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सरल रिटर्न भरने में भी अब ज्यादा मुश्किल

तिनेश भसीन और संजय कुमार सिंह |  Jul 16, 2017 09:29 PM IST

अभी तक जिस व्यक्ति की सालाना आय ढाई लाख रुपये से कम होती थी, उसे रिटर्न नहीं भरना पड़ता था। लेकिन इस साल से इसका आधार केवल कर योग्य आय नहीं होगा। अब अगर करदाता की लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (दीर्घावधि पूंजी लाभ) जैसी छूट प्राप्त आय 2.5 लाख रुपये की बुनियादी छूट सीमा से ज्यादा है तो उसे अनिवार्य रूप से रिटर्न भरना पड़ेगा। उदाहरण के लिए अगर कोई व्यक्ति एक साल से अधिक समय से रखे हुए 3 लाख रुपये के इक्विटी म्युचुअल फंडों को बेचता है। उसकी अन्य कोई आय नहीं है। निवेश पर मिलने वाला लाभ भी कर मुक्त है। इस तरह उसकी पूरी आय कर से मुक्त है। लेकिन ऐसे मामलों में भी अब करदाता के लिए रिटर्न भरना जरूरी कर दिया गया है। पीडब्ल्यूसी इंडिया में पार्टनर और लीडर (व्यक्तिगत कर) कुलदीप कुमार कहते हैं, 'हो सकता है कि करदाताओं को नियमों में ऐसे छोटे-मोटे बदलावों के बारे में पता न हो, लेकिन इसकी वजह से कर अधिकारी नोटिस जारी कर सकते हैं।' आपकी आय और संपत्ति का ब्योरा हासिल करने के लिए हाल में जारी नियमों ने रिटर्न भरना और जटिल बना दिया है। एक मामूली गलती या सूचना की चूक भविष्य में महंगी पड़ सकती है।

आधार और पैन को जोडऩा अनिवार्य
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने 4 जुलाई को एक अधिसूचना जारी की है, जिसमें कहा गया है कि आयकर भरने वाले सभी लोगों को अपने आधार का ब्योरा या आधार का नामांकन नंबर अनिवार्य रूप से देना होगा। कर विशेषज्ञों का कहना है कि जून में जब उच्चतम ने उन लोगों को राहत दी थी, जिनके पास आधार नहीं था तो बहुत से लोगों ने सोचा था कि अगर उनके पास आधार नहीं है तो भी वे रिटर्न भर सकते हैं।
उच्चतम न्यायालय ने सरकार से केवल इतना कहा है कि वह उन लोगों के पैन रद्द न करे, जिनके पास आधार नहीं है। यह राहत केवल उन लोगों के लिए थी, जिन्हें रिटर्न नहीं भरना पड़ता है। ऐसे व्यक्ति वित्तीय लेनदेन के लिए अपने पैन का ब्योरा दे सकते हैं। क्लियरटैक्स के संस्थापक और सीईओ अर्चित गुप्ता ने कहा, 'आधार नंबर या नामांकन आईडी के बिना करदाता जुलाई से अपना टैक्स रिटर्न नहीं भर पाएंगे।' बहुत से लोग इस बात को लेकर भी चिंतित थे कि अगर उनने पैन को जून के अंत तक आधार से नहीं जोड़ा तो उनका पैन रद्द हो जाएगा। लेकिन मामला ऐसा नहीं है। आप अब भी आयकर विभाग की ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर पैन और आधार को जोड़ सकते हैं।

आईटीआर फॉर्म में बदलाव
लोगों के लिए रिटर्न भरना आसान बनाने के लिए सरकार ने आयकर रिटर्न के फॉर्मों (आईटीआर) को तर्कसंगत बनाया है। इस आकलन वर्ष में फॉर्मों की संख्या 9 से घटाकर 7 कर दी गई है। आरएसएम एस्ट्यूट कंसल्टिंग ग्रुप के संस्थापक सुरेश सुराणा कहते हैं, 'सहूलियत के लिए कुछ आईटीआर फॉर्मों का विलय कर दिया गया है। इस साल के  आईटीआर-2 ने पिछले साल जारी तीन फॉर्मों- आईटीआर-2, आईटीआर-2ए और आईटीआर-3 की जगह ले ली है।' इस साल आईटीआर-1 (सहज) महज एक पृष्ठ का फॉर्म है, जिसका इस्तेमाल 50 लाख रुपये तक की सालाना आय वाले वे लोग कर सकते हैं जिनकी केवल वेतन आय, ब्याज आय और आवास संपत्ति से आय है। लेकिन जिन लोगों की सालाना आमदनी 50 लाख रुपये से अधिक है और जिनके एक से अधिक घर हैं, उन्हें आईटीआर-2 फॉर्म भरना होगा।

आमदनी अधिक तो घोषणाएं भी अधिक
पिछले आकलन वर्ष में सरकार ने उन लोगों के लिए आईटीआर में शेड्यूल एएल जोड़ा था, जिनकी वार्षिक आमदनी 50 लाख रुपये या उससे अधिक है। इन अधिक आमदनी वाले लोगों को वित्त वर्ष के अंत में खास संपत्तियों और देनदारियों की घोषणा भी करनी होगी।
पिछले साल के अंत तक करदाताओं को केवल अचल संपत्ति, पास की नकदी, आभूषण, वाहनों जैसी संपत्तियों की घोषणा करनी होती थी। इस साल से कर अधिकारियों ने अनुसूची में ब्योरों का दायरा बढ़ा दिया है। अब इन करदाताओं को शेयर, म्युचुअल फंड, बीमा जैसी वित्तीय संपत्तियों की भी घोषणा करनी होगी। उन्हें जमीन-जायदाद के ब्योरे देने होंगे और चल संपत्तियों का विवरण भरना होगा। गुप्ता कहते हैं, 'अगर किसी करदाता की किसी साझेदारी फर्म में हिस्सेदारी है तो उसे साझेदारी फर्म का पैन नंबर देना होगा और उसमें किए गए निवेश का विवरण बताना होगा।'

सभी आय की घोषणा
बहुत से लोगों को यह नहीं पता होता कि अगर बचत बैंक खाते में रखे पैसे पर सालाना ब्याज 10,000 रुपये से अधिक मिलता है तो इस पर भी कर लगता है। लेकिन अगर बचत खाते में ब्याज आय 10 हजार रुपये कम है तो भी आपको रिटर्न भरते समय इसकी जानकारी देनी होगी। लोगों में यह भी गलतफहमी है कि पांच साल की कर बचत वाली सावधि जमा (एफडी) पर मिलने वाले ब्याज पर कर नहीं लगता है। इस एफडी से निवेश के समय धारा 80 सी के तहत कर बचाने में मदद मिलती है, लेकिन इससे मिलने वाले पूरे ब्याज पर कर लगता है। 
बैंक एफडी पर टीडीएस (स्रोत पर कर कटौती) के बावजूद आपको अपनी कर श्रेणी के हिसाब से इस ब्याज पर कर देना होगा। बैंक टीडीएस के रूप में केवल 10 फीसदी राशि काटते हैं। अगर आप 20 से 30 फीसदी वाले कर स्लैब में आते हैं तो एफडी पर मिले ब्याज पर आपको अतिरिक्त कर चुकाना होगा।

नोटबंदी के दौरान नकद जमा
नोटबंदी के दौरान अगर आपने 2 लाख रुपये अधिक की नकद राशि जमा कराई है तो आपको रिटर्न भरते समय इसका ब्योरा देना होगा। सुराणा कहते हैं, 'आपको जमा कराए गए पैसे और जिस बैंक में जमा कराए हैं, उसका नाम, आईएफएससी कोड और अपना खाता संख्या जैसी जानकारियां मुहैया करानी होंगी। सभी आईटीआर फॉर्मों में यह सामान्य जरूरत है।' कर अधिकारियों के पास बैंकों के आंकड़े पहले से ही हैं। वे इन ब्योरों का बैंकों के आंकड़ों से मिलान करेंगे। ब्योरा नहीं मिलने पर वे कार्रवाई शुरू कर सकते हैं। इसलिए आप यह सुनिश्चित करें कि नकदी जमा की सही जानकारी दी जाए।

अंतिम तिथि में बदलाव
अगर आप 31 जुलाई की अंतिम तिथि तक रिटर्न नहीं भरते हैं तो भी आप रिटर्न में संशोधन कर सकते हैं। पहले कोई करदाता तभी रिटर्न में संशोधन कर सकता था, जब उसने अंतिम तिथि यानी 31 जुलाई तक रिटर्न भरा हो। उदाहरण के लिए कोई व्यक्ति अंतिम तारीख निकलने के बाद अगस्त में रिटर्न भरता है तो वह चूक या त्रुटि की स्थिति में 31 मार्च 2019 तक रिटर्न में संशोधन करने के लिए स्वतंत्र है।
इसके साथ ही सरकार ने अगले आकलन वर्ष से देरी से भरे जाने वाले रिटर्न के लिए समयावधि घटा दी है। अभी करदाता वित्त वर्ष 2016-17 की आय का रिटर्न 31 मार्च 2019 तक भर सकता है। आगे से व्यक्ति को रिटर्न एक ही आकलन वर्ष में भरना होगा। वर्ष 2017-18 का रिटर्न 31 मार्च 2019 तक भरा जाना चाहिए।

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