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ब्याज कम फिर भी लघु बचत में दम

तिनेश भसीन |  Jul 09, 2017 09:57 PM IST

सरकार ने जुलाई से सितंबर की अवधि के लिए लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में 10 आधार अंकों की कमी करने की घोषणा की है। ब्याज दर में कमी के बाद भी 10 और 20 प्रतिशत कर दायरे में आने वाले लोगों के लिए लघु बचत योजनाएं बचत का एक सशक्त माध्यम हैं। हालांकि महंगाई को मात देने के लिए ऊंचे कर दायरे में आने वाले निवेशकों को डेट म्युचुअल फंडों पर विचार करना चाहिए। आउटलुक एशिया कैपिटल के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) मनोज नागपाल कहते हैं, 'अगर महंगाई दर 4.5 से 5.0 प्रतिशत मान कर चलें तो लघु बचत योजनाएं अब भी बैंक की सावधि जमा योजनाओं (एफडी) से अच्छी हैं। अच्छा प्रदर्शन करने वाली  कंपनी जमाएं भी बैंकों की तुलना में 1 से 1.5 प्रतिशत अधिक ब्याज दर की पेशकश करती हैं, लेकिन इनमें थोड़ा जोखिम होता है।'

 
डाकघर की लंबी अवधि की जमाएं (एफडी) कई बैंकों  की एफडी दर से अधिक प्रतिफल देती हैं। वे तीन साल की एफडी पर 7.1 प्रतिशत और पांच साल पर 7.6 प्रतिशत प्रतिफल देती हैं। इसी अवधि की एफडी पर भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) 6.25 फीसदी जबकि एचडीएफसी बैंक 6 प्रतिशत ब्याज दे रहा है। अगर निवेशक लंबी अवधि के लिए रकम लगाना चाहते हैं तो वे 6 साल की परिपक्वता अवधि वाले भारत सरकार के बॉन्ड देख सकते हैं जो 8 प्रतिशत ब्याज की पेशकश करते हैं। बजाज कैपिटल में फिक्स्ड इनकम के प्रमुख मोहित मित्तल कहते हैं, 'ये बॉन्ड किसी भी सरकारी बैंक में खरीदे जा सकते हैं और इनके साथ सरकार की गारंटी भी होती है।'
 
लेकिन अगर सबसे ऊं ची (30 प्रतिशत) कर श्रेणी में आने वाला व्यक्ति इनमें निवेश करता है तो कर पश्चात रिटर्न महंगाई दर के इर्द-गिर्द ही रहता है। लिहाजा निवेशप्रबंधक कहते हैं कि ऐसे निवेशकों के लिए डेट म्युचुअल फंड ही एकमात्र बेहतर विकल्प हैं। कम जोखिम लेने वाले निवेशकों को उन फंडों पर विचार करना चाहिए, जो परिपक्वता तक प्रतिभूतियां अपने पास रखते हैं। इन्हें एक्रुअल फंड भी कहा जाता है। लघु अवधि के कई डेट फंड और इनकम फंड इस रणनीति पर चलते हैं। मान्यताप्राप्त वित्तीय योजनाकार मल्हार मजूमदार का कहना है, 'उन फंडों का चयन कीजिए जिन्होंने 8 से 9 प्रतिशत के बीच प्रतिफल दिया हो। कई ने दो अंक में प्रतिफल दिया है, लेकिन वे योजनाएं अधिक जोखिम भी उठाती हैं।' 
 
दो अंक में प्रतिफल देने वाले एक्रुअल फंड आम तौर पर कम रेटिंग वाले बॉन्ड में निवेश करते हैं। मजूमदार की राय मेंं, 'चूक की हालत में निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए वे बॉन्ड जारी करने वालों से सहायक प्रतिभूति लेते हैं। हालांकि खुदरा निवेशकों को इनसे दूरी बनाए रखनी चाहिए।' बजाज कैपिटल के मित्तल कहते हैं कि जोखिम कम करने के लिए निवेशकों को डेट फंडों और सरकारी बॉन्ड दोनों में निवेश करना चाहिए। 
 
सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) पर ब्याज दरें कम होना निवेशकों के लिए सबसे बड़ा झटका है। अगर आप हर साल 7.9 प्रतिशत की दर पर 1 लाख रुपये का निवेश करते हैं तो 15 साल बाद आपको 32.06 लाख रुपये मिलेंगे। अगर ब्याज 10 आधार अंक कम मिले तो यह कोष इसी अवधि के दौरान 30,200 रुपये कम हो जाएगा। चूंकि, सरकार लघु बचत योजनाओं के साथ पीपीएफ पर ब्याज दर लगातार कम कर रही है, इसलिए लंबी अवधि में असर अधिक हो सकता है। 
 
हालांकि निवेश प्रबंधक लोगों को पीपीएफ में निवेश जारी रखने की सलाह देते हैं। इस सेवानिवृत्ति योजना में निवेश, ब्याज और निकासी तीनों स्तर पर कोई कर नहीं लगता। नई पेंशन प्रणाली (एनपीएस) इसका एक विकल्प हो सकती है क्योंकि उसमें भीं लंबी अवधि में बेहतर प्रतिफल देने की क्षमता है। लेकिन एनपीएस बाजार से जुड़ी योजना है, इसलिए निकासी के समय कोष पर कर लगता है। परिपक्वता के समय 60 प्रतिशत रकम एकमुश्त निकाली जा सकती है, लेकिन इसमें केवल 40 प्रतिशत ही कर मुक्त होती है। शेष 40 प्रतिशत रकम का इस्तेमाल अनिवार्य रूप से किसी बीमा कंपनी से लाइफ-लॉन्ग एन्युइटी प्लान खरीदने में करना होता है। एन्यइटी के प्रतिफल पर भी कर लगता है। सुकन्या समृद्धि योजना और वरिष्ठï नागरिक बचत योजना पर ब्याज दर अब भी आकर्षक है। जो लोग इनमें निवेश के लिए पात्र हैं, वे इन योजनाओं में निवेश जारी रख सकते हैं।
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