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कैडिला का नया सिलसिला, एक अरब डॉलर का काफिला

राम प्रसाद साहू |  Jul 16, 2017 09:24 PM IST

दवा क्षेत्र के दिग्गज भारतीय निर्माताओं के लिए अमेरिकी बाजार बिक्री के लिहाज से सबसे बड़ा भौगोलिक क्षेत्र है। दवा कंपनियों के राजस्व में इस बाजार का 20 से 50 फीसदी का योगदान है। हाल में कैडिला हेल्थकेयर ने घोषणा की कि वह अगले तीन साल के दौरान अपनी अमेरिकी बिक्री दोगुनी कर 1 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंचाने की संभावना तलाश रही है। इस समय उसकी बिक्री 55.3 करोड़ डॉलर है। कैडिला को सन फार्मास्युटिकल, ल्यूपिन, डॉ. रेड्डïीज और अरविंदो फार्मा जैसी कंपनियों की जमात में शामिल होने के लिए हर साल लगभग 22 फीसदी की दर से अपना व्यवसाय बढ़ाना होगा। ये कंपनियां 1 अरब डॉलर की बिक्री अमेरिका में कर लेती हैं।
वित्त वर्ष 2015 में कैडिला की कुल बिक्री में अमेरिकी बाजार का योगदान 24 फीसदी जो वित्त वर्ष 2017 में बढ़कर 40 फीसदी हो गया। ऐंटीक स्टॉक ब्रोकिंग के कुणाल रंडेरिया का मानना है कि कंपनी वित्त वर्ष 2018 में 40 नए लॉन्च (प्रतिस्पर्धियों की तुलना में सबसे ज्यादा) की मदद से अगले तीन साल में अपना अमेरिकी व्यवसाय दोगुना करने के लिहाज से मजबूत स्थिति में हैं। अमेरिकी दवा नियामक एफडीए के पास करीब 200 एब्रिविएटेड न्यू ड्रग एप्लीकेशन (एएनडीए) लंबित हैं। इस कारण भी कंपनी अगले तीन वर्षों के दौरान हर साल 30 दवा अमेरिकी बाजार में उतारने की स्थिति में है। एंटी-इन्फ्लेमेटरी दवा लियाल्डा और टॉप्रोल (ब्लड प्रेशर) और गैस्ट्रिक ड्रग प्रीवेसिड जैसे बड़े लॉन्च के अलावा कंपनी ने ट्रांस-डर्मल्स और स्पेशियलिटी व्यवसाय के स्वरूप में कॉम्पलेक्स जेनेरिक दवाओं पर भी जोर दिया है।
अपने प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले कैडिला को जिस मामले में बढ़त है, वह उसे अपने निर्माण संयंत्रों के लिए अमेरिकी नियामक की मंजूरी मिलना है। यह एकमात्र ऐसी लार्ज-कैप जेनेरिक कंपनी है जिसकी तीन प्रमुख इकाइयों को पिछले कुछ महीनों में अमेरिकी नियामक ने मंजूरी दे दी है। ज्यादातर विश्लेषक कंपनी के अमेरिकी व्यवसाय को लेकर सकारात्मक हैं, लेकिन पिछले छह महीनों में जिस तरह कंपनी की केटिंग में बदलाव किया गया है, उससे इसका मौजूदा मूल्यांकन उसके बड़े प्रतिस्पर्धियों की तुलना में 20 फीसदी अधिक है। निवेशकों को गिरावट पर इस शेयर में निवेश करना चाहिए।
इसी तरह ग्लेनमार्क भी कैडिला के नक्शे-कदम पर है। पहले दाखिल करने के मौके के कारण ग्लेनमार्क की भी अमेरिकी बाजार में इतनी ही बिक्री है। सिप्ला के राजस्व में भी अमेरिकी बाजार का लगभग 40 करोड़ डॉलर का योगदान है। 1 अरब डॉलर के लक्ष्य को पार करने के लिए उनको भी उत्पाद मंजूरियों और विशेष मौकों की जरूरत होगी।
सिप्ला के कुल राजस्व में अमेरिकी बाजार (पिछले साल इनवेजेन के अधिग्रहण से पहले) का योगदान 10 प्रतिशत से भी कम था। वित्त वर्ष 2017 में 39.2 करोड़ डॉलर के अमेरिकी राजस्व के साथ उसके कुल राजस्व में अमेरिकी योगदान दोगुना बढ़कर 20 फीसदी हो गया। अमेरिकी बाजार में देर से प्रवेश करने वाली सिप्ला के लिए उसका पोर्टफोलियो और अपना  नेटवर्क स्थापित करने की उसकी क्षमता और बाजार मौजूदगी ही सब कुछ है।
अमेरिकी नियामक के पास सिप्ला के लगभग 95 एएनडीए लंबित हैं। उसकी 45 दवाएं अमेरिकी बाजार में हैं और 10 में सबसे अव्वल है और 25 में वह टॉप-3 में शामिल है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2017 में 32 एएनडीए आवेदन दिए। वह हर साल 20 एएनडीए आवेदन देगी। अहम बात यह है कि एएनडीए आवेदनों से संबंधित उसकी ज्यादातर दवाएं कॉम्पलेक्स जेनेरिक क्षेत्र की  हैं, जैसे रेस्पिरेटरी और ऑनकोलोजी। ये सबसे तेजी से बढ़ रही थेरेपी में शामिल हैं।
इसका राजस्व वित्त वर्ष 2020 तक 70 करोड़ डॉलर पहुंच जाने का अनुमान है जो वित्त वर्ष 2017 से 2020 के बीच 21 फीसदी की सालाना वृद्घि होगी। यदि कंपनी की राजस्व वृद्घि इसी रफ्तार से बढ़ी तो वह भी वित्त वर्ष 2022 तक अमेरिका में 1 अरब डॉलर के राजस्व का आंकड़ा पार कर जाएगी। निवेशकों को इस शेयर पर दांव लगाने से पहले विभिन्न बाजारों में इन्हेलेशन पोर्टफोलियो पर स्थिति साफ होने का इंतजार करना चाहिए। हाल के महीनों में ग्लेनमार्क की अमेरिकी बिक्री कॉलेस्टेरोल घटाने वाली जेनेरिक दवा जेटिया की वजह से बढ़ी है। यह मौका उसे फस्र्ट-टु-फाइल अवसर के कारण मिला। ग्लेनमार्क ने कहा है कि उसे इस दवा से 20 करोड़ डॉलर की बिक्री की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2018 में 15 नए लॉन्च की मदद और अपने मौजूदा दवा पोर्टफोलियो की बदौलत ग्लेनमार्क को वर्ष 2018 में 12 से 15 फीसदी की वृद्घि का अनुमान  है।

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