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इधर-उधर से लेकर राय, शेयर में रकम कभी न लगाएं

तिनेश भसीन |  Jun 18, 2017 08:07 PM IST

छोटे निवेशकों को अक्सर शेयरों के बारे में सही सलाह नहीं मिल पाती है और अड़ोस-पड़ोस के लोगों या छोटे-मोटे ब्रोकरों से ही वे सलाह ले लेते हैं कि किस शेयर में कितना निवेश किया जाए। अक्सर उन्हें यह बात पता ही नहीं होती कि कई नामी-गिरामी और बड़ी ब्रोकरेज कंपनियां छोटे यानी खुदरा निवेशकों और बड़े संस्थागत निवेशकों के लिए अलग-अलग शोध विभाग चलाती हैं और अलग-अलग रिपोर्ट भी जारी करती हैं। यह बात दीगर है कि संस्थागत निवेशकों के लिए जारी होने वाली रिपोर्ट की गुणवत्ता बेशक बहुत बेहतर होती है, लेकिन खुदरा निवेशकों की रिपोर्ट भी अच्छी होती है। इसीलिए छोटे निवेशक भी इन कंपनियों का दामन पकड़ सकते हैं। कुछ कंपनियों ने तो बहुत अधिक रिटर्न की संभावना वाले शेयर चुनने में छोटे निवेशकों की मदद करने के लिए कंप्यूटर एल्गोरिदम पर आधारित सलाह देना भी शुरू कर दिया है। इनमें मार्केटस्मिथ इंडिया, मार्केट्समोजो और ऐंजल ब्रोकिंग की एआरक्यू शामिल हैं।

 
शेयर चुनने के कुछ ऐसे पैमाने होते हैं, जो सभी प्लेटफॉर्म या ब्रोकरेज कंपनियों के मामले में एक जैसे होते हैं। इन पैमानों के जरिये शेयर या कंपनी के पिछले प्रदर्शन का विश्लेषण किया जाता है, कंपनियों की तुलना उनकी प्रतिस्पद्र्घियों के साथ की जाती है, उनके वित्तीय ब्योरे का मूल्यांकन किया जाता है और उनकी कीमत यानी मूल्यांकन पर भी नजर रखी जाती है। लेकिन इतना काम करने के बाद हरेक प्लेटफॉर्म का नजरिया अलग हो जाता है। कुछ अर्निंग यानी आय को ज्यादा तवज्जो देते हैं और उन शेयरों की सलाह देते हैं, जिनमें बढ़त दिखती है। दूसरी ओर कुछ प्लेटफॉर्म मूल्यांकन को अधिक महत्वपूणर्् मानते हैं। कुछ तो यह भी बता देते हैं कि शेयर किस समय बेच देने चाहिए। उनके पास पोर्टफोलियो के नमूने भी होते हैं, जिनके जरिये वे दिखाते हैं कि जिन शेयरों को खरीदने की सलाह उन्होंने दी थी, उनका सूचकांकों की तुलना में किस तरह का प्रदर्शन रहा।
 
इन एल्गो-आधारित प्लेटफॉर्मों का एक बड़ा फायदा यह है कि निवेशक उस नुकसान से बच जाता है, जो उसे खराब सलाह से होता। एआर वेल्थ मैनेजमेंट के मुख्य कार्याधिकारी श्रीराम अय्यर कहते हैं, 'छोटे निवेशक निवेश के लिए शेयर चुनते समय आम तौर पर किसी दोस्त से मिली सलाह पर निर्भर रहते हैं। अगर वे इन प्लेटफॉर्म जाते हैं तो उन्हें निवेश संबंधी फैसला लेने के लिए निष्पक्ष शोध वाली जानकारी मिल सकती है।' वह बताते हैं कि ये प्लेटफॉर्म बहुत सुनियोजित ढंग से और इस्तेमाल करने वालों की सहूलियत का ध्यान रखते हुए शेयरों की रैंक दिखाते हैं और स्कोर भी बताते हैं। जो निवेशक वास्तव में शेयरों का मूल्यांकन करना चाहते हैं, वे इनका इस्तेमाल कर सकते हैं और बेहतर शेयर चुन सकते हैं।
 
ये प्लेटफॉर्म उन लोगों के लिए खास तौर पर अनुकूल हैं, जो शेयर बाजार में पहली बार कदम रख रहे हैं। उनके लिए या तो शेयरों के सुझाव आते हैं या पोर्टफोलियो के नमूने उपलब्ध रहते हैं। उदाहरण के लिए मार्केट्ïस मोजो ऐसे शेयरों की सूची तैयार कर देती है, जो उसके निवेश के विभिन्न पैमानों के मुताबिक सटीक होते हैं। इनमें सभी सूचीबद्घ शेयरों के बीच से चुने गए शीर्ष 10 शेयर शामिल होते हैं, शीर्ष 10 डाइवर्सिफाइड शेयर होते हैं, शीर्ष 10 लार्ज-कैप, शीर्ष 10 मिड-कैप और ऐसे ही अन्य शेयर शामिल होते हैं। मार्केटस्मिथ इंडिया ने अपने आदर्श पोर्टफोलियो में 38 शेयर शामिल किए हैं और 47 अन्य शेयरों की भी फेहरिस्त दी है।
 
