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स्वास्थ्य पॉलिसी को दें टॉप-अप प्लान और क्रिटिकल इलनेस कवर की घुट्ट

प्रिया नायर |  Jul 09, 2017 09:57 PM IST

अगर आपके पास स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी है और आप इसका दायरा बढ़ाना चाहते हैं तो इसके लिए टॉप-अप प्लान या क्रिटिकल इलनेस कवर खरीद सकते हैं। दोनों तरह की पॉलिसियां कम कीमत पर अतिरिक्त कवर मुहैया कराती हैं। हालांकि दोनों के काम अलग-अलग हैं। सिग्ना टीटीके हेल्थ इंश्योरेंस के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी संदीप पटेल कहते हैं, 'टॉप-अप प्लान लागत साझा करने की प्रणाली पर काम करता है। इसमें एक सीमा तक चिकित्सा पर आए खर्च का वहन पॉलिसीधारक को करना पड़ता है। इस सीमा से ऊपर खर्च होता है तो वह टॉप-अप प्लान के जरिए किया जाएगा।' क्रिटिकल इलनेस जैसी पॉलिसी तभी काम करती है जब आपके पास पहले से स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी है और आप किसी खास गंभीर बीमारी से सुरक्षा के लिए पॉलिसी लेना चाह रहे हों।

 
मोटे तौर पर एक टॉप-अप प्लान अधिक उपयोगी होता है क्योंकि यह ज्यादा बीमारियां कवर करता है। टॉप-अप प्लान के साथ आने वाली डिडक्टिबल (जिस सीमा तक पॉलिसीधारक को खर्च वहन करना पड़ता है) से जुड़ी शर्तों पर जरूर ध्यान देना चाहिए। डिडक्टिबल जितना अधिक होगा, प्रीमियम उतना ही कम होगा। टॉप-अप प्लान को सक्रिय कराने के लिए किसी एक बिल के डिडक्टिबल राशि से अधिक होना जरूरी है। पॉलिसीएक्स डॉट कॉम के संस्थापक नवल गोयल का कहना है कि इसी वजह से सुपर टॉप-अप प्लान बेहतर होता है क्योंकि इसमें सकल दावों को देखा जाता है। गोयल कहते हैं, 'सुपर टॉप-अप प्लान किसी एक साल में सभी बिलों की कुल रकम पर विचार करता है और विभिन्न स्तरों पर अस्पताल में भर्ती होना भी इसके दायरे में है।'
 
सिक्योर नाऊ इंश्योरेंस ब्रोकर्स के संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी कपिल मेहता महिलाओं के लिए खासतौर पर क्रिटिकल इलनेस पॉलिसी की सिफारिश करते हैं क्योंकि उन्हें कैंसर होने की आशंका ज्यादा रहती है। ज्यादातर स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों में ऐसी महंगी दवाएं शामिल नहीं होती हैं जिनका आजकल इलाज में इस्तेमाल होता है। चंूकि क्रिटिकल इलनेस प्लान एकमुश्त भुगतान करता है, इसलिए इसमें चिकित्सा पर हुआ खर्च शामिल होगा।
 
अगर किसी पर देनदारियां अधिक हैं तो उसके लिए क्रिटिकल इनलेस कवर अधिक उपयोगी विकल्प है। रॉयल सुंदरम जनरल इंश्योरेंस के मुख्य उत्पाद अधिकारी निखिल आप्टे कहते हैं कि अगर किसी व्यक्ति में कैंसर के लक्षण मिलते हैं और वह लंबी अवधि तक काम पर नहीं जा सकता तो वह इस रकम का इस्तेमाल अपना ऋण चुकता करने के लिए कर सकता है। आप्टे कहते हैं, 'एक बार कैंसर की पुष्टिï होने पर क्रिटिकल इलनेस कवर पूरी रकम का भुगातन करेगा और यह बात मायने नहीं रखती कि पॉलिसीधारक इसको कैसे खर्च करता है और किस तरह की चिकित्सा में उपयोग करता है। हालांकि इसमें 90 दिन तक जीवित रहने की शर्त लागू होती है। इसका मतलब हुआ कि दावे का भुगतान उसी स्थिति में होगा जब कैंसर का पता चलने के बाद मरीज 90 दिन तक जीवित रहता है। दिल के दौरे या बुरी तरह जलने की स्थिति में अगर मरीज की तत्काल मौत हो जाती है तो उसे कोई रकम नहीं मिलेगी।'
क्रिटिकल इलनेस कवर के एक दूसरी समस्या यह है कि  रकम के भुगतान बाद यह निष्प्रभावी हो जाता है। इस तरह प्रभावी तौर पर आपको पहली गंभीर बीमारी में ही रकम मिलती है और बीमारी दूसरी बार होने या बार-बार इलाज कराने पर यह कवर काम नहीं करता। इसकी तुलना में टॉप-अप प्लान का नवीकरण जीवन भर के लिए कराया जा सकता है।
 
कुछ क्रिटिकल इलनेस कवर रीइंबर्समेंट और एक मुश्त भुगतान दोनों की पेशकश करते हैं। स्टार हेल्थ ऐंड अलायड इश्योरेंस के वरिष्ठï कार्यकारी निदेशक एस प्रकाश कहते हैं, 'हमारी क्रिटिकल इलनेस पॉलिसी आम बीमारियों के लिए नियमित रीइंबर्समेंट और क्रिटिकल इलनेस के लिए एक मुश्त भुगतान दोनों का मिश्रण है। उदाहरण के लिए अगर कोई पॉलिसीधारक दिल की बीमारी या गुर्दे के रोग से पीडि़त है तो उसे एक मुश्त भुगतान किया जाएगा। इसके बाद भी नियमित स्वास्थ बीमा योजना की तरह पॉलिसी जारी रहेगी। लेकिन इसमें वह बीमारी कवर नहीं होगी जिसके लिए एकमुश्त रकम का भुगतान किया जा चुका है।' यह जरूर देखें कि टॉप-अप प्लान बाद में एक नियमित पॉलिसी में तब्दील होता है या नहीं। इसके साथ ही टॉप-अप प्लान के मामले में प्रतीक्षा अवधि, जिन बीमारियों का कवर नहीं है उनका और पहले से चली आ रही बीमारी का भी ध्यान रखें। 
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