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अपने निवेश पोर्टफोलियो को कैसे बनाएं मजबूत

संजय कुमार सिंह |  Jun 11, 2017 08:11 PM IST

मौजूदा समय में इक्विटी बाजारों में मूल्यांकन दीर्घावधि औसत के लिए महंगा है और मिड- और स्मॉल-कैप सेगमेंटों में मूल्यांकन और अधिक महंगा है। सेंसेक्स का 12 महीने का पिछला पीई अनुपात मौजूदा समय में 22.7 पर है जो उसके 19 और 19.3 फीसदी के 5 और 10 वर्षीय औसत की तुलना में अधिक है। ऐसे हालात में, बाजार में गिरावट का जोखिम हमेशा बना हुआ है। इससे बचाव के लिए निवेशकों के लिए एक रास्ता अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाना है। उन्होंने अब तक सिर्फ ग्रोथ फंडों में निवेश किया है तो उन्हें अब लाभांश प्राप्ति वाले फंडों जैसे वैल्यू-केंद्रित फंडों पर ध्यान देना चाहिए। 

 
ये फंड उन शेयरों में निवेश करते हैं जो 3 फीसदी या इससे अधिक के लाभांश प्रतिफल की पेशकश करते हैं। अक्सर ये शेयर मजबूत बैलेंस शीट वाली कंपनियों के होते हैं। इन्हें कम पूंजी की जरूरत होती है और ये नियमित रूप से मुक्त नकदी प्रवाह में सक्षम हैं। डिविडेंड यील्ड फंडों के लिए नए, तेजी से चढऩे वाले और नकदी किल्लत वाले शेयरों में निवेश से परहेज करना अनिवार्य है। 
 
डिविडेंड यील्ड फंड बाजार में गिरावट के दौरान ग्रोथ फंडों को मात देने में सक्षम होते हैं। बीएनपी पारिबा म्युचुअल फंड में उप मुख्य कार्याधिकारी एवं मुख्य निवेश अधिकारी आनंद शाह कहते हैं, 'नई, विकास-उन्मुख कंपनियों को वृद्घि के लिए पूंजी जुटाने की जरूरत होती है। यह तब कठिन हो जाता है जब अर्थव्यवस्था और बाजार अच्छी स्थिति में नहीं होते हैं।' डिविडेंड यील्ड फंड ऐसी स्थिति (बाजार में कमजोरी) में अधिक सक्षम समझे जाते हैं, क्योंकि इनके पोर्टफोलियो में शामिल कंपनियों को पूंजी जुटाने की जरूरत नहीं होती है। मिंटवॉक के सह-संस्थापक निखिल बनर्जी का कहना है, 'जब कीमतें गिरती हैं, इन शेयरों का लाभांश प्रतिफल बढ़ता है, इसलिए निवेशक बाजार में कमजोरी की स्थिति में ऐसे शेयरों की ओर रुख करना पसंद करते हैं।'
 
भारत में कई डिविडेंड यील्ड फंड आकर्षक ट्रैक रिकॉर्ड बनाने में सफल रहे हैं, जो आपको इनके लिए अपने पोर्टफोलियो का कुछ हिस्सा निवेश करने के लिए प्रेरित करने की अन्य वजह है। लेकिन याद रखें कि जब बाजार में तेजी मजबूत होती है तो डिविडेंड यील्ड फंड उस स्थिति में ग्रोथ फंडों से पिछड़ सकते हैं। ये फंड गंभीर परिस्थितियों में निवेशक के पोर्टफोलियो का हिस्सा बन सकते हैं। शाह का मानना है कि निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो का 70 प्रतिशत हिस्सा ग्रोथ फंडों और 30 फीसदी डिविडेंड यील्ड फंड समेत वैल्यू-आधारित फंडों में लगाना चाहिए। वह कहते हैं, 'इससे उनका पोर्टफोलियो और अधिक मजबूत बनेगा।'
 
अच्छे डिविडेंड यील्ड फंड एक सतर्क निवेशक के पोर्टफोलियो में भी पूरी तरह अनुकूल साबित होंगे। बाजार परिदृश्य के आधार पर अपने पोर्टफोलियो में बदलाव लाने वाले निवेशक भी मौजूदा समय में इन फंडों में निवेश करने का निर्णय ले सकते हैं। बनर्जी का कहना है, 'यदि बाजार अपने मौजूदा स्तरों से और नीचे आते हैं तो ये निवेशक इस उतार-चढ़ाव का मुकाबला करने के लिए अच्छी स्थिति में होंगे।' 
 
सेवानिवृत हो चुके लोग भी डिविडेंड यील्ड फंडों पर विचार कर सकते हैं, क्योंकि उन्हें नियमित रूप से लाभांश आय की जरूरत होती है। हालांकि ऐसे निवेशकों को निवेश करने से पहले फंड के लाभांश भुगतान का रिकॉर्ड देख लेना चाहिए। उदाहरण के लिए, बीएनपी पारिबा डिविडेंड यील्ड फंड का पिछले 51 महीनों से लगातार लाभांश चुकाने का शानदार रिकॉर्ड रहा है। आपको अपने जरूरी खर्चों को पूरा करने के लिए जिस आय की जरूरत है, वह निर्धारित आय योजनाओं से आनी चाहिए, लेकिन कुछ अतिरिक्त खर्चों को पूरा करने के लिए आप इन फंडों पर निर्भर कर सकते हैं (क्योंकि ये हमेशा लाभांश चुकाने के लिहाज से उपयुक्त नहीं हैं)। इन फंडों में आपकी निवेश अवधि पांच साल से अधिक होनी चाहिए। 
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