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जानिए कैसे भरें अपना आयकर रिटर्न

तिनेश भसीन |  Jun 25, 2017 08:11 PM IST

यदि आपने पिछले वित्त वर्ष में नौकरी बदली है तो आयकर रिटर्न फाइल करना कुछ हद तक कठिन साबित हो सकता है, क्योंकि आपको दो फॉर्म 16 को भरने की जरूरत होगी। यदि नए नियोक्ता ने पिछली कंपनी द्वारा काटे गए कर के बारे में जानकारी अपडेट नहीं की है तो आप पर रिटर्न फाइल करते वक्त बड़ी बकाया कर देनदारी बन सकती है। कर्मचारी ऐसी स्थिति में सामान्य तौर पर दोनों नियोक्ताओं से संबंधित कर बचत निवेश और अन्य दस्तावेजों की घोषणा करते हैं, लेकिन वे यह नहीं समझते है कि इससे कर गणना में अंतर पैदा हो सकता है। मेकमाइरिटन्र्स डॉटकॉम के सह-संस्थापक विक्रम रामचंद का कहना है कि धारा 80सी के तहत 1.5 लाख रुपये, आवास ऋण ब्याज पर दो लाख रुपये, सामान्य कर छूट सीमा 2.5 लाख रुपये और राष्टï्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) में 50,000 रुपये के निवेश पर कर छूट उपलब्ध है। कुल मिलाकर ये कर छूट लगभग 6.5 लाख रुपये की राशि पर हैं। रामचंद कहते हैं, 'यदि पिछले और नए, दोनों नियोक्ता इन कटौतियों पर विचार करें तो इससे कर्मचारी के कर स्लैब में अंतर भी आ सकता है।'

 
जिन लोगों ने नौकरी बदली है, उन्हें यह सुनिश्चित करने के लिए कुल आय और कर देनदारी का स्टेटमेंट तैयार करने की जरूरत है कि कर की गणना सही स्लैब के अनुसार की गई है। इसके लिए उन्हें उस वित्त वर्ष में दोनों नियोक्ताओं से प्राप्त वेतन को जोडऩे की जरूरत होगी। सुनिश्चित करें कि आपके पास दोनों कंपनियों का फॉर्म 16 हो क्योंकि ये फॉर्म नियोक्ताओं द्वारा आपकी कर देनदारी की गणना से जुड़े विभिन्न घटकों की जानकारी देंगे और उसी हिसाब से कर कटौती की जाएगी। यदि आप पिछली कंपनी से फॉर्म 16 प्राप्त नहीं कर सके हैं तो अपनी सैलरी स्लिप का इस्तेमाल करें। आप आयकर विभाग की ई-फाइलिंग वेबसाइट पर उपलब्ध फॉर्म 26एएस का इस्तेमाल कर स्रोत पर कर कटौती का विवरण हासिल कर सकते हैं। इसके बाद आप अपनी कर देनदारी की गणना कर सकते हैं।
 
यदि आप एक साल में 12 लाख रुपये कमाते हैं और आपने धारा 80सी, मेडिकल इंश्योरेंस डिडक्शन, एनपीएस और आवास ऋण का फायदा उठाते हैं तो आपकी कर देनदारी लगभग 56,200 होगी। लेकिन, यदि आपने साल के बीच में ही नौकरी बदली है और दोनों नियोक्ताओं ने इन कर छूट पर विचार किया है तो आपकी कर देनदारी शून्य होगी। टैक्समैन डॉटकॉम से जुड़े चार्टर्ड अकाउंटेंट नवीन वाधवा कहते हैं, 'यदि कर्मचारी ने दो बार कर छूट का लाभ लिया हो तो ऐसे मामले में उसे कर देनदारी की गणना करने और अग्रिम तौर पर कर चुकाने की जरूरत होगी। नई कंपनी में नौकरी मिलने पर और अग्रिम तौर पर कर चुकाने में विफल रहने पर उससे धारा 234बी ओर 234सी के तहत बकाया कर पर ब्याज वसूला जाएगा।' 
 
यदि आपको कर की गणना अधिक जटिल लग रही हो तो किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट की मदद लें। आप ऐसे प्लेटफॉर्म की भी सेवा ले सकते हैं तो कर फाइलिंग में मदद करते हैं। ये सभी प्लेटफॉर्म आपको विभिन्न फॉर्म 16 अपलोड करने में सक्षम बनाते हैं। इसके बाद सॉफ्टवेयर स्वयं आपकी कर देनदारी की गणना करता है और यह भी बताता है कि क्या आप पर कर बकाया है। इनमें से कुछ प्लेटफॉर्म आपको कुछ सुविधाओं के नि:शुल्क इस्तेमाल की अनुमति देते हैं, यदि आप स्वयं फाइल रिटर्न करना चाहते हैं।  भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए जरूरी है कि कमाई गई आय और कर छूट के बारे में नए नियोक्ता को सूचित करें। अपने वेतन, पिछली कंपनी से संबंधित कर छूट और टीडीएस के बारे में की संपूर्ण जानकारी के साथ फॉर्म 12बी सौंपें। फॉर्म 12बी नए नियोक्ता को मुहैया कराई गई जानकारियों के आधार पर वर्ष के अंत में फॉर्म 16 बनाने में मदद करता है। 
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