ये प्लेटफॉर्म शेयरों के मूल्यांकन के लिए बुनियादी और तकनीकी विश्लेषणों के मेलजोल पर जोर देते हैं। मार्केटस्मिथ की मालिक विलियम ओ' नील इंडिया में मुख्य परिचालन अधिकारी अनुपम सिंघी का कहना है, 'इन दोनों को अगर एक साथ आजमाया जाता है तो शेयरों का बेहतर विश्लेषण करने में खासी मदद मिलती है। बुनियादी आधार जांचने से आपको पता चल जाता है कि कंपनी कितनी मजबूत है और अगर तकनीकी नजरिये से शेयर का विश्लेषण करेंगे तो पता चल जाता है कि शेयर किस समय खरीदना चाहिए और किस भाव पर उससे निकल जाना चाहिए।'
 
हालांकि एल्गो-आधारित मॉडल पूरी तरह दोषरहित भी नहीं होते। उनकी बड़ी खामी यह है कि वे केवल और केवल मात्रात्मक (क्वांटिटेटिव) पैमानों पर ही निर्भर रहते हैं। मार्केट्ïसमोजो के संस्थापक एवं मुख्य कार्याधिकारी मोहित बत्रा कहते हैं, 'कंपनी के विश्लेषण के लिए जो सामग्री इस्तेमाल की जाती है, वह उसके इतिहास यानी पिछले प्रदर्शन से जुड़ी होती है। अभी तक भविष्य का अनुमान लगाने वाला कोई भी विश्लेषण नहीं है, लेकिन हम उस पर काम कर रहे हैं।' वह उदाहरण देते हैं: कंपनी के वित्तीय परिणाम की घोषणा से पहले उसके शेयर की चाल पर नजर रखी जा सकती है और देखा जा सकता है कि वह किस दिशा में जा रहा है। अगर परिणाम अच्छा नहीं होने जा रहा है तो उसका शेयर लुढ़कता है और अगर नतीजा अच्छा रहने वाला है तो शेयर चढ़ता दिखेगा। मात्रात्मक विश्लेषण से इस प्रकार का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। इसी तरह कंपनी के बारे में कोई प्रतिकूल समाचार मिलने से पहले ही उसके शेयर की बिकवाली शुरू हो जाती है। कंप्यूटर पर आधारित प्लेटफॉर्म इस तरह की हलचल नहीं पकड़ पाते और उन्हें इसका अंदाजा तभी लगता है, जब खबर बाहर आ चुकी होती है और शेयर में उसी के मुताबिक गिरावट आ चुकी होती है।
 
बाजार के ऐतिहासिक ब्योरे से यानी किसी खास समय के प्रदर्शन की जानकारी रखने से भी यह पता नहीं चल पाता कि बाजार में किस तरह का बदलाव आ रहा है या आने वाला है। 2008 के वैश्विक आर्थिक संकट के दौरान जब बाजार में गिरावट आई थी तो कई मात्रात्मक विश्लेषण मॉडल उसका अंदाजा लगाने में नाकाम रहे थे। मात्रात्मक यानी क्वांटिटेटिव मॉडल कंपनियों का कायाकल्प होने का अंदाजा तब तक नहीं लगा सकते, जब तक कायाकल्प वित्तीय नतीजों में या तकनीकी पहलुओं अथवा अन्य पैमानों में झलकने नहीं लगता। इस समय सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयरों को भाव नहीं दिया जा रहा है क्योंकि यह क्षेत्र अभी तमाम तरह की दिक्कतों में फंसा हुआ है। फिर भी इस बात की पूरी संभावना है कि कुछ कंपनियां इस झंझावात को झेल जाएंगी और उनके प्रबंधन कंपनियों का कायाकल्प कर देंगे यानी उन्हें उबार ले जाएंगे। यदि बुनियादी तत्वों के आधार पर विश्लेषण करने वाला विश्लेषक कंपनी प्रबंधन से बात कर चुका है और उस कंपनी पर लंबे अरसे से नजर रख रहा है तो कंपनी में होने वाले कायाकल्प की भविष्यवाणी वह कंप्यूटर आधारित प्लेटफॉर्म के मुकाबले बहुत पहले कर सकता है।
 
बहरहाल इन प्लेटफॉर्मों में इस्तेमाल होने वाले एल्गोरिदम का अभी लगातार विकास ही हो रहा है। ऐंजल ब्रोकिंग में एआरक्यू एवं शोध प्रमुख वैभव अग्रवाल का कहना है, 'हम तमाम तकनीकें इस्तेमाल करते हैं, जिनमें मशीन लर्निंग भी शामिल है। जो कुछ अभी संभव नहीं लग रहा है, उसे आगे चलकर मूल्यांकन पैमाने की शक्ल में तैयार किया जा सकता है।' शेयरों के कंप्यूटर आधारित शोध में काफी विकास हुआ है और शेयर बाजार में कदम रखने वालों के लिए यह ठीकठाक विकल्प है। लेकिन जो निवेशक यहां अच्छा खासा वक्त गुजार चुके हैं, उन्हें अपने आप ही गुणात्मक विश्लेषण करना चाहिए और कुछ अन्य तरीके इस्तेमाल कर बेहतरीन शेयर खुद ही चुन लेने चाहिए।
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