परिसंपत्ति गुणवत्ता की समस्या निजी कॉरपोरेट बैंकों के समान हो गई है। मेरी नजर में, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने इस समस्या को पहले ही पहचान लिया। परिसंपत्ति बिक्री के जरिये दबाव घटाया जा रहा है। दबाव से जूझ रहे कई समूह नकदी की कमी से जूझ रहे हैं, लेकिन परिसंपत्तियों के लिहाज से संपन्न हैं।'
एसबीआई का शेयर फरवरी 2016 के निचले स्तर से दोगुना हो गया है और एक साल में यह 44 फीसदी तक मजबूत हुआ। वहीं बैंक ऑफ बड़ौदा ऐसा अन्य सरकारी बैंक है जिसका शेयर 25 प्रतिशत तक चढ़ा है। 
 
इन शेयरों में इस तरह की तेजी के साथ क्या निवेशक इन योजनाओं में निवेश बरकरार रखकर लगातार प्रतिफल हासिल कर सकते हैं? फंड प्रबंधक अल्पावधि के संदर्भ में इसे लेकर आश्वस्त नहीं हैं। हालांकि उनका कहना है कि यदि निवेशक उचित तौर पर लंबी निवेश अवधि (तीन से पांच साल) का चयन करता है तो यह इन शेयरों में तेजी की शुरुआत है। रिलायंस निप्पॉन एमएफ में मुख्य निवेश अधिकारी (इक्विटी) सुनील सिंघानिया कहते हैं, 'हम वित्तीय स्थिति को लेकर सकारात्मक हैं। यह ऐसा समय है जब निजी ऋणदाता अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं समय समय पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया है। बैंकों की सहायक इकाइयां भी इस क्षेत्र में बड़ी वैल्यू जोड़ रही हैं। तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था में, फाइनैंशियल सेगमेंट में मजबूती आएगी। मौजूदा स्तर पर, मूल्यांकन में और तेजी की गुंजाइश है।' फंड प्रबंधकों के पोर्टफोलियो में कई शीर्ष बैंकों के नाम टॉप-20 शेयरों में शामिल हैं। एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, इंडसइंड बैंक और येस बैंक पिछले साल के दौरान फंड प्रबंधकों की खरीदारी सूची में शीर्ष पर बने रहे। एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक में एक साल में 40 फीसदी और 31 फीसदी की तेजी आई है। 
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