होम » Investments
«वापस

धोखाधड़ी पर एक कदम, ग्राहक के हक में

संजय कुमार सिंह |  Jul 11, 2017 10:07 PM IST

अभी तक यह स्थिति थी कि जब बैंक ग्राहक किसी धोखाधड़ी की शिकायत करते थे तो उनकी कोई सुनवाई नहीं की जाती थी और बैंक उन्हें ही दोषी मानते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने हाल में एक परिपत्र जारी कर  इस नियम को बदला है। यह ग्राहकों के लिए अच्छी खबर है। बैंक बाजार डॉट कॉम के मुख्य कारोबार विकास अधिकारी नवीन चंदानी कहते हैं, ' रिजर्व बैंक का ताजा प्रावधान ग्राहकों के हित में है। पहले अगर आपके कार्ड को कहीं इस्तेमाल कर लिया जाता था तो आपको साबित करना होता था कि आपने इसका इस्तेमाल नहीं किया है।' मगर अब यह साबित करने की जिम्मेदारी बैंक की है कि कार्ड का इस्तेमाल आप ही ने किया है। ऐसा लग रहा है कि ग्राहकों के खातों या कार्डों से गैरकानूनी तरीके से रकम निकालने से संबंधित बढ़ती शिकायतों  के कारण आरबीआई ने यह कदम उठाया है। विशेषज्ञों का कहना है कि नए नियमों से डिजिटल लेनदेन में ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा। 

 
नए नियमों में ग्राहकों के लिए 'शून्य देनदारी' और 'सीमित देनदारी' के प्रावधान शामिल हैं। बैंक के स्तर पर होने वाली धोखाधड़ी, लापरवाही या खामी के मामले में ग्राहक की कोई देनदारी नहीं होगी। ऐसे मामलों में अगर ग्राहक ने बैंक के पास शिकायत नहीं भी दर्ज कराई तो भी उसकी जिम्मेदारी शून्य ही होगी। आरबीआई का यह नियम वैश्विक नियमों के समान है। अमेरिका जैसे विकसित देशों में शून्य या सीमित जिम्मेदारी पहले से ही स्थापित नियम है। मुंबई के एक फाइनैंंशियल प्लानर अर्णव पंड्या ने कहा, 'अमेरिका में अनधिकृत लेनदेन की शिकायत के बाद बैंक तुरंत ही ग्राहकों को उनका पैसा वापस करते हैं क्योंकि वे आपको अपना ग्राहक बनाए रखना चाहते हैं। साथ ही वे नकारात्मक प्रचार या नियामक के जुर्माना लगाने जैसी स्थिति से बचना चाहते हैं।'
 
नए नियम 
 
तीसरे पक्ष की गलती के मामले में, जिसमें न बैंक की गलती है न ग्राहक की बल्कि सिस्टम में खामी की वजह से नुकसान होता है तो ग्राहक की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। बशर्ते कि ग्राहक बैंक से लेनदेन से संबंधित सूचना मिलने के तीन कार्यदिवस के भीतर उसके पास शिकायत दर्ज करा देता है। अगर ग्राहक अपने भुगतान से संबंधित जानकारियां किसी से साझा करता है और इस वजह से नुकसान होता है तो फिर उसकी भी देनदारी बनेगी। अगर ग्राहक अपने बैंक को अनधिकृत लेनदेन की सूचना नहीं देगा तो इसका पूरा नुकसान उसे ही उठाना होगा। अगर ग्राहक द्वारा बैंक के पास शिकायत दर्ज कराने के बाद कोई अनधिकृत लेनदेन होता है तो इसका जिम्मा बैंक पर ही होगा। तीसरे पक्ष की खामी की वजह से होने वाले नुकसान के बारे में अगर ग्राहक बैंक को (लेन-देन की सूचना मिलने के) 4 से 7 कार्यदिवसों के भीतर सूचित नहीं करता है तो उसकी भी सीमित देनदारी बनेगी। इस मामले में देनदारी लेनदेन के मूल्य या 5,000 रुपये से 25,000 रुपये के बीच की राशि, इनमें से जो भी कम हो, होगी। अगर ग्राहक ने बैंक को शिकायत 7 कार्यदिवसों के बाद की तो ग्राहक की देनदारी बैंक बोर्ड की स्वीकृत नीति पर निर्भर करेगी।
 
भरोसा बढ़ाने वाले कदम 
 
विशेषज्ञ आरबीआई के इस कदम को सही दिशा में बता रहे हैं। पैसाबाजार डॉट कॉम के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) और सह-संस्थापक नवीन कुकरेजा कहते हैं, 'एसएमएस और ई-मेल के जरिये लेनदेन के अलर्ट भेजने (जवाब के विकल्प सहित) को अनिवार्य बनाकर आरबीआई बैंकों को विवाद की सूचना देने और समाधान प्रणाली को ज्यादा पारदर्शी बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।' उन्होंने कहा कि तीसरे पक्ष की खामी के मामले में ग्राहकों के लिए अलग-अलग देनदारी तय की गई है, जिसका मतलब है कि ग्राहक का दायित्व इस पर निर्भर करेगा कि वह कब शिकायत दर्ज कराता है। आरबीआई की इस पहल को ग्राहकों में जागरूकता बढ़ाने और धोखाधड़ी की जल्द सूचना देने को प्रोत्साहित करने के रूप में देखा जा रहा है।  इस समय जब आप कार्ड से या ऑनलाइन लेनदेन करते हैं और अगर आपने बैंक में मोबाइल नंबर या ईमेल आईडी पंजीकृत करा रखा है तो आपको एक एसएमएस या ईमेल मिलता है। लेकिन अगर लेनदेन गैर कानूनी है तो आपको बैंक को सूचना देने के लिए अलग नंबर का इस्तेमाल करना होगा।
 
एसबीआई काड्र्स के सीईओ विजय जसुजा ने कहा, 'इस अधिसूचना में बैंकों और कार्ड प्रदाताओं से कहा है कि वे इसी एसएमएस या ईमेल अलर्ट में जवाब का विकल्प भी दें ताकि ग्राहक बैंक को यह सूचना दे सकें कि यह लेनदेन अनधिकृत है या नहीं। इसी जवाब को ग्राहक की ओर से अनधिकृत लेनदेन की शिकायत माना जाएगा।'आरबीआई की अधिसूचना के मुताबिक अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन के मामले में ग्राहक की जिम्मेदारी साबित करने का जिम्मा बैंक पर होगा। बैंकबाजार डॉट कॉम के मुख्य कारोबार विकास अधिकारी नवीन चंदानी ने कहा, 'यह प्रावधान ग्राहकों के हित में है। पहले अगर आपका कोर्ड कहीं इस्तेमाल कर लिया जाता था तो आपको साबित करना होता था कि आपने इसका इस्तेमाल नहीं किया है। अब यह साबित करने की जिम्मेदारी बैंक की है कि आपने इसका इस्तेमाल किया है।'
 
सुरक्षा से नहीं करें समझौता 
 
लेनदेन और धोखाधड़ी को लेकर बैंकों और कार्ड उपयोगकर्ताओं के बीच विवाद होते रहते हैं। ऐसे विवादों में किसी संस्थान से जीतना आसान नहीं होता है। इसलिए ऐसे विवादों में पडऩे के बजाय इनसे बचाव ही बेहतर उपाय है। क्रेडिट सुधार के सह-संस्थापक अरुण राममूर्ति कहते हैं, 'किसी ऐसी इंटरनैशनल वेबसाइट पर क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने से बचें, जिसमें टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन की जरूरत नहीं होती हो।'
कीवर्ड bank, atm, cash,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक