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नुकसान दिखाएं और कर देनदारी घटाएं

प्रिया नायर |  Jul 16, 2017 09:31 PM IST

कोई भी अपने निवेश पर नुकसान नहीं उठाना चाहता। इससे प्रतिफल कमाने के लिए निवेश का पूरा उद्देश्य ही खत्म हो जाता है। लेकिन ऐसी परिस्थितियां भी आती हैं जब शेयर बाजार, संपत्ति बाजार या सोने जैसी संपत्तियों की विपरीत चाल आपको नुकसान उठाने के लिए बाध्य करती है।
लेकिन ऐसी परिस्थितियां आयकर के लिहाज से अच्छी भी साबित हो सकती हैं। किसी पूंजीगत संपत्ति की बिक्री पर हुए नुकसान को इसी तरह की संपत्तियों की बिक्री से हुए फायदे के साथ समायोजित किया जा सकता है और कर छूट का दावा किया जा सकता है। इन संपत्तियों में मुख्य रूप से सूचीबद्घ इक्विटी शेयर, इक्विटी म्युचुअल फंड, जमीन-जायदाद या सोना शामिल है। आइए जानते हैं कि कैसे नुकसान को लाभ के साथ समायोजित किया जा सकता है।
मान लीजिए कि आपने 1 करोड़ रुपये की कीमत वाला एक घर खरीदा जिसे खरीदे दो साल पूरे नहीं हुए हैं। आप हर साल लगभग 10 लाख रुपये का ब्याज चुका रहे हैं। लेकिन इस संपत्ति से किराया आय सिर्फ 2.5 लाख रुपये सालाना है। अब आप चाहते हैं कि इस संपत्ति को बेचकर नुकसान कम कर लिया जाए। लेकिन रियल एस्टेट बाजार में मंदी है और आपको इस संपत्ति के लिए कोई भी 1 करोड़ रुपये से अधिक देने को तैयार नहीं है। लेकिन संपत्ति की इंडेक्सेशन कीमत बढ़कर 1.3 करोड़ रुपये पर पहुंच गई है। इसलिए यदि आप इसे 1 करोड़ रुपये में बेचते हैं तो आपको तकनीकी दृष्टिï से 30 लाख रुपये का नुकसान होगा। अब आप इस नुकसान को शेयरों या अन्य संपत्ति की बिक्री से हुए लाभ के संग समायोजित कर सकते हैं। इसी तरह से, मान लीजिए कि आपके पोर्टफोलियो में किसी खास कंपनी का शेयर एक साल में 30 फीसदी तक गिरा गया है। आप उस कंपनी के शेयर बेच सकते हैं, नुकसान दर्ज कर सकते हैं और इस नुकसान का इस्तेमाल अन्य कंपनियों के शेयरों की बिकवाली से हुए लाभ के साथ समायोजित करने में कर सकते हैं।
एचऐंडआर ब्लॉक के निदेशक वैभव सांकला कहते हैं, 'कोई भी व्यक्ति उन सभी लेनदेन में छूट का दावा कर सकता है जिनमें लाभ को कर से छूट हासिल न हो। इसमें इक्विटी शेयरों की बिक्री (यदि एक साल से कम समय में बेच दिया जाए) या संपत्ति की बिक्री (यदि दो साल से कम समय में बेची जाए) से हुआ लाभ शामिल है। इसी तरह इक्विटी आधारित म्युचुअल फंडों की बिक्री से हुए नुकसान को भी छूट के योग्य माना गया है, बशर्ते कि इन फंडों को एक साल से भी कम समय में बेच दिया गया हो।'
वह कहते हैं कि यदि जिन इक्विटी शेयरों को आपने एक साल से अधिक की अवधि तक रखा है और उनसे  आपको दीर्घावधि पूंजी नुकसान हुआ हैे तो आपको इस नुकसान पर कोई कर छूट नहीं मिलेगी क्योंकि इस तरह हुए लाभ (दीर्घावधि पूंजी लाभ) पर कोई कर नहीं लगता। टैक्समैन डॉटकॉम के महा प्रबंधक नवीन वाधवा कहते हैं, 'पूंजी लाभ आम तौर पर नियमित आधार पर हासिल नहीं किया जाता। ये तभी मिलता है जब आप शेयर या जमीन-जायदाद आदि बेचते हैं। यही वजह है कि पूंजी लाभ को किसी भी तरह की आय के साथ समायोजित नहीं किया जा सकता, बल्कि इसे पूंजी लाभ के साथ ही समायोजित किया जा सकता है।'
कर देनदारी से बचने के लिए अल्पावधि पूंजी नुकसान को अल्पावधि और दीर्घावधि पूंजी लाभ के साथ समायोजित किया जा सकता है, लेकिन दीर्घावधि पूंजी नुकसान को सिर्फ दीर्घावधि पूंजी लाभ के साथ ही समायोजित करना होगा। शेयरों और शेयरों से जुड़ी निवेश योजनाओं के लिए दीर्घावधि एक साल से अधिक का समय होता है जबकि जमीन-जायदाद यानी संपत्ति के लिए यह दीर्घावधि दो वर्ष है, बशर्ते कि यह संपत्ति अप्रैल 2017 के बाद खरीदी गई हो। यदि संपत्ति अप्रैल से पहले खरीदी गई है तो इसे अपने पास रखने की अवधि तीन साल है।
गैर-सूचीबद्घ शेयरों, डेट म्युचुअल फंडों, गोल्ड डिपोजिट बॉन्ड, स्पेशल बेयरर बॉन्ड, स्वर्ण जमा पत्रों और सूचीबद्घ शेयरों (एक साल से ज्यादा रखना होगा) को यदि गैर-बाजार सौदे के जरिये बेचा जाए तो इस पर होने वाले नुकसान पर भी कर छूट मिलेगी। यहां तक कि वैश्विक लेनदेन में होने वाले नुकसान, चाहे वह संपत्ति हो या शेयर, को भारत में पूंजी लाभ के साथ समायोजित किया जा सकता है। वाधवा कहते हैं, 'दलील यह है कि दीर्घावधि पूंजी लाभ पर 10 प्रतिशत या 20 प्रतिशत कर लगता है। इसलिए इन्हें अल्पावधि पूंजी लाभ (जिन पर 30 फीसदी कर लागू है) के साथ समायोजित किए जाने की अनुमति नहीं है।'
आप इस नुकसान को आगे (अल्पावधि और दीर्घावधि दोनों पूंजी लाभ) भी ले जा सकते हैं और इसे भविष्य में होने वाले लाभ के साथ समायोजित कर सकते हैं। ऐसे किसी भी  नुकसान को आठ वर्ष आगे ले जाना संभव है। लेकिन शर्त यही है कि आप अपना रिटर्न तय तारीख के अंदर ही दाखिल कर दें।
क्लियरटैक्स के संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी अर्चित गुप्ता कहते हैं, 'तय तारीख पर रिटर्न दाखिल करना' महत्त्वपूर्ण है क्योंकि तभी आप नुकसान को आगे स्थानांतरित (कैरी फॉर्वर्ड) कर सकते हैं और आगे के किसी वर्ष में हुए नुकसान में इसे समायोजित कर सकते हैं। इस बीच यदि आप किसी वर्ष में तय तारीख से पहले रिटर्न दाखिल करना भूल जाते हैं तो फिर नुकसान को पिछले पूंजी लाभ के साथ समायोजित करने का मौका भी चूक सकते हैं।'

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